NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
तेलुगु राज्यों में श्रमिकों और किसानों का संयुक्त विरोध प्रदर्शनों से पहले व्यापक अभियान
बीड़ी श्रमिकों से लेकर पीएसयू कर्मचारी, कृषि मज़दूर और औद्योगिक श्रमिक मिलकर 26-27 नवंबर को मोदी सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करेंगे।
पृथ्वीराज रूपावत
23 Nov 2020
तेलुगु राज्यों में श्रमिकों और किसानों का संयुक्त विरोध प्रदर्शनों से पहले व्यापक अभियान

हैदराबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि क़ानूनों को समाप्त करने और नए श्रम क़ानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए तेलुगु राज्यों के मज़दूर और किसान यूनियन आगामी विरोध प्रदर्शनों के मद्देनज़र अपने आरंभिक अभियान को तेज़ कर रहे हैं।

ये यूनियनें 26 नवंबर को आम हड़ताल और 26-27 नवंबर को किसान विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगी।

इन यूनियनों का कहना है कि दो दिन का विरोध ऐतिहासिक होने जा रहा है। बीड़ी मजदूर, हमाली, परिवहन कर्मचारी, औद्योगिक श्रमिक, सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी, हेल्थ वर्कर्स, स्कीम वर्कर्स, सिनेमा वर्कर्स, निर्माण श्रमिक, आशा, खेतिहर मजदूर, सीमांत, छोटे और मध्यम किसान और उत्पीड़न वर्गों के अन्य मजदूर वर्ग के लोग आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों राज्यों में विभिन्न जन संगठनों द्वारा हड़ताल के लिए चल रहे ज़िला और मंडल स्तर के अभियानों के दौरान विरोध में शामिल होने का उत्साह दिखा रहे हैं।

शुक्रवार को 10 ट्रेड यूनियनों ने तेलंगाना राज्य चुनाव आयोग को विरोध पत्र दिया है जिसमें उन्होंने अधिकारियों से अपील की है कि वे उनके विरोध को बाधित न करें क्योंकि ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) चुनाव कोड लागू है। यूनियनों ने कहा, "मजदूरों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए श्रमिक और किसान यूनियन दो महीने से अधिक समय से इस हड़ताल का प्रचार कर रहे हैं”। यूनियन ने आगे कहा कि चुनाव आयोग ने अतीत में चुनावों के दौरान ऐसे आंदोलनों की अनुमति दी है।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने किसान संगठनों के साथ कई बैठकों और देश भर में कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ कई विरोध प्रदर्शनों के बाद किसानों के विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। इसके अलावा, तेलंगाना रायथू संगम राज्य के जिलों में गांव-स्तर पर एक अभियान चला रहा है और किसानों को इन कृषि क़ानूनों के विरोध में एकजुट होने के लिए कह रहा है। उनके अनुसार, फार्मरस् प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रोमोशन एंड सिंप्लीफिकेशन) एक्ट 2020, द फार्मर्स (इम्पावर्मेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑन प्राइस अस्यूरेंस एंड एग्रीकल्चरल सेक्टर एक्ट 2020 और द एसेंशियल कमोडिटीज(एमेंडमेंट) एक्ट 2020 कृषि क्षेत्र में कॉर्पोरेट हित को प्रोत्साहित करेगा जबकि किसान और उपभोक्ता बुरी तरह प्रभावित होंगे।

अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध तेलंगाना रायथु समिति के सागर ने कहा, "कई किसान नेता 26-27 नवंबर को दिल्ली की रैली में शामिल होंगे जबकि इन राज्यों में ग्राम स्तरीय बंद का आयोजन होगा।"

अन्य ट्रेड यूनियनों के साथ सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) मोदी सरकार की "मज़दूर विरोधी" नीतियों और श्रमिक क़ानून के ख़िलाफ़ हड़ताल में शामिल होने की अपील करते हुए औद्योगिक क्षेत्रों में रैलियां कर रहा है।

तेलंगाना बीड़ी और सिगार वर्कर्स यूनियन असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों को अपने अधिकारों की मांग करने के लिए आम हड़ताल में शामिल होने का आह्वान करते हुए कई जिलों में रैलियां कर रही हैं।

परिवहन क्षेत्र में हमाली वर्कर्स (लोडिंग और अनलोडिंग वर्कर) राज्य स्तरीय कल्याण बोर्ड की मांग करते हुए हड़ताल में शामिल होने की तैयारी में जुटे हैं।

ऑल इंडिया कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ रोड ट्रांस्पोर्ट वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन (एआईसीसीओआरटीडब्ल्यूओ) के नेतृत्व में दोनों राज्यों में परिवहन कर्मचारी यूनियन इस हड़ताल के अभियान के तहत जिला-स्तरीय बैठकें कर रहे हैं।

आंध्र प्रदेश में निर्माण श्रमिक पिछले दस दिनों से राज्य सरकार से अपने कल्याण कोष की रक्षा करने की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। इस क्षेत्र में यूनियनों ने कहा कि वे इस हड़ताल में शामिल होंगे।

आंध्र प्रदेश मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव यूनियन के अध्यक्ष पीएस रेड्डी ने कहा, "मोदी सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को आयुष्मान भारत और नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के नाम पर बीमा कंपनियों, कॉर्पोरेट और निजी संस्थाओं को सौंपने की योजना बना रही है।" उन्होंने कहा कि इस महामारी के दौरान देश में स्वास्थ्य क्षेत्र के संकट को उजागर करने के लिए ये यूनियन हड़ताल में शामिल होगा। रेड्डी ने कहा, “इस सरकार में इन क्षेत्रों में संकट फैला हुआ है। इसलिए, श्रमिक वर्ग के सभी वर्गों द्वारा हड़ताल की जा रही है।”

तेलंगाना मिड-डे मील स्कीम वर्कर्स यूनियन और तेलुगु राज्यों में आशा वर्कर्स यूनियन भी इस हड़ताल की मुहिम में भाग ले रहे हैं।

इस लेख को मूल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Telugu States See Massive Campaign Ahead of Joint Protests by Workers and Peasants

November 26 Strike
Telugu States Protest
transport workers
ASHA
construction workers
Workers’ Rights
Village-level Bandh
GHMC
Telangana
CITU
trade unions
AIKSCC
AIKS

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दक्षिण अफ्रीका में सिबन्ये स्टिलवाटर्स की सोने की खदानों में श्रमिक 70 दिनों से अधिक समय से हड़ताल पर हैं 

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • JANAZA
    ज़ाकिर अली त्यागी
    हरदोई: क़ब्रिस्तान को भगवान ट्रस्ट की जमीन बता नहीं दफ़नाने दिया शव, 26 घंटे बाद दूसरी जगह सुपुर्द-ए-खाक़!
    08 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश के हरदोई बीजेपी से जुड़े एक शख़्स ने शव को दफ़्न करने से रोक दिया, और क़ब्रिस्तान की ज़मीन पर अपना दावा ठोक दिया, हैरानी की बात यह रही कि कार्रवाई करने की बजाय प्रशासन भी उनकी ताल में…
  • अपने वर्चस्व को बनाए रखने के उद्देश्य से ‘उत्तराखंड’ की सवर्ण जातियां भाजपा के समर्थन में हैंः सीपीआई नेता समर भंडारी
    एजाज़ अशरफ़
    अपने वर्चस्व को बनाए रखने के उद्देश्य से ‘उत्तराखंड’ की सवर्ण जातियां भाजपा के समर्थन में हैंः सीपीआई नेता समर भंडारी
    08 Jan 2022
    यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि आखिर क्यों रक्षा कर्मी हिंदुत्व के समर्थन में हैं और पर्यावरण का मुद्दा इस पहाड़ी राज्य के लिए चुनावी मुद्दा नहीं है।
  • ECI
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    5 राज्यों में चुनाव तारीख़ों की घोषणा, यूपी में 7 चरणों में चुनाव, 10 मार्च को मतगणना
    08 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी से लेकर 7 मार्च तक 7 चरणों में मतदान होगा, वहीं उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में 14 फरवरी को एक चरण में और मणिपुर में दो चरणों में वोट डाले जाएंगे। इसी के साथ 15 जनवरी तक रैली,…
  • रवि कौशल
    राजस्थान: REET अभ्यर्थियों को जयपुर में किया गया गिरफ़्तार, बड़े पैमाने पर हुए विरोध के बाद छोड़ा
    08 Jan 2022
    दरअसल यह लोग राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) के तहत अगले चरण में पदों को बढ़वाने के लिए 70 दिनों से संघर्ष कर रहे हैं। इनकी मांग है कि सीटों की संख्या को बढ़ाकर 50,000 किया जाए।
  • सोनिया यादव
    यूपी: देश के सबसे बड़े राज्य के ‘स्मार्ट युवा’ सड़कों पर प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
    08 Jan 2022
    एक ओर रैलियों में बीजेपी की योगी सरकार अपनी उपलब्धियां गिनवा रही है तो वहीं दूसरी ओर चुनाव के मुहाने पर खड़े उत्तर प्रदेश के युवाओं ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License