NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
COVID-19: जबरदस्ती दिलवाया जा रहा है इस्तीफा, तमिलनाडु में IT कर्मचारियों के कांट्रेक्ट रद्द किए गए
बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) और मध्य स्तरीय कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या कम करने और उन्हें दिए जाने वाली सुविधाओं में कटौती की है, ताकि अपने फायदे को बनाए रखा जा सके।
नीलाबंरन ए
29 Apr 2020
tamilnadu

इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) और 'IT एनेबल्ड सर्विस (ITES)' के कर्मचारियों को कोरोना वायरस का असर महसूस होने लगा है। बड़ी और मध्य स्तर की कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को उनके कांट्रेक्ट के रद्द होने की सूचना वाले ई-मेल और फोन आना शुरू हो गए हैं। कई दूसरी कंपनियों ने वेतन में कटौती के साथ-साथ छुट्टियों की नीति में भी बदलाव किए हैं, ताकि खर्च को घटाया जा सके।

बहुराष्ट्रीय (MNCs) और मध्य स्तरीय कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या कम करने और उन्हें दिए जाने वाली सुविधाओं में कटौती की है, ताकि अपने फायदे को बनाए रखा जा सके। पिछली तिमाही में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अच्छा प्रदर्शन किया था। इन कंपनियों का उद्देश्य अपने कर्मचारियों के अधिकारों की कीमत पर शेयरहोल्डर्स को खुश करना है।

चेन्नई के रहने वाले राजेश (बदला हुआ नाम) बताते हैं कि 22 अप्रैल को अपनी कंपनी मेक्टस सिस्टम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (MSIPL) के HR एक्ज़ीक्यूटिव ने फोन पर उनका कांट्रेक्ट रद्द किए जाने के बारे में बताया। वह पिछले दो साल से इस कंपनी में वेलियो इंडिया लिमिटेड के एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे।

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए राजेश ने बताया, ''मुझसे कहा गया कि आपका नोटिस पीरियड पहले ही दस अप्रैल से शुरू हो चुका है और ऑफिस में मेरा आखिरी दिन 9 मई होगा। इस प्रोजेक्ट में हम तीस लोग काम कर रहे हैं। यह निकासी हमारे लिए बहुत बड़ा झटका लेकर आई है।''

संयोग से राजेश और उनके कुछ दोस्त, ऐसे पहले कर्मचारी हैं, जो कांट्रेक्ट पर चेन्नई में MSIPL के ज़रिए वेलियो के लिए काम कर रहे थे। राजेश को अपने ऑफिस से भी निकासी का ई-मेल मिल चुका है।

IT और ITES एमप्लॉईज़ (UNITE) के जनरल सेक्रेटरी अलागुनाम्बी वेल्किन ने कहा, ''यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कंपनियां कर्मचारियों के कांट्रेक्ट अचानक खत्म कर रही हैं। जबकि महामारी के चलते प्रोजेक्टों में तात्कालिक रुकावट ही आई है। जैसे ही लॉकडॉउन खत्म होगा, उन्हें दोबारा शुरू कर दिया जाएगा।''

वेलियो के मामले में दिलचस्प यह है कि कंपनी भविष्य की तकनीकों पर काम करती है और इस क्षेत्र की अगुवा कंपनी है।  वेल्किन के मुताबिक़, ''ऐसी तकनीकों पर महामारी के खत्म होने के बाद तुरंत काम शुरू हो जाएगा।  वेलियो के लिए दुनियाभर में काम करने वाले एक लाख में से कुछ कर्मचारियों पर कांट्रेक्ट रद्द होने से बहुत प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि कोरोना महामारी का डर और प्रोजेक्ट की तात्कालिक प्रवृत्ति के चलते यह निकासी निहायत गैरज़रूरी है।''

एक दूसरे संगठन 'eNoah iSolution' ने भी अपने कर्मचारियों को निकाला है। कंपनी के चेन्नई और कोयंबटूर में ऑफिस हैं। प्रभावित कर्मचारियों ने निकासी के बाद UNITE से मदद मांगी है। इस अचानक आई निकासी का कर्मचारियों के मानसिक और वित्तीय हालत पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। इस तरह के कदमों से देश में पहले ही ख़तरनाक स्थिति पर मौजूद बेरोज़गारी की दर बड़े पैमाने पर बढ़ेगी।

संगठन कोरोना महामारी की आड़ में कांट्रेक्ट रद्द कर कर्मचारियों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर रहे हैं। जबकि इन कंपनियों में ज़्यादातर की बैलेंस सीट मजबूत है। एक महामारी के दौर में नौकरी से निकाले जाने जैसा अमानवीय कदम सिर्फ़ अपने फायदा बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।

कुछ कंपनियां लंबे समय के लिए घर से काम करने के विकल्प को अपनाने के रास्ते पर बढ़ रही हैं। वेल्किन के मुताबिक़, ''कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा मानकों के पालन की संभावनाओं को तलाश रही हैं। ऐसा करने के लिए एक डेटा प्रोटेक्शन एक्ट की जरूरत है, जबकि हमारे देश में यह कानून अब तक नहीं आ पाया है।''

कानून से नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों और उनकी गतिविधियों पर पूरी नज़र रखने की छूट मिल जाएगी। IT सेक्टर में कर्मचारियों के जो थोड़े बहुत अधिकार बचे हुए हैं, वो भी छिन जाएंगे, जबकि अब भी इनमें से ज़्यादातर असंगठित हैं।

इन कंपनियों द्वारा उठाए गए कदम श्रम मंत्रालय द्वारा 20 मार्च को दिए गए निर्देशों (D।O। No। M-11011/08/2020) के विरुद्ध भी जाते हैं।

UNITE ने यह मामला केंद्रीय और राज्य श्रम मंत्रियों और श्रम आयुक्त के सामने उठाया है। श्रम मंत्रालय के निर्देश साफ तौर पर कंपनियों को कर्मचारियों से जबरदस्ती इस्तीफा देने का के लिए मजबूर करने की मनाही करते हैं। इनमें कांट्रेक्ट औऱ अनौपचारिक कर्मचारियों का खासतौर पर जिक्र है।

लेकिन इन निर्देशों का कंपनियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। जबकि वो अपने शेयरहोल्डर्स की फायदे की आशाएं पूरी करने पर काम कर रही हैं। यह कंपनियां अआपने कर्मचारियों की आजीविका बचाने की कोई कोशिश करती नज़र नहीं आ रही हैं।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख पढ़ने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें।

COVID-19: Forced Resignations, Termination of Contracts in IT Industry in TN

 

Chennai
COVID-19
Labour
work form home
work in corona
Retrenchment
Retrenchment of employees

Related Stories

चिली की नई संविधान सभा में मज़दूरों और मज़दूरों के हक़ों को प्राथमिकता..

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

यूपी चुनाव: बग़ैर किसी सरकारी मदद के अपने वजूद के लिए लड़तीं कोविड विधवाएं

यूपी चुनावों को लेकर चूड़ी बनाने वालों में क्यों नहीं है उत्साह!

यूपीः योगी सरकार में मनरेगा मज़दूर रहे बेहाल

लखनऊ: साढ़ामऊ अस्पताल को बना दिया कोविड अस्पताल, इलाज के लिए भटकते सामान्य मरीज़

किसान आंदोलन@378 : कब, क्या और कैसे… पूरे 13 महीने का ब्योरा


बाकी खबरें

  • yogi
    एम.ओबैद
    सीएम योगी अपने कार्यकाल में हुई हिंसा की घटनाओं को भूल गए!
    05 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गोरखपुर में एक बार फिर कहा कि पिछली सरकारों ने राज्य में दंगा और पलायन कराया है। लेकिन वे अपने कार्यकाल में हुए हिंसा को भूल जाते हैं।
  • Goa election
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोवा चुनाव: राज्य में क्या है खनन का मुद्दा और ये क्यों महत्वपूर्ण है?
    05 Feb 2022
    गोवा में खनन एक प्रमुख मुद्दा है। सभी पार्टियां कह रही हैं कि अगर वो सत्ता में आती हैं तो माइनिंग शुरु कराएंगे। लेकिन कैसे कराएंगे, इसका ब्लू प्रिंट किसी के पास नहीं है। क्योंकि, खनन सुप्रीम कोर्ट के…
  • ajay mishra teni
    भाषा
    लखीमपुर घटना में मारे गए किसान के बेटे ने टेनी के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव लड़ने का इरादा जताया
    05 Feb 2022
    जगदीप सिंह ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने उन्हें लखीमपुर खीरी की धौरहरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि वे 2024 के लोकसभा…
  • up elections
    भाषा
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पहला चरण: 15 निरक्षर, 125 उम्मीदवार आठवीं तक पढ़े
    05 Feb 2022
    239 उम्मीदवारों (39 प्रतिशत) ने अपनी शैक्षणिक योग्यता कक्षा पांच और 12वीं के बीच घोषित की है, जबकि 304 उम्मीदवारों (49 प्रतिशत) ने स्नातक या उससे ऊपर की शैक्षणिक योग्यता घोषित की है।
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    "चुनाव से पहले की अंदरूनी लड़ाई से कांग्रेस को नुकसान" - राजनीतिक विशेषज्ञ जगरूप सिंह
    05 Feb 2022
    पंजाब में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के दावेदार की घोषणा करना राहुल गाँधी का गलत राजनीतिक निर्णय था। न्यूज़क्लिक के साथ एक खास बातचीत में राजनीतिक विशेषज्ञ जगरूप सिंह ने कहा कि अब तक जो मुकाबला…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License