NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
किसान आंदोलन: राकेश टिकैत ने किसानों से कहा- 'गुजरात में बैरिकेड तोड़ने का वक़्त आ गया है'
बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने गुजरात के अपने दो दिवसीय दौरे पर किसानों के विरोध को दबाने की कोशिश को लेकर गुजरात सरकार की आलोचना की।
दमयन्ती धर
13 Apr 2021
किसान आंदोलन: राकेश टिकैत ने किसानों से कहा- 'गुजरात में बैरिकेड तोड़ने का वक़्त आ गया है'

अहमदाबाद में मीडिया को दिये बयान में भारतीय किसान यूनियन (BKU) के फ़ायरब्रांड नेता राकेश टिकैत ने कहा, “गुजरात के किसान नाख़ुश हैं और वे परेशान हैं। हमने गांधीनगर में घेराव किया, सड़कों को अवरुद्ध किया और ज़रूरत पड़ने पर हम गुजरात में बैरिकेड्स को भी तोड़ेंगे।”

4 और 5 अप्रैल को गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर आये टिकैत 5 अप्रैल को अहमदाबाद स्थित गांधी आश्रम के दौरे पर थे।

एक दिन बाद दलित नेताओं और आम आदमी पार्टी की गुजरात इकाई के सदस्यों से मिलने के बाद बीकेयू नेता ने कहा,"गुजरात के किसान भी अपने ट्रैक्टर लेकर बाहर निकलेंगे और राज्य में आंदोलन करेंगे।"

इसके बाद टिकैत ने सरदार वल्लभभाई पटेल के पैतृक निवास स्थान-मध्य गुजरात के आणंद में करमसद का दौरा किया और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी। वाघेला उनसे पालनपुर बनासकांठा में मिले थे। टिकैत अपने अगले पड़ाव में वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के साथ वडोदरा में थे, जहां उन्होंने "किसान संवाद" के सिलसिले में दक्षिण गुजरात के बारडोली जाने से पहले एक गुरुद्वारे का दौरा किया।

गुजरात के किसान नेताओं का मानना है कि गुजरात में टिकैत की मौजूदगी राज्य में उन स्थानीय किसानों को एक नया नज़रिया देने में कामयाब रही है, जो लंबे समय से कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा ज़मीन हड़पे जाने का विरोध करते रहे हैं।

सामाजिक और किसान अधिकार कार्यकर्ता देव देसाई ने न्यूज़क्लिक को बताया, “पुलिस और राज्य प्रशासन के ज़रिये डर पैदा करते हुए विरोध और असंतोष को रोकना गुजरात सरकार की एक स्थायी रणनीति रही है। जितनी बार गुजरात में किसान विरोध करते हैं, उतनी ही बार उन्हें नज़रबंदी, हिरासत आदि का सामना करना होता है। दरअस्ल, जो किसान भरूच से चलकर बारडोली में टिकैत द्वारा बुलायी गयी सभा में शामिल होने जा रहे थे, उन्हें स्थानीय पुलिस ने रोक दिया था।”

देसाई ने आगे बताया, “टिकैत के ज़ोरदार भाषणों का गुजरात के किसानों पर ज़बरदस्त असर हुआ है। किसानों ने कहा है कि टिकैत को फिर से गुजरात का दौरा करना चाहिए और उस उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र का दौरा करना चाहिए,जहां छोटे किसानों की बहुत बड़ी तादाद है।”

हाल ही में स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा को मिली प्रचंड जीत के बाद पार्टी नेतृत्व ने माना था कि पार्टी की जीत का मतलब है कि राज्य में किसान ख़ुश हैं। 2017 के राज्य चुनावों में सत्तारूढ़ पार्टी ने गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र और आदिवासी इलाक़ों में बुरा प्रदर्शन रहा था, जो कि सत्ता विरोधी और कृषि सम्बन्धी मुद्दों का नतीजा था और भाजपा किसी तरह 99 सीटें जीत पाने में कामयाब रही थी। कांग्रेस ने 77 सीटें जीती थीं, 32 साल में कांग्रेस की यह सबसे बड़ी जीत थी। हालांकि, पिछले चार वर्षों में कांग्रेस के कई विधायकों ने भाजपा का रुख़ कर लिया है।

टिकैत का गुजरात दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब अगले साल विधानसभा चुनाव की तारीख़ तय होनी है और विपक्षी कांग्रेस अब भी अपने विधायकों की संख्या में हुए नुकसान और अपने वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के निधन से उबरने की कोशिश में लगी हुई है।

दिलचस्प बात यह है कि टिकैत का ज़ोरदार स्वागत किसानों के अलावा दक्षिण गुजरात के आदिवासी नेताओं ने भी किया है। आदिवासियों की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हुए नर्मदा ज़िले के आदिवासी नेता प्रफुल्ल वसावा ने उन्हें प्रतीकात्मक धनुष, तीर और एक झंडे भेंट किये, एक ट्वीट के ज़रिये भरूच में रहने वाले आदिवासी नेता और भारतीय आदिवासी पार्टी (BTP) सुप्रीमो छोटू वसावा ने टिकैत के पक्ष में अपना समर्थन व्यक्त किया।

बारडोली के जिस मंच पर टिकैत थे, उस मंच से प्रफुल्ल वसावा ने कहा, "अगर टिकैत पर कोई खरोंच भी आती है, तो हम सड़कों पर निकल आयेंगे।"

ग़ौरतलब है कि पिछले महीने अहमदाबाद में किसानों द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद गुजरात में टिकैत के आगमन की आशंका के चलते ’अनुमति नहीं होने’ के आधार पर पुलिस ने बीच में ही उस प्रेस कॉन्फ़्रेंस को रोक दिया था। गुजरात के स्थानीय किसान नेताओं के साथ बीकेयू नेता युद्धवीर सिंह को अहमदाबाद पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।

जिस दिन टिकैत को गुजरात आना था, उस दिन गुजरात और राजस्थान के किसानों का एक बड़ा जत्था राजस्थान के माउंट आबू स्थित आबू रोड पर मौजूद एक खाने की जगह के बाहर इकट्ठा हो गया था, जो उनके आने की उम्मीद में उनका इंतजार कर रहा था।

गुजरात के एक किसान नेता और उस कार्यक्रम के आयोजकों में से एक पालभाई अंबालिया का कहना था, "हमइस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि कार्यक्रम के चलने तक योजना के मुताबिक़ वह गुजरात आकर यहां से निकल पायेंगे या नहीं।”

क़रीब एक घंटे के इंतजार के बाद राकेश टिकैत के पहुंचते ही जैसे ही किसानों की भीड़ टिकैत की तरफ़ उन्हें माला पहनाने और उनसे मिलने को लेकर धुक्कामुक्की करने लगी, तभी पूरा माहौल नारों से गूंज उठा। किसान नेता ने अपने दो दिवसीय दौरे की पहली सार्वजनिक बैठक के सिलसिले में लोगों से लगभग दो किलोमीटर की यात्रा की।

राज्य में दाखिल होने से पहले ही टिकैत ने गुजरात सरकार पर हमला बोला, “गुजरात के किसानों को मुझसे मिलने और अपना विरोध जताने के लिए राज्य से बाहर राजस्थान आना पड़ा है। यह इस बात का बहुत बड़ा संकेत है कि गुजरात के किसान किस तरह से मुक्त हैं और गुजरात मॉडल कैसे काम करता है।”

गुजरात में किसानों की तरफ़ से ज़बरदस्त स्वागत किये जाने से भावुक हुए इस किसान नेता ने राज्य सरकार और गुजरात के उस भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्वास अधिनियम 2013 में उचित मुआवज़े और पारदर्शिता के अधिकार संशोधन की आलोचना तो की, लेकिन उनके भाषणों में इसे लेकर एक शब्द नहीं था, जिसका इस्तेमाल सत्तारूढ़ दल राज्य में कृषि योग्य भूमि का अधिग्रहण करने के लिए करता रहा है।

पलकपुर के बनासकांठा में टिकैत ने भारी पुलिस की मौजूदगीमें किसानों की भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "डर निकालना पड़ेगा।"

टिकैत ने गुजरात के किसानों से आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा,“मुझे पता है कि गुजरात के किसान अपनी ज़मीन के लिए अदालती लड़ाइयां लड़ रहे हैं। लेकिन, अदालत आपकी ज़मीन नहीं बचा पायेगी, आंदोलन में शामिल होकर ही आप इसमें कामयाब हो पायेंगे।”

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

‘Time to Break Barricades in Gujarat,’ Rakesh Tikait Tells Farmers

rakesh tikait
Gujarat
Gujarat Farmers
farmers protest

Related Stories

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?

बेंगलुरु में किसान नेता राकेश टिकैत पर काली स्याही फेंकी गयी

छोटे-मझोले किसानों पर लू की मार, प्रति क्विंटल गेंहू के लिए यूनियनों ने मांगा 500 रुपये बोनस

हार्दिक पटेल ने कांग्रेस से इस्तीफ़ा दिया

खंभात दंगों की निष्पक्ष जाँच की मांग करते हुए मुस्लिमों ने गुजरात उच्च न्यायालय का किया रुख

लखीमपुर खीरी हत्याकांड: आशीष मिश्रा के साथियों की ज़मानत ख़ारिज, मंत्री टेनी के आचरण पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी

युद्ध, खाद्यान्न और औपनिवेशीकरण

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

गुजरात: मेहसाणा कोर्ट ने विधायक जिग्नेश मेवानी और 11 अन्य लोगों को 2017 में ग़ैर-क़ानूनी सभा करने का दोषी ठहराया

ज़मानत मिलने के बाद विधायक जिग्नेश मेवानी एक अन्य मामले में फिर गिरफ़्तार


बाकी खबरें

  • EVM
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: इस बार किसकी सरकार?
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में सात चरणों के मतदान संपन्न होने के बाद अब नतीजों का इंतज़ार है, देखना दिलचस्प होगा कि ईवीएम से क्या रिजल्ट निकलता है।
  • moderna
    ऋचा चिंतन
    पेटेंट्स, मुनाफे और हिस्सेदारी की लड़ाई – मोडेरना की महामारी की कहानी
    09 Mar 2022
    दक्षिण अफ्रीका में पेटेंट्स के लिए मोडेरना की अर्जी लगाने की पहल उसके इस प्रतिज्ञा का सम्मान करने के इरादे पर सवालिया निशान खड़े कर देती है कि महामारी के दौरान उसके द्वारा पेटेंट्स को लागू नहीं किया…
  • nirbhaya fund
    भारत डोगरा
    निर्भया फंड: प्राथमिकता में चूक या स्मृति में विचलन?
    09 Mar 2022
    महिलाओं की सुरक्षा के लिए संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन धूमधाम से लॉंच किए गए निर्भया फंड का उपयोग कम ही किया गया है। क्या सरकार महिलाओं की फिक्र करना भूल गई या बस उनकी उपेक्षा कर दी?
  • डेविड हट
    यूक्रेन विवाद : आख़िर दक्षिणपूर्व एशिया की ख़ामोश प्रतिक्रिया की वजह क्या है?
    09 Mar 2022
    रूस की संयुक्त राष्ट्र में निंदा करने के अलावा, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में से ज़्यादातर ने यूक्रेन पर रूस के हमले पर बहुत ही कमज़ोर और सतही प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा दूसरों…
  • evm
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: नतीजों के पहले EVM को लेकर बनारस में बवाल, लोगों को 'लोकतंत्र के अपहरण' का डर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में ईवीएम के रख-रखाव, प्रबंधन और चुनाव आयोग के अफसरों को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। उंगली गोदी मीडिया पर भी उठी है। बनारस में मोदी के रोड शो में जमकर भीड़ दिखाई गई, जबकि ज्यादा भीड़ सपा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License