NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
आंदोलन
भारत
राजनीति
तबरेज़ को इंसाफ़ के लिए दिल्ली में झारखंड भवन पर प्रदर्शन, धारा 302 बहाल करने की मांग
प्रदर्शकारियों ने झारखंड भवन के बाहर तबरेज़ की हत्या में शामिल लोगों को पुलिस द्वारा संरक्षण दिए जाने की निंदा करते हुए हत्या की धारा बहाल करने और तबरेज़ के परिजनों को न्याय दिलाने और झारखंड सरकार द्वारा आर्थिक सहायता अविलम्ब उपलब्ध कराने की मांग की।
फ़र्रह शकेब
13 Sep 2019
tabrez ansari death protest

यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के आह्वान पर शुक्रवार दोपहर दिल्ली के झारखंड भवन के बाहर विभिन्न संगठनों द्वारा झारखंड के बहुचर्चित तबरेज़ अंसारी हत्याकांड के आरोपियों की चार्जशीट से हत्या की धारा 302 को हटा कर 304 यानी ग़ैर इरादतन हत्या कर दिए जाने के ख़िलाफ़ एक विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में आइसा, आइएफटीयू, मूवमेंट फ़ॉर एडुकेशन एन्ड इंपावरमेंट ऑफ मासेज़ और भगत सिंह अम्बेडकर स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन जैसे संगठन और बड़ी संख्या में कॉलेज के छात्र-छात्राएं, महिलाएं और आम नागरिकों का समूह शामिल हुआ।
प्रदर्शकारियों ने झारखंड भवन के बाहर तबरेज़ की हत्या में शामिल लोगों को पुलिस द्वारा संरक्षण दिए जाने की निंदा करते हुए तबरेज़ के परिजनों को न्याय दिलाने और झारखंड सरकार द्वारा आर्थिक सहायता अविलम्ब उपलब्ध कराने की मांग की।
IMG-20190913-WA0019_1.jpg

प्रदर्शन में शामिल लोग अपने-अपने हाथों में तख्ती लिए हुए थे जिनपर हत्यारों को सज़ा देने, धर्म के नाम पर मारना बंद करने, तबरेज़ के कातिलों को बचाने की निंदा करने जैसे संदेश लिखे थे और प्रदर्शन के शामिल लोग रघुबर सरकार शर्म करो, क़ातिलों को संरक्षण देना बंद करो जैसे नारे लगा रहे थे। प्रदर्शन को लेकर झारखंड भवन के बाहर दिल्ली पुलिस की तैनाती भी थी और बैरिकेड लगाए गए थे।

यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के कर्ताधर्ता ख़ालिद सैफ़ी ने सम्बोधन में कहा के मोदी सरकार के आने के बाद से ही पूरे देश में लगातार मॉब लिचिंग के मामले बढ़ते जा रहे हैं और ऐसी घटनाओं को अंजाम देकर देश को धर्म और जाति के नाम पर बांटा जा रहा है और दूसरी तरफ़ सरकारी मशीनरी इन घटनाओं के आरोपियों को बचाते और उनका संरक्षण करते दिखाई देती है। घटना के ढाई महीने के बाद,हम यह जानकर स्तब्ध हैं कि इसकी चार्जशीट में झारखंड पुलिस ने हत्या का आरोप हटा दिया है और स्पष्ट रूप से हत्यारों को बचाने का प्रयास कर रही है।

छात्र नेता उमर ख़ालिद ने कहा आख़िर क्या वजह है सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद भी सरकार इस पर कोई कानून नहीं बना रही है और न ही इस सम्बंध में सरकार की तरफ़ से कोई दृढ़ इच्छाशक्ति दिखती है जबकि झारखंड में तो इसकी अविलम्ब ज़रूरत है क्योंकि वहां काफ़ी पहले से डायन प्रथा के नाम आदिवासी महिलाओं की लिंचिंग होती रही है और उसी तरह भीड़ द्वारा न्याय और निर्ममतापूर्वक हत्या का अभ्यास करती हुई वो भीड़ आज गाय से ले कर जबरन धार्मिक नारे लगवाने तक पहुंच गई है। ऐसी घटनाएं बढ़ने से देश में असहिष्णुता का माहौल बन रहा है। हम झारखंड सरकार और केंद्र की सत्ता से ये मांग करते हैं कि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अविलम्ब पालन करते हुए कड़े कानून बनाने की दिशा में पहल करे।

IMG-20190913-WA0023.jpg

भगत सिंह अम्बेडकर स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन की प्रतिनिधि एवं जेएनयू की छात्र नेता अपेक्षा प्रियदर्शिनी कहती हैं के झारखंड में आदिवासी प्रकाश लकड़ा और अलीमुद्दीन की गाय के नाम पर की गई हत्या हो या चोरी के नाम पर की गई तबरेज़ की हत्या, इन सबमें न सिर्फ़ झारखंड पुलिस की लापरवाही उजागर हुई है, बल्कि पुलिस की तरफ़ से दोषियों को बचाने के प्रयास किये जाते रहे हैं। तबरेज़ मामले में चार्जशीट में हत्या की धारा को बदल कर ग़ैर इरादतन हत्या की धारा 304 में तब्दील किया जाना झारखंड पुलिस द्वारा आरोपियों को संरक्षण दिए जाने की क़वायद ही है जिसकी हम अपने संगठन भगत सिंह अम्बेडकर स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन की तरफ़ से घोर निंदा करते हैं और हम लिंचर्स और हमलावरों की पुलिसिया और सत्ता द्वारा की जा रही रक्षा के इस बेशर्म प्रयास को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।

मूवमेंट फ़ॉर एजुकेशन एन्ड इम्पावरमेंट ऑफ़ मासेज़ के प्रतिनिधि फ़रमान अहमद कहते हैं के सरकारी स्तर पर ऐसे विभत्स हत्याओं के आरोपियों को सरकार के मंत्री द्वारा सम्मानित करते हुये माला पहनाने की बात हो या हत्या की धाराओं को हटा कर ग़ैर इरादतन हत्या में बदल दिये जाने की बात हो, ये भारतीय लोकतंत्र के स्वास्थ के लिए क़तई शुभ संकेत नहीं हो सकते हैं जहां पूरे विश्व मे भारत की अवधारणा वसुधैव कुटुम्बकम की है और ये उस छवि को धूमिल और कलंकित करने की कोशिश है।
कार्यक्रम के अंत में रेजिडेंट आयुक्त झारखंड भवन, नई दिल्ली के माध्यम से मुख्यमंत्री , झारखंड को एक ज्ञापन दिया गया जिसमे मांग की गई : 

1) तबरेज़ अंसारी के हत्यारों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मामला दर्ज करें।

2) उन पुलिस अधिकारियों को बुक करें जिन्होंने अपने कर्तव्य की उपेक्षा की जिसके कारण तबरेज़ अंसारी की मृत्यु हुई।

3) सुप्रीम कोर्ट की उस गाइडलाइन को लागू करें, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बनाम तहसीन पूनावाला के मामले में भीड़ को रोकने के लिए जारी किया था। आपके राज्य में लिंचिंग के मामलों की दर पूरी तरह से चिंताजनक है और 2018 में जारी की गई सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन की घोर अनदेखी की गई है।

इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से एक बार फिर से इस विशेष मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई और तबरेज़ अंसारी को मरणोपरांत न्याय सुनिश्चित करने, और इन जैसी क्रूर घटनाओं को भविष्य में होने से रोके जाने के लिए अविलम्ब सख़्त कोशिश की जाए।

Justice For Tabrez
TABREZ ANSARI
Protest at Jharkhand Bhavan
United Against Hate
mob lynching
Supreme Court

Related Stories

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

राजीव गांधी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?

पलवल : मुस्लिम लड़के की पीट-पीट कर हत्या, परिवार ने लगाया हेट क्राइम का आरोप

लखीमपुर खीरी : किसान-आंदोलन की यात्रा का अहम मोड़

शामली: मॉब लिंचिंग का शिकार बना 17 साल का समीर!, 8 युवकों पर मुकदमा, एक गिरफ़्तार

वाराणसी: सुप्रीम कोर्ट के सामने आत्मदाह के मामले में दो पुलिसकर्मी सस्पेंड

बिहार: समस्तीपुर माॅब लिंचिंग पीड़ितों ने बिहार के गृह सचिव से न्याय की लगाई गुहार


बाकी खबरें

  • workers
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: धीमी मौत मर रहा है भगवान कृष्ण को संवारने-सजाने वाला मथुरा-वृंदावन का उद्योग
    07 Feb 2022
    हिंदुत्व की उच्च डेसिबल की राजनीति हिंदू और मुस्लिम समुदायों से आने वाले कारीगरों, व्यापारियों और निर्माताओं की आजीविका को बचाने में विफल रही है।
  • yogi and amit shah
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा को चुनावों में भगवान और मुसलमान का ही सहारा
    07 Feb 2022
    ख़बरों की इस भाग दौड़ में ख़बरों का मर्म छूट जाता है। इस हफ़्ते की कुछ ख़ास ख़बरें लेकर आए हैं अनिल जैन, जिसमें राम जी की जाति से लेकर केजरीवाल का मोदी मॉडल तक शामिल है। 
  • Lata Mangeshkar
    नम्रता जोशी
    लता मंगेशकर की उपलब्धियों का भला कभी कोई विदाई गीत बन सकता है?
    07 Feb 2022
    संगीत और फ़िल्म निर्माण में स्वर्ण युग के सबसे बड़े नुमाइंदों में से एक लता मंगेशकर का निधन असल में वक़्त के उस बेरहम और अटूट सिलसिले का एक दुखद संकेत है, जो अपने जीवन काल में ही किंवदंती बन चुके…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में एक महीने बाद कोरोना के एक लाख से कम नए मामले सामने आए  
    07 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 83,876 नए मामले सामने आए हैं। देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 2.62 फ़ीसदी यानी 11 लाख 8 हज़ार 938 हो गयी है।
  • MGNREGA
    डॉ. राजू पाण्डेय
    बजट 2022: गांव और किसान के प्रति सरकार की खटकने वाली अनदेखी
    07 Feb 2022
    कोविड-19 के इस भयानक दौर में यह आशा की जा रही थी कि सरकार न केवल मनरेगा को ज्यादा मजबूती देगी, बल्कि शहरी इलाकों के लिए भी कोई ऐसी ही योजना लाई जाएगी। विगत वित्तीय वर्ष के संशोधित आकलन की तुलना में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License