NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
लेबनान में ड्राइवरों और परिवहन कर्मचारियों को लेकर सरकारी उदासीनता के ख़िलाफ़ हड़ताल
हड़ताली श्रमिकों ने कई प्रमुख राजमार्गों और सड़कों को अवरुद्ध कर दिया और सरकार से बढ़ती महंगाई के मद्देनज़र ईंधन और दूसरी वस्तुओं पर दी जा रही पिछली सब्सिडी को बहाल करने की मांग की।
पीपुल्स डिस्पैच
15 Jan 2022
Lebanon

लेबनान में हज़ारों ड्राइवरों और परिवहन क्षेत्र के श्रमिकों ने ईंधन की बढ़ती क़ीमतों और अपनी परेशानियों को दूर करने में सरकार की नाकामी के विरोध में गुरुवार, 13 जनवरी को एक राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आयोजन किया। टैक्सी ड्राइवरों, ट्रक ड्राइवरों और टैंकर ड्राइवरों सहित परिवहन कर्मचारियों ने कई प्रमुख राजमार्गों और विभिन्न शहरों और क़स्बों के भीतर से गुज़रने वाली सड़कों को अवरुद्ध करके देश को ठप कर दिया। कई सार्वजनिक परिवहन और श्रमिक संघों की अगुवाई में इन श्रमिकों ने गुरुवार को "आक्रोश दिवस" के रूप में मनाया और 12 घंटे तक चलने वाले अपने उस विरोध प्रदर्शन को सुबह 5 बजे से शुरू कर दिया।

प्रदर्शनकारी ड्राइवरों ने अपनी चिंताओं की अनदेखी करने और तबाही पैदा करने वाले आर्थिक संकट और मुद्रा के ध्वस्त होने के बीच धीरे-धीरे ईंधन और दूसरे ख़र्चों पर सब्सिडी को ख़त्म करने को लेकर सरकार पर अपना ग़ुस्सा निकाला। विभिन्न ख़बरों की रिपोर्टों में कहा गया है कि उनके विरोध के चलते देश भर में यातायात बाधित हो गया, जिससे काम में देरी हुई और कई कार्यस्थलों, बैंकों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों को दिन भर के लिए बंद करना पड़ा।

राजधानी बेरूत, वरदुन, हमरा, डोरा, करंतिना, मकालेस, नाहर अल-कल्ब, सरबा, सिदोन, नामेह, एले, दहर अल-बयार सहित अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शन किये गये। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर राजमार्गों और सड़कों को अवरुद्ध करने के लिए अपने ख़ुद के ट्रकों, बसों और दूसरे वाहनों का इस्तेमाल किया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने यातायात को ठप करने के लिए बड़े-बड़े कूड़ेदानों और कूड़े से लदे नगरपालिका के डंपस्टरों का भी इस्तेमाल किया। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और आम जनता के बीच झड़प की ख़बरें मिलने के बाद विरोध प्रदर्शनों पर ऩजर रखने के लिए उन इलाक़ों में लेबनानी सेना और सुरक्षा बलों को भारी संख्या में तैनात किया गया। समाचार रिपोर्टों के मुताबिक़, इन विरोध प्रदर्शनों के साथ ही उन ईंधन वितरकों की ओर से भी एक विरोध का आयोजन किया गया, जिन्होंने मुद्रा संकट को हल करने को लेकर सरकार से हस्तक्षेप किये जाने तक अंतर्राष्ट्रीय कार्गो को उतारने से इनकार कर दिया था।

यूनियन एंड सिंडिकेट्स ऑफ़ द लैंड ट्रांसपोर्ट सेक्टर के प्रमुख, बासम तलैस ने स्थानीय मीडिया को बताया कि गुरुवार की कार्रवाई सरकार के ख़िलाफ़ उनके आक्रोश की "शुरुआत" है, जिसने भूमि परिवहन क्षेत्र का समर्थन करने और उल्लंघन बंद किये जाने के अपने वादों को पूरा नहीं किया है। हम राजनीति या कैबिनेट की नाकमी के कारणों को लेकर लापरवाह नहीं हो सकते।

उन्होंने कहा, "हमने इकट्ठा होने और विरोध करने के लिए एक वक़्त और जगह तय किया है और हड़ताल का मक़सद देश को बर्बाद करना नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि "हड़ताल के आख़िर में अगले क़दमों का ऐलान किया जायेगा।"

जनरल लेबर यूनियन के प्रमुख, बेचारा अल-असमर ने विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए एक बयान में कहा कि उनकी कार्रवाइयां "लोगों के प्रति अधिकारियों की भूमिका और अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए एक आवाज़ देने की तरह थीं।"

प्रधान मंत्री नजीब मिकाती की अगुवाई वाली लेबनानी सरकार ने बार-बार बढ़ती सामान्य मुद्रास्फीति और अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले लेबनानी पाउंड के मूल्य में आयी गिरावट के बीच परिवहन क्षेत्र के श्रमिकों को उनके काम से जुड़े ख़र्चों, ख़ासकर ईंधन की लागत से निपटने में मदद करने के लिए मुआवज़े और सब्सिडी के रूप में सहायता का वादा किया है।

पिछले कुछ सालों में अपने मूल्य का तक़रीबन 95% खो चुका लेबनानी पाउंड काले बाज़ार में एक डॉलर के लिए 31,500 की विनिमय दर पर बेचा जा रहा है, जो कि आधिकारिक तौर पर 1500 से 1 की अनुमानित दर से काफ़ी ज़्यादा है। 2019 में शुरू हुए इस मुद्रा संकट ने भारी मुद्रास्फीति और भोजन, दवाओं और ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की कमी पैदा कर दी है। इस स्थिति ने ग़रीबी और निराशा में धकेलते हुए लाखों लेबनानी नागरिकों की आय और बचत को ख़त्म कर दिया है।

लेबनान की अर्थव्यवस्था दशकों से सरकारी उपेक्षा, भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन और सालों से चलते युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता के कारण संघर्ष कर रही है। अर्थव्यवस्था में आयी इस और बड़ी गिरावट ने तक़रीबन एक-एक आर्थिक क्षेत्र और जीवन के हर एक पहलू को प्रभावित किया है। देश में व्यापक बेरोज़गारी, भोजन और अन्य बुनियादी वस्तुओं की ज़बरदस्त कमी, लंबे समय तक और नियमित होने वाली बिजली कटौती, और ख़ास तौर पर स्वास्थ्य और शिक्षा के अहम क्षेत्रों में सार्वजनिक सेवाओं की कमी जैसे आर्थिक मुद्दों का अंबार देखा जा रहा है। हाल के आंकड़ों के मुताबिक़, 80% से ज़्यादा आबादी अब ग़रीबी में गुज़र-बसर कर रही है और राष्ट्रीय सरकारी क़र्ज़ और सकल घरेलू उत्पाद का अनुपात तक़रीबन 98 बिलियन अमरीकी डॉलर के राष्ट्रीय ऋण के साथ 170% से भी ज़्यादा होकर दुनिया में सबसे ज़्यादा हो गया है। इस समय देश में आम मुद्रास्फीति की दर 174% है, हालांकि, खाद्य पदार्थों के लिहाज़ से मुद्रास्फीति की यह दर 557% के साथ दुनिया में सबसे ज़्यादा है।

सरकार ने नियमित रूप से ख़र्च में कटौती और रोटी, गेहूं, दवाओं और ईंधन जैसी ज़रूरी चीज़ों पर सब्सिडी में कटौती कर दी है।इससे आगे आने वाले दिनों में आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति और ख़राब होने की संभावना है। सरकार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और अन्य अनुदान देने वालों से अरबों डॉलर की विदेशी सहायता हासिल करने की उम्मीद में इन कठोर उपायों को जारी रखे हुए है, जिसका इस्तेमाल देश के लिए आर्थिक सुधार और बचाव योजना के लिए किया जाना है। हालांकि, सरकार बजट में कटौती करने पर जो वित्तीय सहायता दे रही है,वह सशर्त है। इस सहायता का एक बड़ा हिस्सा विदेशी क़र्ज़ को चुकाने में जायेगा, जिससे यह साफ़ नहीं हो पायेगा कि इस एवज़ में लेबनानी अर्थव्यवस्था को कितना दुरुस्त किया जायेगा और आम लोगों पर पड़ रहे बोझ को कितना हल्का किया जा सकेगा।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Economic crisis in Lebanon
Foreign debt
IMF
Najib Mikati
protests in Lebanon
Transport workers strike

Related Stories

क्या श्रीलंका जैसे आर्थिक संकट की तरफ़ बढ़ रहा है बांग्लादेश?

श्रीलंका की मौजूदा स्थिति ख़तरे से भरी

श्रीलंकाई संकट : राजनीति, नीतियों और समस्याओं की अराजकता

पड़ताल दुनिया भर कीः पाक में सत्ता पलट, श्रीलंका में भीषण संकट, अमेरिका और IMF का खेल?

यूक्रेन के संकट का आईएमएफ कनेक्शन

साम्राज्यवाद अब भी ज़िंदा है

इस बजट की चुप्पियां और भी डरावनी हैं

लेबनान के मनोनीत पीएम नजीब मिकाती ने सरकार बनाने के लिए संसदीय बहुमत हासिल किया

पाकिस्तान में राजनीतिक अशांति की आर्थिक जड़ों को समझना ज़रूरी है

टीका रंगभेद के बाद अब टीका नवउपनिवेशवाद?


बाकी खबरें

  • indian student in ukraine
    मोहम्मद ताहिर
    यूक्रेन संकट : वतन वापसी की जद्दोजहद करते छात्र की आपबीती
    03 Mar 2022
    “हम 1 मार्च को सुबह 8:00 बजे उजहोड़ सिटी से बॉर्डर के लिए निकले थे। हमें लगभग 17 घंटे बॉर्डर क्रॉस करने में लगे। पैदल भी चलना पड़ा। जब हम मदद के लिए इंडियन एंबेसी में गए तो वहां कोई नहीं था और फोन…
  • MNREGA
    अजय कुमार
    बिहार मनरेगा: 393 करोड़ की वित्तीय अनियमितता, 11 करोड़ 79 लाख की चोरी और वसूली केवल 1593 रुपये
    03 Mar 2022
    बिहार सरकार के सामाजिक अंकेक्षण समिति ने बिहार के तकरीबन 30% ग्राम पंचायतों का अध्ययन कर बताया कि मनरेगा की योजना में 393 करोड रुपए की वित्तीय अनियमितता पाई गई और 11 करोड़ 90 लाख की चोरी हुई जबकि…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 6,561 नए मामले, 142 मरीज़ों की मौत
    03 Mar 2022
    देश में कोरोना से अब तक 5 लाख 14 हज़ार 388 लोगों अपनी जान गँवा चुके है।
  • Civil demonstration in Lucknow
    असद रिज़वी
    लखनऊ में नागरिक प्रदर्शन: रूस युद्ध रोके और नेटो-अमेरिका अपनी दख़लअंदाज़ी बंद करें
    03 Mar 2022
    युद्ध भले ही हज़ारों मील दूर यूक्रेन-रूस में चल रहा हो लेकिन शांति प्रिय लोग हर जगह इसका विरोध कर रहे हैं। लखनऊ के नागरिकों को भी यूक्रेन में फँसे भारतीय छात्रों के साथ युद्ध में मारे जा रहे लोगों के…
  • aaj ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव : पूर्वांचल में 'अपर-कास्ट हिन्दुत्व' की दरार, सिमटी BSP और पिछड़ों की बढ़ी एकता
    03 Mar 2022
    यूपी चुनाव के छठें चरण मे पूर्वांचल की 57 सीटों पर गुरुवार को मतदान होगे. पिछले चुनाव में यहां भाजपा ने प्रचंड बहुमत पाया था. लेकिन इस बार वह ज्यादा आश्वस्त नहीं नज़र आ रही है. भाजपा के साथ कमोबेश…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License