NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
संस्कृति
भारत
UGCRC छात्रों को क्या नहीं पढ़ने देना चाहता: जन नाट्य मंच का नाटक “औरत”
"एक ऐसा नाटक जो महिला आंदोलन का हिस्सा है, जो महिलाओं के अधिकारों की बात करता है, उस नाटक के ज़िक्र से भी किसी को दिक़्क़त क्यों हो रही है?"
आईसीएफ़
03 Aug 2019
ek natak

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के लर्निंग आउटकम-बेस्ड करिकुलम फ्रेमवर्क प्रोग्राम के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय ने स्नातक के विभिन्न कोर्स के सिलेबस को बदलने का निर्णय लिया है। ये प्रक्रिया जनवरी में शुरू हुई थी और अभी तक कई बदलाव किए जा चुके हैं। बदलाव करने का ये सिलसिला जल्दी थमता हुआ नहीं दिख रहा है। 

21 जून को दक्षिणपंथी गुट के कुछ अध्यापकों द्वारा सिलेबस को ले कर आपत्ति जताई गई, जिसके बाद एग्ज़ीक्यूटिव काउंसिल ने अंग्रेज़ी, इतिहास, राजनीति शास्त्र और समाजशास्त्र के सिलेबस वापस डिपार्टमेंट में भेज दिये। उसके बाद विभागों से UGCRC के नियमों के तहत सिलेबस में बदलाव करने को कहा गया। अकेडमिक काउंसिल की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य और अंग्रेज़ी के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर सैकत घोष ने कहा, “हालांकि UGCRC के नियमों को और नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट द्वारा उठाए गए सारे आपत्ति के विषयों को मानते हुए बदलाव कर लिए गए थे, लेकिन UGCRC ने एक बार फिर अंग्रेज़ी विभाग को बदलावों की एक लंबी लिस्ट भेज दी है।" 

इंडियन एक्स्प्रेस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, UGCRC ने अंग्रेज़ी विभाग से कहा है कि मीना कंदासामी को प्रेमचंद और अमितव घोष को आर के नारायण से बदल दिया जाए। इसके साथ ही ये कहा गया है कि सिलेबस से इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन (इप्टा) और जन नाट्य मंच से संबन्धित कोई भी लेख हटा दिया जाए।

UGCRC ने कहा है कि अंग्रेज़ी के “इंडियन राइटिंग्स इन इंग्लिश ” पेपर में  कंदासामी के काव्य संग्रह "टच” को प्रेमचंद की कहानी "श्राउड” से बदल दिया जाए; और अमितव घोष के "द शैडो लाइन्स” को आर के नारायण के "स्वामी एंड फ्रेंड्स” से बदल दिया जाए। 'स्टडीज इन मॉडर्न इंडियन परफॉरमेंस ट्रडिशन्स" पेपर में UGCRC ने कहा है कि जन नाट्य मंच (जनम) के नाटक "औरत", बादल सरकार के नाटक "प्रोसेशन”, और इप्टा के इतिहास से जुड़े दो निबंधों सहित, सभी लेख हटा दिये जाएँ। 

अंग्रेज़ी विभाग ने इनमें से किसी भी बदलाव को स्वीकार करने से इंकार कर दिया है। इंडियन कल्चरल फ़ोरम उनके इस फ़ैसले का समर्थन करता है और इस बात का भी समर्थन करता है कि विद्यार्थियों को, और हर नागरिक को ऐसी चीज़ों को पढ़ना जारी रखना चाहिए।

हमने इस सिलसिले में मलयश्री हाश्मी से बात करी तो उन्होंने कहा, "1978 में बना 'औरत' हमारे(जन नाट्य मंच के) शुरुआती नाटकों में से है। और ये नाटक दरअसल हिंदुस्तान में महिलाओं के संघर्षों और आंदोलनों, जो कि उस वक़्त बहुत मुखर तौर पर सामने आ रहे थे, उनसे निकल कर आया था। और ये आंदोलन और संघर्ष आज भी जारी हैं। कई लोगों ने इस नाटक का ज़िक्र अलग-अलग जगहों पर किया है, और मैंने ख़ुद इस नाटक को सैकड़ों बार खेला है, और ये मेरे लिए इज़्ज़त की बात है, कि मैं ऐसे नाटक का हिस्सा रही हूँ। 

मेरी समझ में ये नहीं आता है, कि एक ऐसा नाटक जो महिला आंदोलन का हिस्सा है, जो महिलाओं के अधिकारों की बात करता है, उस नाटक के ज़िक्र से भी किसी को दिक़्क़त क्यों हो रही है? वो भी ऐसे दौर में जब हम महिलाओं के सशक्तिकरण की बात कर रहे हैं, उनकी कामयाबी का जश्न मना रहे हैं। ये बात मेरी समझ से एकदम बाहर है। 'औरत' समाज में औरतों की अहमियत और उनके किरदार की बात करता है। आज जब हम देश भर में बच्चियों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, मुझे समझ नहीं आता कि इस नाटक में ऐसा क्या है जिससे किसी को दिक़्क़त हो सकती है।"

निम्नलिखित जन नाट्य मंच के नाटक "औरत" का एक अंश है।

अभिनेत्री : में एक मां
                  एक बहन,
                  एक बेटी
                  एक अच्छी पत्नी
                  एक औरत हूं

अभिनेता-1 : एक औरत जो न जाने कबसे
                    नंगे पांव रेगिस्तानों की धधकती बालू में
                    भागती रही हे

अभिनेत्री : मैं सुदूर उत्तर के गावों से आई हूं

अभिनेता-2 : एक औरत जो न जाने कबसे
                    धान के खेतों और चाय के बाग़ानों में
                    अपनी ताक़त से ज़्यादा मेहनत करती आई है।

अभिनेत्री : मैं पूरब के अंधेरे खंडहरों से आई हूं
                  जहाँ मैंने न जाने कबसे
                  नंगे पाव 
                  सुबह से शाम तक
                  अपनी मरियल गाय के साथ, खलियानों में
                  दर्द का बोझ उठाया है।
                  मैं एक औरत हूं।

अभिनेता-3 : उन बंजारों में से
                    जो तमाम दुनिया में भटकते फिरते हैं
                    एक औरत जो पहाड़ों की गोद में बच्चे जनती है
                    जिसकी बकरी मैदानों में कहीं मर जाती है
                    और वह बैन करती रह जाती है।

अभिनेत्री : मैं एक मज़दूर औरत हूं।

अभिनेता-4  :  जो अपने हाथों से फ़ैक्ट्री में
                    देवकाय मशीनों के छक्के घुमाती है
                    वह मशीनें जो उसकी ताक़त को
                    एन उसकी आंखों के सामने
                    हर दिन नोंचा करती हैं
                    एक औरत जिसके ख़ूने जिगर से
                    ख़ूंख़ार ककालों की प्यास बुझती है,
                    एक औरत जिसका ख़ून बहने से
                    सरमाएदार का मुनाफ़ा बढ़ता है।

अभिनेत्री : एक औरत जिसके लिए तुम्हारी बेहूदा शब्दावली में

अभिनेता-5 : एक शब्द भी ऐसा नहीं
                    जो उसके महत्त्व को बयान कर सके
                    तुम्हारी शब्दावली केवल उसी औरत की बात करती है
                    जिसके हाथ साफ़ हैं
                    जिसका शरीर नर्म है
                    जिसकी त्वचा मुलायम है
                    और जिसके बाल ख़ुशबूदार हैं।

अभिनेत्री : मैं तो वह औरत हूं

अभिनेता-6 : जिसके हाथों को दर्द की पैनी छुरियों ने
                    घायल कर दिया है
                    एक औरत जिसका बदन तुम्हारे अंतहीन,
                    शर्मनाक और कमरतोड़ काम से टूट चूका है
                    एक औरत जिसकी खाल में
                    रेगिस्तानों की झलक दिखाई देती है
                    जिसके बालों से फ़ैक्ट्री के धुएं की बदबू आती है। 

अभिनेत्री : मैं एक आज़ाद औरत हूं

अभिनेता-1 : जो अपने कामरेडों भाइयों के साथ
                    कांधे से कांधा मिलाकर
                    मैदान पार करती है

अभिनेता-2 : एक औरत जिसने मज़दूर के
                    मज़बूत हाथों की रचना की है
                    और किसान की बलवान भुजाओं की।

अभिनेत्री : मैं खुद भी एक मज़दूर हूं
                    मैं खुद भी एक किसान हूं
                    मेरा पूरा जिस्म दर्द की तस्वीर है
                    मेरी रग-रग में नफ़रत की आग भरी है
                    और तुम कितनी बेशर्मी से कहते हो
                    कि मेरी भूक एक भ्रम है
                    और मेरा नंगापन एक ख़्वाब।
                    एक औरत जिसके लिए तुम्हारी बेहूदा शब्दावली में
                    एक शब्द भी ऐसा नहीं
                    जो उसके महत्त्व को बयान कर सके।

अभिनेता-5 : एक औरत जिसके सीने में
                    ग़ुस्से से फफकते नासूरों से भरा
                    एक दिल छिपा है

अभिनेता-4 : एक औरत जिसकी आंखों में
                    आज़ादी कि आग के लाल साए
                    लहरा रहे हैं।  

women movement
UGC
University Grants Commission
Delhi University
UGCRC
jan natya manch

Related Stories

दिल्ली: दलित प्रोफेसर मामले में SC आयोग का आदेश, DU रजिस्ट्रार व दौलत राम के प्राचार्य के ख़िलाफ़ केस दर्ज

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

कॉमन एंट्रेंस टेस्ट से जितने लाभ नहीं, उतनी उसमें ख़ामियाँ हैं  

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट को लेकर छात्रों में असमंजस, शासन-प्रशासन से लगा रहे हैं गुहार

नेट परीक्षा: सरकार ने दिसंबर-20 और जून-21 चक्र की परीक्षा कराई एक साथ, फ़ेलोशिप दीं सिर्फ़ एक के बराबर 

यूजीसी का फ़रमान, हमें मंज़ूर नहीं, बोले DU के छात्र, शिक्षक

नई शिक्षा नीति ‘वर्ण व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करती है' 

45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए होगी प्रवेश परीक्षा, 12वीं में प्राप्त अंकों के आधार पर प्रवेश खत्म

शिक्षाविदों का कहना है कि यूजीसी का मसौदा ढांचा अनुसंधान के लिए विनाशकारी साबित होगा


बाकी खबरें

  • क्या Pegasus जैसा कुछ पहले भी हुआ है?
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या Pegasus जैसा कुछ पहले भी हुआ है
    25 Jul 2021
    पिछले कुछ दिनों से आयी Pegasus की खबर ने देश और दुनिया भर में हड़कंप मचा दिया है. क्या ऐसा भारत के इतिहास में पहले भी कभी हुआ है? आइये जानते हैं वरष्ठ पत्रकार नीलांजन मुखोपाध्याय के साथ "इतिहास के…
  • pegasus
    सुभाष गाताड़े
    स्पायवेअर अर्थात जासूसी सॉफ्टवेयर – जनतंत्र के ख़िलाफ़ नया हथियार!
    25 Jul 2021
    दुनिया भर में कम से कम 500 निजी कंपनियां हैं जो ऐसे स्पायवेयर के निर्माण में लगी हैं, जिन्हें वह दमनकारी हुकूमतों को बेचती हैं और जिसके जरिए यह सरकारें अपने ही नागरिकों का उत्पीड़न करती है।
  • सर्विलांस राज्य ही विश्व का 'न्यू नॉर्मल'
    बी. सिवरामन
    सर्विलांस राज्य ही विश्व का 'न्यू नॉर्मल'
    25 Jul 2021
    सर्विलांस की अकूत ताकत की वजह से राज्य चाहे जो मर्जी सो कर सकता है।
  • मुबंई: बारिश हर साल लोगों के लिए आफ़त लेकर आती है और प्रशासन हर बार नए दावे!
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मुबंई: बारिश हर साल लोगों के लिए आफ़त लेकर आती है और प्रशासन हर बार नए दावे!
    25 Jul 2021
    मुबंई की ये बदहाल तस्वीर लगभग हर बारिश में देखने को मिल जाती है। जानकार मानते हैं कि ये सब जलवायु परिवर्तन और सरकारों की अनदेखी का नतीजा है।
  • कोरोना की तीसरी लहर: आयेगी ज़रूर, बस मेहनत करते रहिए
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    कोरोना की तीसरी लहर: आयेगी ज़रूर, बस मेहनत करते रहिए
    25 Jul 2021
    सारी लहरें मेहनत से ही आईं हैं। पहली लहर में सरकार जी ने मेहनत की। दूसरी लहर में और ज़्यादा मेहनत की और अब तीसरी लहर की बात हो रही है। सरकार जी और सरकारें भी निरंतर प्रयास कर रही हैं कि तीसरी लहर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License