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तेलंगाना की जेलों में क़ैदी बने ‘आरजे’
क़ैदियों के सुधार और पुनर्वास के लिए चलाई गई एक योजना के तहत, जेल विभाग ने यह कार्यक्रम शुरू किया है जिसमें चुनिंदा क़ैदियों को एफ़एम रेडियो स्टेशन ‘अंतर्वाणी’ चलाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
भाषा
12 Jun 2019
radio jocky
फोटो साभार :- द न्यूज़मिनट .कॉम

क़ैदियों को उनकी रचनात्मकता का पता लगाने में सक्षम बनाने और उन्हें मनोरंजन प्रदान करने के लिए तेलंगाना कारागार विभाग ने राज्य भर की जेलों में एफ़एम रेडियो सुविधा शुरू की है, जहाँ क़ैदी रेडियो जॉकी की भूमिका निभाते हैं।

क़ैदियों के सुधार और पुनर्वास के लिए चलाई गई एक योजना के तहत, जेल विभाग ने यह कार्यक्रम शुरू किया है जिसमें चुनिंदा क़ैदियों को एफ़एम रेडियो स्टेशन ‘अंतर्वाणी’ चलाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

क़ैदी भी कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं, जो उन्हें अच्छे हास्य में शामिल होने और अवसाद दूर करने में मदद करता है।

क़ैदी एफ़एम रेडियो स्टेशनों का संचालन करते हैं, जेल के टाइम टेबल की घोषणाएँ करते हैं, साथी क़ैदियों के लिए देशभक्ति, भक्ति और लोक गीत और संगीत बजाते हैं।

महानिदेशक (जेल एवं सुधार सेवाएँ) वी के सिंह ने पीटीआई को बताया, ‘‘हमारा मुख्य उद्देश्य उनका सुधार और पुनर्वास है। जब वे मुख्यधारा में वापस जाएँ, तो वे सज्जन बन कर जाएँ। इसलिए हमने कई पहल की हैं और यह (जेलों में रेडियो स्टेशन) उसी दिशा में की गई एक और पहल है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मनोरंजन इस पहल का एक हिस्सा है ताकि वे उदास न हों और आत्महत्या करने के बारे में न सोचें। हम उन्हें अच्छे हँसमुख माहौल में रखना चाहते हैं।’’

यह पहल पहली बार मार्च में हैदराबाद के केंद्रीय कारागर और बाद में वारंगल केंद्रीय कारागार में शुरू हुई थी।

जेल अधिकारियों ने बताया कि संगारेड्डी जिला कारागार राज्य की पहली जिला जेल बन गई जहाँ सोमवार को एफ़एम सेवा शुरू की गई।

 

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CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License