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उन्नाव कांड : डीएम को 15 महीने लगे विधायक सेंगर के हथियारों का लाइसेंस निरस्त करने में
आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के नाम पर एक सिंगल बैरल बंदूक, एक राइफल और एक रिवॉल्वर का लाइसेंस था। इन हथियारों के लाइसेंस को रद्द किए जाने की कार्रवाई पिछले 15 माह से जिला मजिस्‍ट्रेट के न्‍यायालय में चल रही थी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Aug 2019
kuldeep singh
फोटो साभार : Indian Express

उन्नाव कांड के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को अब तक शासन-प्रशासन से किस तरह की छूट और सुविधाएं मिली हुईं थी, वो अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है। जेल में बंद होने के बाद भी फोन इत्यादि की सुविधा मिलने और वहीं से धमकाने के आरोप तो सामने आए ही हैं, अब तक उसके हथियारों के लाइसेंस निलंबित या निरस्त तक नहीं किए गए थे। अब ये मामला जब एक बार फिर सुर्खियों में आ गया तो हथियारों का लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई अंतत: 15 माह बाद पूरी की गई।

जिला मजिस्ट्रेट देवेंद्र कुमार पाण्डेय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद तीनों हथियार लाइसेंस निरस्‍त करने का आदेश जारी कर दिया है।

विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के नाम पर एक सिंगल बैरल बंदूक, एक राइफल और एक रिवॉल्वर का लाइसेंस था। इन हथियारों के लाइसेंस को रद्द किए जाने की कार्रवाई पिछले 15 माह से जिला मजिस्‍ट्रेट के न्‍यायालय में चल रही थी। जिलाधिकारी ने लाइसेंस निरस्‍तीकरण की सुनवाई से पहले मीडिया को बताया था कि न्‍यायिक प्रक्रिया के तहत ही निरस्‍तीकरण की कार्रवाई की जाती है जिसमें दोनों पक्षों को सुनना होता है।

मामले में सीबीआई जांच शुरू होने के बाद विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की गिरफ्तारी के बाद ही उनके सभी हथियार लाइसेंसों को निरस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई थी जो लम्बित थी।

बीते रविवार पीड़िता के रायबरेली की जेल में बंद अपने चाचा से मिलने जाने के दौरान हुए सड़क हादसे के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया और तब से विधायक के हथियार लाइसेंस निरस्त न होने के मामले पर सवाल उठने लगे।

इसे भी पढ़ें : उन्नाव बलात्कार मामला : पीड़िता की हालत स्थिर; न्यायालय के मीडिया को कड़े निर्देश

इसके बाद जिला मजिस्ट्रेट की अदालत ने पूर्व निर्धारित तारीख पर शुक्रवार को अंतिम सुनवाई कर हथियार लाइसेंस निरस्त करने का आदेश जारी किया।

गौरतलब है कि पीड़ित पक्ष ने विधायक के हथियार लाइसेंस रद्द किए जाने की मांग पूर्व में जिला प्रशासन से की थी।

 सीबीआई ने 13 अप्रैल, 2018 को विधायक को गिरफ्तार किया था जिसके बाद हथियार लाइसेंस निरस्त करने की कवायद शुरु हुई थी।

इसे भी पढ़ें : सीतापुर जेल के बाहर पुलिसकर्मी को रिश्वत देते दिखा युवक, जांच के आदेश

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ) 

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