NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
तथ्य की जांच : स्पिन-मास्टर जेटली का नोटबंदी पर दावा कितना खोखला?
नोटबंदी की दूसरी सालगिरह पर भी वित्त मंत्री द्वारा देश को धोखा देने की कवायद जारी है।
सुबोध वर्मा
09 Nov 2018
DEMONETISATION

अपने प्रधानमंत्री के बयान को, भारतीय रिज़र्व बैंक की अधिसूचनाओं और सभी प्रकार के सबूतों के को नकारते हुए, वित्त मंत्री जेटली ने आश्चर्यजनक दावा किया है कि 8 नवंबर, 2016 की नोटबंदी का असली मकसद नकदी को जब्त करना नहीं था, बल्कि अर्थव्यवस्था का 'औपचारिकरण/व्यवस्थित' करना था।

भारतीय रिजर्व बैंक की अधिसूचना जिसे 8 नवंबर, 2016 को जारी किया गया था, में कहा गया था कि देश में भारतीय बैंक नोटों में व्याप्त ज़ाली नकदी और काले धन को प्रभावी ढंग से खत्म करने और ज़ाली नोटों से आतंकवाद के वित्त पोषण को रोकने के लिए यह उपाय "जरूरी था।" संयोग से, सरकार की अधिसूचना (#2652) वित्त मंत्रालय की वेबसाइट पर तारीख के साथ अब उपलब्ध नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश में वह प्रसिद्ध भाषण अभी भी उपलब्ध है (पूरा वीडियो देखें) जिसमें वह इस बात पर जोर देते हैं कि यह काले धन का पता लगाएगा, भ्रष्टाचार को रोक देगा और बढ़ते आतंकवाद के कदम को रोकेगा।

फिर भी जेटली साहब एक नई कहानी का जाल बुन रहे हैं।

वित्त मंत्री का कहना है कि नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था के औपचारिकरण को जन्म दिया है। उदाहरण के तौर पर, उनका कहना है कि एन.डी.ए. के पिछले चार साल के शासन में मई 2014 में टैक्स भरने वाले की संख्या "3.8 करोड़ से बढ़कर 6.88 करोड़ हो गयी है।" यह झूठ ही नहीं बल्कि धोखा देने का मूर्खतापूर्ण प्रयास है। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा दिए गए आंकड़ों से निकाले गए ग्राफ के अनुसार, वैसे भी हर मामले में करदाताओं की संख्या में वृद्धि हो रही है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार के सत्ता में आने से पहले यह उसी दर से बढ़ रही थी। नोटबंदी ने इन संख्याओं को बढ़ाने में कोई योगदान नहीं किया है। संयोग से, जेटली द्वारा उद्धृत संख्याएं बढ़ा चढ़ा कर पेश की गयी हैं क्योंकि उनमें सभी लोग शामिल हैं जो टैक्स भरते हैं। इस संख्या में दो करोड़ से ज्यादा ऐसे लोग शामिल थे जिनके पास कोई कर योग्य आय ही नहीं थी, हालांकि उन्होंने रिटर्न दाखिल किया था। यह एक ऐसी घटना है जो हर साल होती है।

DEMONETISATION GRAPH1.jpg

अब नोटबंदी के बारे में अक्सर उस दावे को देखें जिसे अक्सर किया जाता है: इसने अर्थव्यवस्था को और अधिक डिजिटल लेनदेन की ओर धकेल दिया है। जैसा कि नीचे दिए गए ग्राफ में दिखाया गया है, आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 28 अक्टूबर, 2016 में 17.5 अरब रुपये की मुद्रा चलन में थी, जो विनाशकारी नोटबंदी से एक हफ्ते पहले की स्थिति थी। इसे नोटबंदी के तहत तबाह कर दिया गया था और धीरे-धीरे लेकिन लगातार वह 12 अक्टूबर 2018 तक यह वापस 19.39 अरब पर आ गई थी। नकदी लेन-देन की मुख्य वस्तु अभी बनी हुई थी, हालांकि, मोदी की घोषणा के तुरंत बाद के सप्ताह में यह बर्बाद हो गयी थी। इससे लाभ उठाने वाली एकमात्र डिजिटल भुगतान कंपनियां थी, जो इस बोनान्ज़ा के लिए मोदी का आभार मानती हैं, भले ही यह कुछ महीनों तक ही चली।

DEMONETISATION GRAPH2.jpg

तो, काले धन के बारे में क्या? जेटली आसानी से मोदी और सभी बीजेपी नेताओं के उन दावों को भूल गए जिनमें उन्होंने कहा था कि नोटबंदी से हजारों करोड़ के काले धन का पता लगाया जाएगा। वे ऐसा इसलिए भूल गए क्योंकि, पिछ्ले दो साल की गिनती के बाद लौटाए गए 1,000 और 500 रुपये के नोट जिसमें आरबीआई को अंततः यह स्वीकार करना पड़ा कि इनमें से 99 प्रतिशत नोट बैंक में वापस आ गए हैं। ब्लैक मनी का पता लगाने तो बहुत दूर की बात है, बल्कि इस प्रक्रिया के तहत विभिन्न माध्यमों के जरिये कई हज़ार करोड़ रुपये का काला धन सफेद हो गया।

इस प्रक्रिया में जाली मुद्रा की केवल एक मामूली राशि का पता लगाया गया था। वास्तव में, नए 2,000 रुपये के नोट जारी किए जाने के कुछ ही हफ्तों बाद, जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के पास जाली नोट पाए गए।

जेटली अनिच्छुक है-या शायद असमर्थ है-यह मानने के लिए कि नोटबंदी का कदम भारत की सबसे बड़े आर्थिक आपदाओं में से एक था। इस कदम से पूरी दुनिया में मोदी सरकार एक मज़ाक का स्रोत बन गयी, जिस कदम से अधिकांश भारतीयों पर अनजान आर्थिक विनाश और परेशानी थोप दी गयी थी, और इसने देश को गहरे संकट की तरफ धकेल दिया।

एक मूर्खतापूर्ण कार्रवाई, जिसकी वजह से सरकार दो साल तक झूठ बोलती रही। यह इस तरह की सरकार है जिसके प्रमुख स्पिन-मास्टर अरुण जेटली हैं।

demonetisation
demonitisation a failure
Narendra modi
Arun Jatley
notebandi

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License