NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
देश में बेरोज़गारी लगभग 10 प्रतिशत, युवाओं में 28
देश में चल रही आर्थिक मंदी के कारण बेरोज़गारी अधिक बढ़ेगी क्योंकि न केवल पुरानी नौकरियां ख़त्म हो रही हैं, बल्कि नई नौकरियां भी पैदा होती नज़र नहीं आ रही हैं।
सुबोध वर्मा
30 Sep 2019
Translated by महेश कुमार
देश में बेरोज़गारी

मौजूदा सरकार के कुछ नेता दुनिया को शासन करने के तौर तरीक़ों के बारे में बड़े मज़े से सबक दे रहे हैं, जैसा कि नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में किया, जबकि उनके ही कुछ अन्य नेता घरेलू और विदेशी कॉर्पोरेट निगमों को भारी रियायतें देने में व्यस्त हैं, जबकि भारत में आम लोग लगातार बढ़ती बेरोज़गारी और आर्थिक मंदी के चलते हो रहे नौकरियों के नुक़सान के कारण भयंकर शिकंजे में फंसते जा रहे हैं।

सीएमआईई (सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी) द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों का अनुमान है कि बेरोज़गारों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो अगस्त के अंत तक बढ़कर 4.5 करोड़ हो गई है, जो पिछले साल की तुलना में 1.1 करोड़ और दो वर्षों में यह 2 करोड़ अधिक है। [नीचे चार्ट देखें] यह उन सभी बेरोज़गार लोगों की संख्या है जो काम करने के इच्छुक हैं, फिर चाहे वे सक्रिय रूप से नौकरी की तलाश कर रहे हों या नहीं। साप्ताहिक अनुमान के अनुसार 27 सितंबर तक इसके 9.94 प्रतिशत के क़रीब पहुंचने का अनुमान है।

 No of Jobs.jpg

इन बेरोज़गारों में, 20 से 29 साल के युवाओं की संख्या कुल तीन करोड़ से अधिक है। इस संख्या में पिछले दो वर्षों में क़रीब 73 प्रतिशत की चौंका देने वाली छलांग आई है। [नीचे चार्ट देखें] तो, वर्तमान में युवाओं में बेरोज़गारी की दर 28 प्रतिशत है। इसका बहुत कुछ तो तथाकथित जनसांख्यिकीय लाभांश से तैयार हुआ है क्योंकि इस आबादी का बड़ा हिस्सा उत्पादक आयु वर्ग से है। लेकिन यह बड़े दुख की बात है कि उनमें से लगभग एक तिहाई बेकार बैठे हैं, और नौकरी की कोई संभावना भी नज़र नहीं आती है।

 jobless youth.jpg

महिलाओं के मामले में भारत में हमेशा से नौकरी के अवसरों को लेकर बहुत ही ख़राब रिकॉर्ड रहा है, क्योंकि महिलाओं की रोज़गार में भागीदारी काफ़ी कम रही है। लेकिन संकट की वर्तमान स्थिति में, महिलाओं की बेरोज़गारी की स्थिति अधिक ख़राब हुई है, नवीनतम सीएमआईई आंकड़ों का अनुमान है कि यह 27 प्रतिशत से भी अधिक है, जो पिछले साल लगभग 22 प्रतिशत और 2017 में लगभग 17 प्रतिशत थी। [नीचे देखें]

 Women's Unemployment.jpg

जैसा कि आपने देखा होगा कि मोदी सरकार ने रोज़गार सृजन में सुधार लाने के लिए किसी भी तरह के उपाय की घोषणा नहीं की है। उन्हें लगता है कि आसान बैंक ऋण उपलब्ध करा देने, कॉर्पोरेट निकायों को टैक्स में रियायतें दे देने और उन्हें ज़मानती आर्थिक उपहार देने से नौकरियों पैदा हो जाएंगी। हालांकि, सीएमआईई के अन्य आंकड़ों से पता चलता है कि 2018-19 में, कॉर्पोरेट का शुद्ध लाभ 22.3 प्रतिशत की दर से बढ़ा था और अभी तक नौकरियों की कोई महत्वपूर्ण संख्या नहीं बढ़ी है। कॉर्पोरेट घरानों को उत्पादन बढ़ाने में कोई दिलचस्पी नहीं है - वे लाभांश लेने में अधिक रुचि रखते हैं।

लेकिन तथ्य यह है कि उद्योगों की कुल क्षमता का उपयोग लगभग 75 प्रतिशत से भी कम है, बिक्री सभी जगह गिर रही है, बैंक क़र्ज़ बहुत धीरे बढ़ रहा है और वेतन में ठहराव है।

वास्तव में, सभी क्षेत्रों- कृषि, उद्योग या सेवा क्षेत्र हो, सब में वेतन में कम वृद्धि हुई है। किसानों की उपज के लिए उपलब्ध कम क़ीमतों और कम सार्वजनिक व्यय की नीति ने इसे और ख़राब कर दिया है, जिसका साफ़ अर्थ है कि सरकार लोगों के हाथों में पैसा देने में विफल रही है। इसलिए, निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था में सुधार होगा या इसमें कोई ताज़गी आएगी इसकी संभावना धूमिल ही है।

नौकरियों के मोर्चे पर इसके भयावह परिणाम होंगे। पहले से ही नौकरियों की स्थिति ख़राब है और अब यह इससे भी बुरी हालत में पहुंचने को है।

बेरोज़गारी की समस्या का दूसरा और सबसे बड़ा छिपा हुआ हिस्सा निम्न रोज़गार है जिसका मतलब है कि वे लोग जो बहुत कम वेतन पर काम कर रहे हैं क्योंकि उनके लिए बेहतर रोज़गार उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि सीएमआईई के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि मुल्क में 1.13 करोड़ स्नातक(ग्रेजुएट) बेरोज़गार हैं। जो सभी स्नातकों की संख्या का 17.4 प्रतिशत हिस्सा हैं। यह सभी शैक्षिक श्रेणियों में बेरोज़गारी की उच्चतम दर में से हैं। उन्हें अपनी योग्यता के आधार पर नौकरी नहीं मिल रही है, जिसे कुछ ग़लत धारणा का साथ देने वाले लोग, श्रमिक बल में ‘कमी’ की स्थिति के रूप में वर्णित करते हैं। कुछ अनुमानों के अनुसार कम वेतन पाने वाले रोज़गार शुदा कर्मचारियों की संख्या कुल संख्या का 30 से 35 प्रतिशत है।

मोदी सरकार ने अपने पहले पांच साल विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की मुहँज़ोरी में बिता दिए, कभी तो कौशल विकास पर ज़ोर, और कभी बैंक ऋण के माध्यम से उद्यमिता के विकास पर ज़ोर दिया गया। वह सब विफल हो गया। अब, इसने अपने नए शुरू हुए पांच साल के कार्यकाल में, रेत में अपना सिर दफ़न कर दिया है, यह कहते हुए कि नौकरियों का संकट है ही नहीं। यह आने वाले महीनों में बढ़ते तीव्र संकट की तरफ़ इशारा करता है, जिसका असर राजनीति की बिसात पर भी ज़रूर पड़ेगा।

unemployment rate
Jobs Crisis
CMIE data
Women’s Unemployment
Modi government
Wage Stagnation
Jobless Youth

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

ज्ञानवापी विवाद, मोदी सरकार के 8 साल और कांग्रेस का दामन छोड़ते नेता


बाकी खबरें

  • Mothers and Fathers March
    पीपल्स डिस्पैच
    तख़्तापलट का विरोध करने वाले सूडानी युवाओं के साथ मज़बूती से खड़ा है "मदर्स एंड फ़ादर्स मार्च"
    28 Feb 2022
    पूरे सूडान से बुज़ुर्ग लोगों ने सैन्य शासन का विरोध करने वाले युवाओं के समर्थन में सड़कों पर जुलूस निकाले। इस बीच प्रतिरोधक समितियां जल्द ही देश में एक संयुक्त राजनीतिक दृष्टिकोण का ऐलान करने वाली हैं।
  • गौरव गुलमोहर
    यूपी चुनाव: क्या भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं सिटिंग विधायक?
    28 Feb 2022
    'यदि भाजपा यूपी में कम अंतर से चुनाव हारती है तो उसमें एक प्रमुख कारण काम न करने वाले सिटिंग विधायकों का टिकट न काटना होगा।'
  • manipur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मणिपुर में पहले चरण का चुनाव, 5 ज़िलों की 38 सीटों के लिए 67 फ़ीसदी से ज़्यादा मतदान
    28 Feb 2022
    मणिपुर विधानसभा के लिए आज पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। मतदान का समय केवल शाम 4 बजे तक ही था। अपराह्न तीन बजे तक औसतन 67.53 फ़ीसदी मतदान हुआ। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : फिर ज़ोर पकड़ने लगी है ‘स्थानीयता नीति’ बनाने की मांग : भाजपा ने किया विरोध
    28 Feb 2022
    हेमंत सोरेन सरकार को राज्य में होने वाली सरकारी नियुक्तियों के लिए घोषित विसंगतिपूर्ण नियोजन नीति को छात्रों-युवाओं के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा है। लेकिन मामला यहीं थम नहीं रहा है।
  • Sergey Lavrov
    भाषा
    यूक्रेन की सेना के हथियार डालने के बाद रूस ‘किसी भी क्षण’ बातचीत के लिए तैयार: लावरोव
    28 Feb 2022
    लावरोव ने यह भी कहा कि रूस के सैन्य अभियान का उद्देश्य यूक्रेन का ‘‘विसैन्यीकरण और नाजी विचारधारा से’’ मुक्त कराना है और कोई भी उस पर कब्जा नहीं करने वाला है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License