NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र : नववर्ष की भविष्य-वाणियां!
मेरा प्रस्ताव है, केंद्रीय सरकार को भविष्य-वाणियों पर खोज के लिए एक केंद्रीय विश्वविद्यालय खोल देना चाहिए। यही सरकार ऐसा कर सकती है। और यह नया विश्वविद्यालय जेएनयू की जगह भी ले सकता है। उसमें नोस्त्रेदामस को लेकर एक अलग पीठ हो सकती है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
06 Jan 2019
new year 2019
Image Courtesy : google

वर्ष की शुरुआत हुई है। सन् 2019 अभी हाल में ही शुरू हुआ है। और साल के शुरू में सभी जाने अनजाने भविष्य-वक्ता भविष्य-वाणी करने में जुट जाते हैं। चाहे सही निकले या नहीं, सभी भविष्य वक्ता देश की, दुनिया की, और सभी राशियों का भविष्य बताने लग जाते हैं। जब भविष्य-वाणियों और भविष्य वक्ताओं की बात होती है तो फ्रांस के एक बहु प्रसिद्ध भविष्य द्रष्टा का नाम सामने आता है। बड़ा भला सा नाम है उनका नोस्त्रेदामस। उनकी भविष्य-वाणियों के बारे में यह खासियत है कि जब घटना हो जाती है, तब लोगबाग बताते हैं कि नोस्त्रेदामस ने तो यह पहले ही भविष्य-वाणी कर दी थी। लगभग दो साल पहले हमारे केंद्रीय मंत्री श्री रिजाजु जी ने यह बताया था कि नोस्त्रेदामस ने तो मोदी के भारत के प्रधानमंत्री बनने की भविष्य-वाणी सोलहवीं शताब्दी में ही कर दी थी। अब क्योंकि मंत्री जी ने कहा था, और मंत्री देश के योग्यतम लोगों में से चुन कर बनाए जाते हैं, इसलिए उनका विश्वास करना ही पड़ा।   

Teerchi-nazar.jpg

कहा जाता है कि नोस्त्रेदामस की भविष्य-वाणी के बारे में पता तब चलता है जब घटना हो जाती है। घटना होने के बाद कोई विद्वान बताता है कि नोस्त्रेदामस ने तो पहले ही भविष्य-वाणी कर दी थी कि यह घटना या दुर्घटना होगी। कई बार तो दो-दो साल बाद पता चलता है, जैसे इस (मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने की) घटना/दुर्घटना की भविष्य-वाणी के बारे में पता चला है। मुझे लगता है कि हमारे उपनिषदों और  नोस्त्रेदामस की भविष्य-वाणियों के बारे में कम से कम एक बात तो कॉमन है। जैसे जब कोई अविष्कार हो जाता है तो पता चलता है कि उसका वर्णन तो हमारे उपनिषदों में हज़ारों साल पहले ही हो चुका है उसी तरह नोस्त्रेदामस की भविष्य-वाणी होती है। जब घटना हो जाती है तो पता चलता है कि इसकी भविष्य-वाणी तो नोस्त्रेदामस ने सैकड़ों साल पहले ही कर दी थी।

जहाँ तक बात भविष्य-वक्ताओं और भविष्य-वाणियों के बारे में है, हरेक भविष्य-वक्ता आम तौर पर एक बात को लेकर दो या तीन भविष्य-वाणी करता है। जैसे कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा, तो थोड़ा सा हवा का रुख देखा और अलग-अलग जगहों पर दो-तीन अलग लोगों के नाम ले लिए। अब जो बन गया, उसके बारे में बता दिया कि देखो हमने तो फलाने अख़बार या फलाने चैनल पर पहले से ही कह दिया था की फलाना आदमी प्रधानमंत्री बनेगा। मुझे नहीं ध्यान आता कि देवगौड़ा या गुजराल के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी किसी भी भविष्य-वक्ता ने कभी भी की थी। 

हमारे देश के बारे में कुछ भविष्यवाणी तो मेरे जैसा अच्छा भविष्य-वक्ता भी कर सकता है। पता नहीं नोस्त्रेदामस ने की हैं या नहीं। जैसे वर्षा ऋतु में बिहार, बंगाल, असम एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ आएगी। जैसे कि ग्रीष्म काल में लू की चपेट में आ कर सैकड़ों लोग अपनी जान गवाएंगे। जैसे कि सूखे से गावों में किसान आत्महत्या करते रहेंगे। जैसे कि शरद ऋतु में बहुत सारे बेसहारा लोग शीत लहर की चपेट में आकर मारे जायेंगे। आदि, आदि। चाहे कोई भी प्रधान, कोई भी मंत्री हो मेरी भविष्य-वाणी अगले कई वर्षों तक गलत सिद्ध नहीं होने वाली। 

वैसे नोस्त्रेदामस की भविष्य-वाणियों की सफलताओं से प्रभावित हो मेरा प्रस्ताव है, केंद्रीय सरकार को भविष्य-वाणियों पर खोज के लिए एक केंद्रीय विश्वविद्यालय खोल देना चाहिए। यही सरकार ऐसा कर सकती है। और यह नया विश्वविद्यालय जेएनयू की जगह भी ले सकता है। उसमें नोस्त्रेदामस को लेकर एक अलग पीठ हो सकती है। मान लो वह विश्वविद्यालय भविष्य-वाणी कर दे कि कोलकाता में एक पुल टूटने वाला है, तो उस पुल को बनाना शुरू ही न किया जाये जिससे करोड़ों का खर्च बच सके और तीस लोगों की जान भी। और अगर वह विश्वविद्यालय भविष्य-वाणी कर दे कि अगले चुनाव में मोदी जी की बजाय कोई और प्रधानमंत्री बनेगा तो चुनाव न कर उसे ही प्रधानमंत्री बना दिया जाये। चुनाव में होने वाला हज़ारों करोड़ का खर्च तो बचेगा ही आपस की गाली-गलौज़ भी नहीं होगी।  

Satire
Political satire
tirchi nazar
तिरछी नज़र
new year
Prediction

Related Stories

तिरछी नज़र : प्रधानमंत्री का एक और एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

"खाऊंगा, और खूब खाऊंगा" और डकार भी नहीं लूंगा !

गाइड बुक : “भारत माता की जय”

कर्ता ने कर्म को...

तिरछी नज़र : कराची हलवा और जिह्वा का राष्ट्रवाद


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 861 नए मामले, 6 मरीज़ों की मौत
    11 Apr 2022
    देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 11 हज़ार 58 हो गयी है।
  • nehru
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या हर प्रधानमंत्री एक संग्रहालय का हक़दार होता है?
    10 Apr 2022
    14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेहरू स्मृति संग्रहालय और पुस्तकालय की जगह बने प्रधानमंत्री संग्रहालय का उद्घाटन करेंगेI यह कोई चौकाने वाली घटना नहीं क्योंकि मौजूदा सत्ता पक्ष का जवाहरलाल…
  • NEP
    नई शिक्षा नीति का ख़ामियाज़ा पीढ़ियाँ भुगतेंगी - अंबर हबीब
    10 Apr 2022
    यूजीसी का चार साल का स्नातक कार्यक्रम का ड्राफ़्ट विवादों में है. विश्वविद्यालयों के अध्यापक आरोप लगा रहे है कि ड्राफ़्ट में कोई निरंतरता नहीं है और नीति की ज़्यादातर सामग्री विदेशी विश्वविद्यालयों…
  • imran khan
    भाषा
    पाकिस्तान में नए प्रधानमंत्री का चयन सोमवार को होगा
    10 Apr 2022
    पीएमएल-एन के शहबाज शरीफ, पीटीआई के कुरैशी ने प्रधानमंत्री पद के लिए नामांकन पत्र जमा किया। नए प्रधानमंत्री का चुनाव करने के लिए सोमवार दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होगी।
  • Yogi
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति
    10 Apr 2022
    हर हफ़्ते की प्रमुख ख़बरों को लेकर फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License