NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
अध्ययन के मुताबिक भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर ‘विभाजन के बाद सबसे बड़ी त्रासदी’, सरकार का आंकड़े से इंकार
रिपोर्ट में कहा गया है, “वास्तविक मौतों का आंकड़ा कई लाखों में होने का अनुमान है, न कि कुछ लाख में, जो इसे यकीनन विभाजन और स्वतंत्रता के बाद से भारत की सबसे भयावह मानवीय त्रासदी बना देता है।” 
दित्सा भट्टाचार्य
23 Jul 2021
अध्ययन के मुताबिक भारत में कोरोनावायरस की दूसरी लहर ‘विभाजन के बाद की सबसे भयावह त्रासदी’, सरकार ने किया आंकड़े से इंकार

नई दिल्ली: “कोरोनावायरस महामारी के दौरान भारत की सभी कारणों से अतिरिक्त मृत्यु दर के तीन नए अनुमान” नामक शीर्षक से हालिया अध्ययन के मुताबिक, कोविड-19 महामारी भारत में चालीस लाख से अधिक की संख्या में अतिरिक्त मौतों का कारण बना है। अतिरिक्त मौतें इस बात का एक पैमाना हैं कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अनुमान से कितने अधिक लोगों की मौत इस बीच हुई है। 

वाशिंगटन-स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट द्वारा प्रकाशित और भारत के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविन्द सुब्रमणियन, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से अभिषेक आनंद और सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट के जस्टिन सैंडफर द्वारा लिखित अध्ययन में कहा गया है कि भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर “विभाजन (1947 में) के बाद से सबसे भयानक त्रासदी” साबित हुई है।

लेखकों ने महामारी की शुरुआत से लेकर जून 2021 के दौरान हुई अधिक मृत्यु दर का अनुमान लगाने के लिए तीन अलग-अलग डेटा स्रोतों का सहारा लिया है। हालांकि, अध्ययन ने सभी अतिरिक्त मौतों के लिए कोविड-19 को जिम्मेदार नहीं ठहराया है।

पहला अनुमान सात राज्यों – आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तरप्रदेश में राज्य-स्तरीय नागरिक पंजीकरण आंकड़ों के बहिर्गणना से लिया गया था। इस अनुमान के मुताबिक अतिरिक्त मौतों की संख्या 34 लाख के आसपास रहने की संभावना बनती है। हालांकि, अध्ययन इन सात राज्यों के आंकड़ों के अनुमान को अखिल भारतीय अनुमान में दिक्कत को स्वीकार करते हुए कहता है कि यह संभव है कि भारत के शेष हिस्सों में होने वाली कोविड मृत्यु दर इन सात राज्यों से भिन्न हो।

लेखकों द्वारा इस्तेमाल किये गए दूसरे अनुमान में कोविड-19 सीरो प्रसार आंकड़े और आयु-विशिष्ट मृत्यु दर के अंतर्राष्ट्रीय अनुमानों के संयोजन पर आधारित था। इसके मुताबिक अतिरिक्त मौतों का आंकड़ा इन दो कोविड लहरों के दौरान लगभग 40 लाख था – जिसके क्रमशः 15 लाख और 24 लाख रहने का अनुमान है।

तीसरा अनुमान, लेखकों के कंज्यूमर पिरामिड हाउसहोल्ड सर्वे के विश्लेषण से लिया गया है, जिसे सभी राज्यों के 8,00,000 से अधिक व्यक्तियों के लंबवत पैनल से लिया गया था, जिसमें 49 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। अध्ययन में कहा गया है “सभी अनुमानों से पता चलता है कि महामारी के कारण होने वाली मौतों की संख्या 4,00,000 की आधिकारिक गणना से कहीं विशाल मात्रा में अधिक रहने की संभावना है। इन अनुमानों से यह भी पता चलता है कि पहली लहर के बारे में जैसा माना जाता है वह उससे कहीं अधिक घातक थी।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि आधिकारिक मृत्यु दर की सांख्यिकी में अंतराल होने के कारण भारतीय मौतों पर आधारित कोई भी संख्या, जैसे कि मृत्यु दर या संक्रमण से मृत्यु दरों के मामले संदिग्ध हैं। रिपोर्ट के मुताबिक “वहीं दूसरी ओर, अन्य देशों के आंकड़े, विशेषकर विकसित देशों के सन्दर्भ में बात करें तो वहां पर संक्रमण दर (सीरो-व्यापकता सर्वेक्षणों के जरिये) और मौतों के सन्दर्भ दोनों ही मामलों में कहीं अधिक विश्वसनीय हैं।”

भारत का आधिकारिक कोविड-19 मौतों का आंकड़ा 4,14,000 के आसपास है, जो दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी संख्या है। लेकिन अध्ययन के मुताबिक इसमें बड़ी संख्या में कम गिनती हुई है। इस रिपोर्ट की महत्ता को स्वीकार करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने एक ट्वीट में कहा: “प्रत्येक देश के लिए, अतिरिक्त मृत्यु दर का पता लगाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यही एकमात्र तरीका है जिसके माध्यम से भविष्य के झटकों एवं और आगे होने वाली मौतों को रोकने के लिए स्वास्थ्य प्रणाली को तैयार किया जा सकता है। यही वजह है कि हमें मजबूत नागरिक पंजीकरण एवं महत्वपूर्ण सांख्यिकी में निवेश करने की आवश्यकता है, जिससे कि वास्तविक आंकड़े के आधार पर नीतियों को तदनुरूप समायोजित किया जा सके।” 

रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि अनुमानों के भीतर और बाहर काफी अनिश्चितता है। चूंकि वे कुलमिलाकर करीब 10 लाख से 60 लाख की रेंज में हैं, जबकि केंद्रीय अनुमान 34 से लेकर 49 लाख के बीच में एक दूसरे से भिन्न हैं, और मौतों की संख्या सरकारी अनुमानों से उल्लेखनीय रूप से अधिक है।

हालांकि, पीटीआई के मुताबिक अध्ययन के बारे में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए गुरूवार को सरकार ने कहा कि रिपोर्टों में कयास लगाया गया है कि सभी अतिरिक्त मृत्यु दर संख्याएं कोविड मौतों के कारण हुई हैं, जो कि तथ्यों पर आधारित नहीं है और पूरी तरह से भ्रामक है। जबकि अध्ययन इसे पहले ही स्पष्ट करता है कि सभी अतिरिक्त मौतों के लिए कोविड-19 को आरोपित नहीं किया गया है। 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है “भारत में मजबूत और कानून-आधारित मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को देखते हुए, जबकि कुछेक मामलों में संक्रामक रोग और इसके प्रबंधन के सिद्धांतों को देखते हुए अनदेखे छूट सकते हैं, किंतु मौतों के बारे में कुछ भी छूट जाने की संभावना नहीं है।” 

बयान में दावा किया गया है कि संपर्कों के अलावा, देश में स्थित 2,700 से अधिक परीक्षण प्रयोगशालाओं की विशाल मौजूदगी को देखते हुए, जिस किसी को भी परीक्षण कराने की जरूरत होती है वह अपना परीक्षण करवा सकता है। इसके साथ ही लक्षणों के बारे में जिस प्रकार से जागरूकता अभियान चलाया गया और चिकत्सकीय देखभाल तक पहुंच को सुगम बनाया गया है, उसने इस बात को सुनिश्चित कर दिया है कि जरूरत पड़ने पर लोग अस्पतालों तक पहुंच सकें।

राज्य सभा में अपने बयान में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कोविड-19 मौतों को छिपाने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार केवल राज्य सरकारों के द्वारा भेजे जाने वाले आंकड़ों को संकलित और प्रकाशित करने का काम करती है।

इस लेख को अंग्रेजी में इस लिंक के जरिय पढ़ा जा सकता है

Study Terms COVID Second Wave India’s ‘Worst Tragedy Since Partition’, Govt Denies Data

India Covid Deaths
Covid Death Data
Worst Tragedy
Health Ministry
COVID second wave

Related Stories

WHO की कोविड-19 मृत्यु दर पर भारत की आपत्तियां, कितनी तार्किक हैं? 

भारत की कोविड-19 मौतें आधिकारिक आंकड़ों से 6-7 गुना अधिक हैं: विश्लेषण

गुजरात: सरकारी आंकड़ों से कहीं ज़्यादा है कोरोना से मरने वालों की संख्या!

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 6,984 नए मामले, ओमिक्रॉन से अब तक 57 लोग संक्रमित

पढ़ाई कर रहे डॉक्टरों की निजी ज़िंदगी: कोविड से किस तरह प्रभावित हुए हैं जूनियर डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य

हरियाणा: कोविड की दूसरी लहर में सैकड़ों आशा कार्यकर्ता हुईं पोज़िटिव;10 की मौत,लेकिन नहीं मिला मुआवज़ा

तमिलनाडु: सीमित संसाधनों के बीच नई सरकार को खोजने होंगे 'रिसाव बिंदु' और राजस्व निर्माण के नए तरीके

कोविड और सरकार: वैज्ञानिकों का दुरुपयोग, विज्ञान के साथ मज़ाक

बीजेपी के समझना चाहिए कि महामारी को हराने के लिए बड़बोलापन नहीं, वैक्सीन काम आती है

कोविड-19: आपराधिक लापरवाही का कोई बहाना नहीं, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को देना चाहिए इस्तीफ़ा


बाकी खबरें

  • bonded labour
    द लीफ़लेट
    भारत में अभी भी क्यों जारी है बंधुआ मज़दूरी?
    15 Sep 2021
    हालांकि हम 21वीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं मगर भारत में बंधुआ मज़दूरी अभी भी एक हक़ीक़त है। मानव गुप्ता और कशिश गुप्ता बंधुआ मज़दूरी से बचने के लिए भारत में क़ानूनों का विश्लेषण कर रहे हैं और इस ख़तरे को…
  • Big auto companies leaving India is a big blow to Modi's Make-in-India
    बी. सिवरामन
    बड़ी ऑटो कम्पनियों का भारत छोड़ना मोदी के मेक-इन-इंडिया के लिए भारी धक्का
    15 Sep 2021
    एक भी बड़े ऑटोमोबाइल प्लांट का बंद होना किसी देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन में दुर्घटना बनकर उसे बुरी तरह हिला सकता है। बड़ी धूम-धाम के साथ मेक-इन-इंडिया की घोषणा के 6 वर्षों के अंदर फोर्ड छठी…
  • norway
    उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: नॉर्वे में लेबर की अगुआई में मध्य-वाम गठजोड़ सत्ता में
    15 Sep 2021
    नॉर्व में चुनावी मुद्दे बाकी देशों जैसे नहीं रहे हैं। नॉर्वे की नाजुक पारिस्थितिकी का असर यह है कि जलवायु परिवर्तन भी वहां बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है, और साथ ही लोगों की आर्थिक सेहत के बीच बढ़ती खाई…
  • 1300 से अधिक फ़िलिस्तीनी क़ैदी इज़रायली जेलों में दुर्व्यवहार के विरोध में भूख हड़ताल करेंगे
    पीपल्स डिस्पैच
    1300 से अधिक फ़िलिस्तीनी क़ैदी इज़रायली जेलों में दुर्व्यवहार के विरोध में भूख हड़ताल करेंगे
    15 Sep 2021
    6 सितंबर को गिल्बोआ जेल से छह कैदियों के भागने के बाद इजरायल की जेलों और हिरासत केंद्रों के अंदर बढ़ी क्रूरता और दमन का विरोध
  • नार्वेः संसदीय चुनावों में वाम दलों ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की
    पीपल्स डिस्पैच
    नार्वेः संसदीय चुनावों में वाम दलों ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की
    15 Sep 2021
    169 सीटों वाली नॉर्वे की संसद के आम चुनावों के नतीजे मंगलवार 14 सितंबर को घोषित कर दिए गए। परिणामों के अनुसार, सोमवार को हुए
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License