NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
कानून
नज़रिया
संस्कृति
समाज
भारत
राजनीति
नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
पीठ ने याचिकाकर्ताओं को भविष्य में 'धर्म संसद' के आयोजन के खिलाफ स्थानीय प्राधिकरण को अभिवेदन देने की अनुमति दी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Jan 2022
नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

नयी दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने हरिद्वार और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हाल में आयोजित हुए कार्यक्रमों में कथित रूप से नफरत फैलाने वाले भाषण देने वाले लोगों के खिलाफ जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली याचिका पर बुधवार को केंद्र, दिल्ली पुलिस और उत्तराखंड पुलिस से जवाब मांगा।

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ याचिका पर सुनवाई करने के लिए राजी हो गई और उसने इस पर नोटिस जारी किये। पीठ ने याचिकाकर्ताओं को भविष्य में 'धर्म संसद' के आयोजन के खिलाफ स्थानीय प्राधिकरण को अभिवेदन देने की अनुमति दी।

न्यायालय ने मामले में आगे की सुनवाई को 10 दिन बाद के लिए सूचीबद्ध किया।

शीर्ष अदालत ने पत्रकार कुर्बान अली और पटना उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश की याचिका पर प्रतिवादिों को नोटिस जारी किये।

याचिका में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ घृणा फैलाने वाले भाषण देने की घटनाओं की एसआईटी (विशेष जांच दल) से ‘‘ स्वतंत्र, विश्वसनीय और निष्पक्ष जांच कराने’’ का निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया गया है।

पीठ ने जब कहा कि वह याचिका पर नोटिस जारी कर रही है और उसने 10 दिन बाद सुनवाई के लिए इसे सूचीबद्ध किया है, तो याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि एकमात्र समस्या यह है कि इस बीच 23 जनवरी को अलीगढ़ में एक ‘धर्म संसद’ का आयोजन होने वाला है और वे नहीं चाहते कि इसका आयोजन किया जाए।

सिब्बल ने पीठ से इस मामले को 17 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने का अनुरोध किया।

पीठ ने कहा, ‘‘हम आपको संबंधित प्राधिकारियों को अभिवेदन देने की अनुमति देते हैं। उन्हें इस पर कार्रवाई करने दीजिए।’’

शीर्ष अदालत ने उन्हें स्थानीय प्राधिकारियों के संज्ञान में इस प्रकार के आयोजन की बात लाने की अनुमति दी, जो याचिकाकर्ताओं के अनुसार दंड विधान के विपरीत हैं।

याचिका में विशेष तौर पर 17 और 19 दिसंबर 2021 को हरिद्वार और दिल्ली में दिए गए कथित रूप से नफरत पैदा करने वाले भाषणों का उल्लेख किया गया है और इस प्रकार के भाषणों से निपटने के लिए शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि एक कार्यक्रम हरिद्वार में यति नरसिंहानंद की तरफ से और दूसरा कार्यक्रम दिल्ली में ‘हिंदू युवा वाहिनी’ की तरफ से आयोजित किया गया था और इन कार्यक्रमों में एक विशेष समुदाय के सदस्यों के नरसंहार का कथित तौर पर आह्वान किया गया था।

मामले की सुनवाई की शुरुआत में सिब्बल ने 'धर्म संसद' में कही गई बातों के एक पृष्ठ के प्रतिलेख का उल्लेख किया और कहा कि वह इस सामग्री को पढ़कर मामले को सनसनीखेज नहीं बनाना चाहते।

पीठ ने कहा कि वह राज्यों को नोटिस जारी करेगा। इस पर सिब्बल ने अनुरोध किया कि केंद्र को भी नोटिस जारी किया जाए, क्योंकि शीर्ष अदालत के पहले के आदेशानुसार उन्हें इस प्रकार की चीजें रोकने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने होंगे।

वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी की ओर से एक हस्तक्षेप अर्जी का उल्लेख किया।

जयसिंह ने कहा कि तुषार गांधी की याचिका पर शीर्ष अदालत ने 2019 में फैसला सुनाया था कि सभी राज्यों को यह सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा कि भीड़ द्वारा किसी की पीट-पीटकर हत्या नहीं की जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरी अर्जी यही है कि न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा। कृपया हस्तक्षेप की अनुमति दीजिए, यही मेरा अनुरोध है।’’

पीठ ने कहा कि फिलहाल वह याचिका के उसके समक्ष सूचीबद्ध प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर रही है।

सिब्बल ने कहा कि ‘धर्म संसद’ आयोजित किए जाने की रोजाना घोषणाएं की जा रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘कृपया आगे की सुनवाई के लिए कोई निकटतम तारीख दी जाए, क्योंकि उन्होंने एक और धर्म संसद की घोषणा कर दी है। आज उत्तर प्रदेश में जो रहा है उसके बीच अगली धर्म संसद का आयोजन अलीगढ़ में 23 जनवरी को होना है।’’

पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या शीर्ष अदालत की कोई और पीठ इस प्रकार के मामले को उठाने वाली याचिका पर पहले से सुनवाई कर रही है। इसके जवाब में सिब्बल ने कहा कि शीर्ष अदालत की किसी अन्य पीठ के समक्ष इस प्रकार का मामला लंबित नहीं है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यह एक ऐसा मामला है जिस पर सुनवाई होनी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या कोई अन्य पीठ पहले से ही इसी तरह की याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस मामले में पेश हुए एक अन्य वकील ने कहा कि नफरत फैलाने वाली सामग्रियों संबंधी कुछ मामले लंबित हैं लेकिन ये 'धर्म संसद' से संबंधित नहीं हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘हम नोटिस जारी कर रहे हैं।’’

उसने कहा, ‘‘इसे 10 दिन बाद के लिए सूचीबद्ध कीजिए। हम देखेंगे कि क्या यह मामला किसी अन्य मामले से जुड़ा है, तो हम इसे सूचीबद्ध करेंगे, अन्यथा हम सुनवाई करेंगे।’’

उत्तराखंड पुलिस ने हरिद्वार की घटना को लेकर पिछले साल 23 दिसंबर को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत संत धर्मदास महाराज, साध्वी अन्नपूर्णा उर्फ पूजा शकुन पांडे, यति नरसिंहानंद और सांगर सिंधु महाराज सहित कुछ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इसी तरह की शिकायत दिल्ली पुलिस से राष्ट्रीय राजधानी में हुए दूसरे कार्यक्रम के संदर्भ में की गई।

याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड और दिल्ली पुलिस ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।

आपको बता दें कि कि बीते महीने 17 से 19 दिसंबर के बीच हरिद्वार में एक धर्म संसद का आयोजन किया गया था, जिसमें शामिल हुए साधु-संतों के विवादित भाषण खूब वायरल हुए, इन वायरल वीडियोज़ में धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने, मुस्लिम प्रधानमंत्री बनने से रोकने, मुस्लिम आबादी न बढ़ने देने समेत धर्म की रक्षा के नाम पर तमाम विवादित बयान दिए गए थे। हद तो वहां हो गई जब एक महिला संत ने कॉपी-किताबें रखकर हाथ में शस्त्र उठाने की अपील की। इस तरह के ख़तरनाक वीडियो वायरल होने के कई बाद तक कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई, हालांकि बाद में उत्तराखंड पुलिस ने यूपी शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिज़वी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी समेत अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज की। इसके बाद भड़काऊ भाषण देने के खिलाफ संत धर्मदास और साध्वी अन्नपूर्णा के खिलाफ भी मुकदमा लिखा गया। इसी तरह रायपुर में एक धर्म संसद हुई थी जहां महात्मा गांधी के खिलाफ अपशब्द कहे गए। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दिल्ली में ‘हिंदू युवा वाहिनी’ के कार्यक्रम का भी मुद्दा उठाया गया है। सभी जगह बड़े पैमाने पर नफ़रती भाषण और आह्वान किए गए।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Supreme Court
dharm sansad
kapil sibbal
haridwar

Related Stories

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

राजीव गांधी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

भड़काऊ बयान देने का मामला : पुणे पुलिस ने कालीचरण को हिरासत में लिया

लखीमपुर खीरी : किसान-आंदोलन की यात्रा का अहम मोड़

वाराणसी: सुप्रीम कोर्ट के सामने आत्मदाह के मामले में दो पुलिसकर्मी सस्पेंड

राजस्थान : फिर एक मॉब लिंचिंग और इंसाफ़ का लंबा इंतज़ार

"रेप एज़ सिडक्शन" : बहलाने-फुसलाने से आगे की बात

यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट का बयान दुर्भाग्यपूर्ण क्यों है?

उत्तराखंड: लॉकडाउन में भी नहीं थमे बलात्कार के मामले, हरिद्वार की बेटी की मौत पर ग़म और गुस्सा


बाकी खबरें

  • municipal elections
    फर्राह साकिब
    बिहारः नगर निकाय चुनावों में अब राजनीतिक पार्टियां भी होंगी शामिल!
    07 Jan 2022
    ये नई व्यवस्था प्रक्रिया के लगभग अंतिम चरण में है। बिहार सरकार इस प्रस्ताव को विधि विभाग से मंज़ूरी मिलने के पश्चात राज्य मंत्रिपरिषद में लाने की तैयारी में है। सरकार की कैबिनेट की स्वीकृति के बाद इस…
  • Tigray
    एम. के. भद्रकुमार
    नवउपनिवेशवाद को हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका की याद सता रही है 
    07 Jan 2022
    हिंद महासागर को स्वेज नहर से जोड़ने वाले रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण लाल सागर पर अपने नियंत्रण को स्थापित करने की अमेरिकी रणनीति की पृष्ठभूमि में चीन के विदेश मंत्री वांग यी की अफ्रीकी यात्रा काफी…
  • Supreme Court
    अजय कुमार
    EWS कोटे की ₹8 लाख की सीमा पर सुप्रीम कोर्ट को किस तरह के तर्कों का सामना करना पड़ा?
    07 Jan 2022
    आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग को आरक्षण देने के लिए ₹8 लाख की सीमा केवल इस साल की परीक्षा के लिए लागू होगी। मार्च 2022 के तीसरे हफ्ते में आर्थिक तौर पर कमजोर सीमा के लिए निर्धारित क्राइटेरिया की वैधता पर…
  • bulli bai aap
    सना सुल्तान
    विचार: शाहीन बाग़ से डरकर रचा गया सुल्लीडील... बुल्लीडील
    07 Jan 2022
    "इन साज़िशों से मुस्लिम औरतें ख़ासतौर से हम जैसी नौजवान लड़कियां ख़ौफ़ज़दा नहीं हुईं हैं, बल्कि हमारी आवाज़ और बुलंद हुई है।"
  • yogi
    विजय विनीत
    अखिलेश बनाम योगीः यूपी की चुनावी लड़ाई में अब पूजा-अनुष्ठान, तंत्र-मंत्र और जाप की एंट्री!
    07 Jan 2022
    यूपी में सत्ता की चाबी हथियाने के लिए सियासी लड़ाई के तौर-तरीकों में पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र, टोना-टोटका के साथ अब जाप का पाखंड भी शामिल हो गया है। अखिलेश यादव के समर्थकों ने हरदोई के एक दुर्गा मंदिर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License