NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
यूके ने अफ़ग़ानिस्तान के नए खेल में बढ़ाया पहला क़दम
यह एक कड़ी चेतावनी है कि अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध 19वीं सदी के एक खेल में बदल गया है।
एम. के. भद्रकुमार
12 Oct 2021
Translated by महेश कुमार
Afghanistan
अफ़ग़ानिस्तान पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री के प्रतिनिधि सर साइमन गैस, तालिबान के विदेश मंत्री मुल्ला अमीर खान मुत्ताकी से काबुल में 5 अक्टूबर, 2021 को बात करते हुए, वे बाएं से दूसरे स्थान पर बैठे हैं।

हालांकि, भारत के विदेश मंत्री एस॰ जयशंकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से काबुल में तालिबान सरकार के साथ किसी भी किस्म के रचनात्मक जुड़ाव में देरी करने के लिए बाइडेन प्रशासन की परियोजना के प्रति समर्थन जुटाने के लिए उत्कृष्ट प्रचार करने में लगे हैं, जब तक कि वाशिंगटन अपने काम सही ट्रैक पर नहीं ले आता है, जबकि एंग्लो-अमेरिकी धुरी तालिबान को फिर से बातचीत में संलगन करने के लिए व्यवस्थित रूप से काम कर रही है।

इस संबंध में, ब्रिटेन के सशस्त्र बलों के मंत्री, जेम्स हेप्पी ने 21-22 सितंबर को उज्बेकिस्तान की  यात्रा के दौरान वास्तव में तालिबान सरकार के साथ एक स्थायी जुड़ाव के लिए अपनी ओर से रसद पहुंचाने के लिए एक कामकाज़ी यात्रा की है। अमेरिकी उप-विदेश मंत्री वेंडी शेरमेन ने भी इस सप्ताह ताशकंद में इसका तेजी से पालन किया है।

हेप्पी ने टर्मेज़ में 'फ़ील्ड ट्रिप' किया, जहां सोवियत युग का एक विशाल हवाई अड्डा है (जहाँ से 1980 में अफ़ग़ानिस्तान पर सोवियत आक्रमण किया गया था।) ऐसा लगता है कि इसका उद्देश्य 'मानवतावादी रसद पहुंचाने के लिए टर्मेज़ के संभावित इस्तेमाल का आकलन करना था जो गलियारा' अफगानिस्तान की ओर जाता है।

हाल के हफ्तों में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बार-बार विश्व समुदाय के सामने इस बात को उज़ागर किया है कि अफ़ग़ानिस्तान में इस समय में एक मानवीय आपदा सामने आ रही है जो इस हलचल का बड़ा आधार है। बाइडेन प्रशासन, जो काबुल हवाई अड्डे से अपने अनाड़ीपन से भरी वापसी के चलते बड़ी आलोचना का शिकार हुआ है, इस आसन्न मानवीय संकट के चलते उसकी प्रतिष्ठा को और अधिक नुकसान पहुंचाने की संभावना है जो स्थिति आगे चलकर काफी विस्फोटक हो सकती है। 

यह कहना पर्याप्त होगा कि अमेरिका और ब्रिटेन एक मानवीय सहायता कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं ताकि राजनीतिक दृष्टि से भी तालिबान सरकार के साथ उनके जुड़ाव का मार्ग अनिवार्य रूप से खुल जाए। इस विचार के जरिए तालिबान के साथ काम के स्तर पर संबंधों को 'सामान्य' करना और आपसी विश्वास को उस बिंदु तक ले जाना है जहां से काबुल में सरकार की औपचारिक राजनयिक मान्यता एक तार्किक का कदम देरी के बजाय जल्द लिओया जा सके। 

दिलचस्प बात यह है कि इस बात के पहले से ही कुछ संकेत मिल रहे हैं कि बाइडेन प्रशासन ने वाशिंगटन में पिछले अफ़गान राजदूत एडेला रज़ से खुद को दूर कर लिया है, जिसे अशरफ गनी सरकार ने नियुक्त किया था।

मूल रूप से, वाशिंगटन और लंदन ने तय कर लिया है कि तालिबान सरकार के साथ व्यापार करना संभव है। इसके मूल में उनका रणनीतिक आकलन यह है कि तालिबान और आईएसआईएस आपसी दुश्मन हैं, इस तथ्य को देखते हुए तालिबान सरकार को चुनने से आईएसआईएस और अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अन्य आतंकवादी समूहों से उत्पन्न सुरक्षा खतरे को दूर करने का कोई बेहतर तरीका नहीं है।

इस सप्ताह के अंत में, तालिबान ने काबुल के उत्तर में चरिकर शहर में आईएसआईएस के एक बड़े ठिकाने को नष्ट कर दिया है। दूसरा, अफ़ग़ानिस्तान की धरती पर अमेरिका या ब्रिटेन द्वारा किसी भी स्वतंत्र आतंकवाद विरोधी अभियान का तालिबान अपने देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमले के रूप में कड़ा विरोध करेगा। कहने का तात्पर्य यह है कि, अमेरिका और ब्रिटेन तालिबान के साथ टकराव में उलझने का जोखिम नहीं उठाएंगे, जो न केवल निरर्थक है, बल्कि प्रतिकूल भी हो सकता है क्योंकि यह अफ़ग़ानिस्तान को अस्थिर कर सकता है और आईएसआईएस के लिए अनुकूल जमीन तैयार कर सकता है।

तीसरा, तथ्य यह है कि तालिबान पिछले कई वर्षों में पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के लिए एक जानी-मानी इकाई है, और कोरी बयानबाजी के अलावा, पश्चिमी देशों में तालिबान के व्यावहारिक दृष्टिकोण और पश्चिमी दुनिया में एकीकृत होने की उनकी उत्सुकता के बारे में सकारात्मक प्रभाव है। .

बेशक, पश्चिमी विशेषज्ञ, तालिबान पर भारतीय प्रशासन के एकतरफा दृष्टिकोण से सहमत नहीं हैं, जिसे वह प्रचारित करता है, अर्थात्, वह कहता है कि उनकी खुद की कोई अफ़गान पहचान नहीं है और वे मात्र पाकिस्तानी प्रॉक्सी हैं या उनके समर्थक हैं।

चौथा, पश्चिमी आकलन यह भी है कि तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान के आसपास के क्षेत्रीय देशों - रूस, चीन, ईरान और पाकिस्तान - पर नई शीत युद्ध के हालत में बड़ी प्रतिद्वंद्विता के मौजूदा अंतरराष्ट्रीय माहौल में पूरी तरह से निर्भर होने देना नासमझी है।

पांचवां, जबकि 'अफगान प्रतिरोध' का गूढ़ रहस्य बेखबर दिमाग में के नशे की तरह से है, जानकार हलकों में ठंडा और पेशेवर आकलन यह है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान शासन एक सम्मोहक वास्तविकता है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है और शासन उस देश में खुद को मजबूत हो रहा है। ताजिकिस्तान में स्वतंत्र नेतृत्व को धन्यवाद, जो कहते हैं कि ऐसा कोई नहीं सोचता कि तालिबान सरकार को उखाड़ फेंकने का कोई खतरा है।

वास्तविक रूप से कहने का तात्पर्य यह है कि, तालिबान सरकार के साथ व्यापार किए बिना कोई विकल्प नहीं है, और जितनी जल्दी इस दिशा में संपर्क शुरू किया जाएगा, वह दोनों पक्षों के लिए उतना ही अधिक उत्पादक होगा। अफ़ग़ानिस्तान से शरणार्थियों के पलायन करने का भूत वास्तव में पश्चिमी दुनिया को सता रहा है।

इन सभी विविध विचारों ने अफ़ग़ानिस्तान पर नियुक्त ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के विशेष प्रतिनिधि सर साइमन गैस (समवर्ती रूप से यूके संयुक्त खुफिया समिति के अध्यक्ष और पूर्व में ईरान में ब्रिटिश राजदूत) द्वारा तालिबान सरकार के साथ पहला सीधा संपर्क साधने के लिए काबुल की यात्रा को प्रेरित किया है। 

सर साइमन के साथ काबुल में ब्रिटिश दूतावास में सीडीए मार्टिन लॉन्गडेन भी थे (जो अब दोहा में स्थानांतरित हो गए हैं)। दो ब्रिटिश राजनयिकों का तालिबान के विदेश मंत्री खान अमीर खान मुत्ताकी ने स्वागत किया।

ब्रिटिश सराकर की तरफ से बाद में ट्वीट किया गया कि सर साइमन ने "मुत्ताकी के साथ गंभीर और पर्याप्त चर्चा की है। चर्चा में मानवीय संकट, आतंकवाद, यूके और अफ़गान नागरिकों के लिए सुरक्षित मार्ग का महत्व और महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों सहित कई मुद्दों को कवर किया है गया। बाद में ब्रिटेन की विज्ञप्ति में कहा गया कि ब्रिटिश राजदूतों ने तालिबान सरकार के दो उप-प्रधानमंत्रियों मुल्ला अब्दुल गनी बरादर अखुंद और मावलवी अब्दुल-सलाम हनफ़ी से भी मुलाकात की है।

इसमें कहा गया है, "सर साइमन और डॉ लॉन्गडेन ने चर्चा की कि ब्रिटेन मानवीय संकट से निपटने के लिए अफ़ग़ानिस्तान की मदद कैसे कर सकता है, देश को आतंकवाद की जननी  बनने से रोकने का महत्व क्या है, और जो लोग देश छोड़ना चाहते हैं उनके लिए निरंतर सुरक्षित मार्ग की जरूरत है। उन्होंने अल्पसंख्यकों के इलाज और महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों को भी उठाया। सरकार उन लोगों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करना जारी रखेगी जो वहां से जाना चाहते हैं और साथ ही अफ़ग़ानिस्तान के लोगों का समर्थन करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। संभवतः, निकट भविष्य में यूके दूतावास को फिर से खोलने - या काबुल में ब्रिटिश उपस्थिति के किसी रूप को इंकार नहीं किया जा सकता है।

मित्र राष्ट्रों की मूर्तिकला: फ्रैंकलिन रूजवेल्ट और विंस्टन चर्चिल की आदमकद कांस्य प्रतिमाएं न्यू बॉन्ड स्ट्रीट, लंदन में एक बेंच पर मौजूद हैं, जो दुनिया को दो महान शक्तियों के साझा इतिहास की याद दिलाती हैं।

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि आधुनिक इतिहास में अमेरिका और ब्रिटेन अक्सर एक साथ आगे बढ़े हैं। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री आते-जाते रहते हैं लेकिन 'विशेष संबंध' जीवित और संपन्न होते हैं।

निस्संदेह, सर साइमन के मिशन को बाइडेन प्रशासन का पूरा समर्थन प्राप्त था। सर साइमन के काबुल में उड़ान भरने के साथ, नए महान खेल में ब्रिटेन का पहला कदम अफ़ग़ानिस्तान में तथाकथित 'रणनीतिक प्रतियोगिता' में एक टेम्पलेट की शुरुवात है – बाइडेन प्रशासन से मंजूरी लेते हुए - अमेरिका, रूस और चीन को शामिल किया गया है। 

अफ़ग़ान तालिबान के डीएनए पर गैर-महत्वपूर्ण व्यंग्यात्मक बयानबाजी के विपरीत दुस्साहसी ब्रिटिश कदम ने मॉस्को और बीजिंग को आश्चर्यचकित कर दिया होगा। आखिर तालिबान सरकार को मान्यता देने से कौन डरता है?

यह एक कड़ी चेतावनी है कि अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध 19वीं सदी के महान खेल के एक नए रूप में बदल गया है। कल ही क्रेमलिन मीडिया में अफवाह उड़ी थी कि चीनी विमान बगराम हवाई अड्डे पर उतरे हैं।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

UK Fires the First Shot in the New Great Game

Afghanistan
Afghanistan Crisis
TALIBAN
UK
USA

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

अमेरिकी आधिपत्य का मुकाबला करने के लिए प्रगतिशील नज़रिया देता पीपल्स समिट फ़ॉर डेमोक्रेसी

भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी

छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

तालिबान को सत्ता संभाले 200 से ज़्यादा दिन लेकिन लड़कियों को नहीं मिल पा रही शिक्षा

रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं

पश्चिम बनाम रूस मसले पर भारत की दुविधा

पड़ताल दुनिया भर कीः पाक में सत्ता पलट, श्रीलंका में भीषण संकट, अमेरिका और IMF का खेल?


बाकी खबरें

  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 39,796 नए मामले, 723 मरीज़ों की मौत
    05 Jul 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 39,796 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1.57 फ़ीसदी यानी 4 लाख 82 हज़ार 71 हो गयी है।
  • खाद्य सामग्री की ऊंची क़ीमतें परिवारों के पोषण को तबाह कर रही हैं
    सुबोध वर्मा
    खाद्य सामग्री की ऊंची क़ीमतें परिवारों के पोषण को तबाह कर रही हैं
    05 Jul 2021
    प्रोटीन के बुनियादी स्रोत जैसे मांस, अंडे, दालें आम आदमी की पहुँच से बाहर हो गए हैं और रसोई गैस की क़ीमत की तरह खाना पकाने के तेल की क़ीमतों में भी बड़ा उछाल आया है। 
  • लेखक को भविष्य की उम्मीद दिखानी चाहिए
    न्यूज़क्लिक टीम
    लेखक को भविष्य की उम्मीद दिखानी चाहिए
    04 Jul 2021
    न्यूज़क्लिक की ख़ास पेशकश में वरिष्ठ कवि व राजनीतिक विश्लेषक अजय सिंह ने उपन्यासकार-गद्यकार गीता हरिहरन से उनके उपन्यास I have become the tide के बहाने मौजूदा दौर पर विस्तृत बातचीत की। अजय सिंह ने…
  • Economic Liberalisation: 30 साल में क्या बदला, क्या नहीं?
    न्यूज़क्लिक टीम
    Economic Liberalisation: 30 साल में क्या बदला, क्या नहीं?
    04 Jul 2021
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार नीलांजन 1991 Economic Liberalisation की बात कर रहे है. क्या है इसका इतिहास और इसे क्यों लागू किया गया था, आइये जानते हैं
  • नासिरा शर्मा‌‌
    श्याम कुलपत
    नासिरा शर्मा‌‌: मिट्टी और पानी की तासीर पर बात करने का न्योता
    04 Jul 2021
    भाषा के चहुं ओर जो दीवारें हमसे खड़ी हो रही हैं वह कोई साहित्यिक अमल नहीं ‌है। नासिरा शर्मा ने इसे उसकी गैर अदबी अभिव्यक्ति कहा, जो भाषा के पक्ष में नहीं विपक्ष में जाती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License