NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
शिक्षा
भारत
यूपी: फ़र्ज़ी शिक्षकों पर फिर गिरी गाज, आख़िर कौन है इस फ़र्ज़ीवाड़े का ज़िम्मेदार?
प्रदेश में फ़र्ज़ी बेसिक शिक्षकों पर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। शिक्षा परिषद के विद्यालयों में तैनात 812 शिक्षकों की सेवा समाप्त करने के साथ इनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराने के भी आदेश हुए हैं।
सोनिया यादव
03 Mar 2021
up basik shiksha

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के साथ-साथ अब शिक्षा व्यवस्था भी ‘भगवान भरोसे’ ही नज़र आ रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार में एक के बाद एक बेसिक शिक्षा विभाग में कई घोटालों का खुलासा हो रहा है। कभी भर्ती और लिखित परीक्षा में फ़र्ज़ीवाड़ा, तो कभी छुट्टी के नाम पर शिक्षकों से रिश्वत वसूली और वेतन में गड़बड़ी। लेकिन अब पानी सर से ऊपर चढ़ गया है, लंबे समय से एक के बाद एक ऐसे तमाम शिक्षक सामने आ रहे जो फ़र्ज़ी प्रमाणपत्र पर सालों से नौकरी कर रहे हैं।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में तैनात 812 शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी गई है। इसके साथ ही इन फ़र्ज़ी शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी हुए हैं। बताया जा रहा है कि इन शिक्षकों का आगरा विश्वविद्यालय की बीएड डिग्री के आधार पर चयन हुआ था, जिसे पिछले दिनों हाईकोर्ट ने फ़र्ज़ी करार दे दिया था।

दैनिक जागरण की ख़बर के मुताबिक हाईकोर्ट ने विशेष अपील किरनलता सिंह व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य मामले में 26 फरवरी को परिषदीय विद्यालयों में तैनात 814 शिक्षकों की बीएड डिग्री को फ़र्ज़ी करार दिया था। बेसिक शिक्षा परिषद सचिव प्रताप सिंह बघेल ने उसी का अनुपालन करते हुए ये आदेश जारी किया है।

क्या लिखा है इस आदेश में?

इस आदेश में कहा गया है कि दो अभ्यर्थियों को छोड़कर अन्य 812 अभ्यर्थियों की डिग्री फ़र्ज़ी होने की पुष्टि की गई है। जिलों में कार्यरत इन शिक्षकों को चिह्नित करके नियमानुसार सेवा समाप्ति और एफआईआर की कार्रवाई की जाए। साथ ही यदि इन शिक्षकों का दूसरे जिले में स्थानांतरण हो गया है तो संबंधित बीएसए को सूचित करें। 

हाईकोर्ट ने सात अभ्यर्थियों के संबंध में उपलब्ध कराए गए अभिलेखों के आधार पर यूनिवर्सिटी व राज्य को आदेश की तारीख से एक माह का समय पुनर्विचार के लिए दिया है।

इस संबंध में आदेश में लिखा है कि जिन अभ्यर्थियों के अंकपत्र में कूटरचना यानी जालसाजी की गई है, इसके संबंध में हाईकोर्ट के आदेश की तारीख से चार माह का समय निर्णय लेने के लिए दिया गया है। यदि किसी यूनिवर्सिटी की ओर से किसी अभ्यर्थी के अंकपत्र को टेंपर्ड घोषित किया जाता है तो ऐसे अभ्यर्थियों की सेवा समाप्ति यूनिवर्सिटी की ओर से पारित आदेश की तारीख से मान्य होगी। इसलिए टेंपर्ड श्रेणी के चिन्हित अभ्यर्थियों की सेवा यूनिवर्सिटी से निर्णय आने तक से चार माह तक के अधीन रखी जाएगी।

यूपी एसटीएफ का दावा हजारों की संख्या में फ़र्ज़ी शिक्षक

आपको बता दें कि बीते साल यूपी एसटीएफ ने अनामिका शुक्ला कांड के बाद  दावा किया था कि बेसिक शिक्षा विभाग में हजारों फ़र्ज़ी शिक्षक दूसरे के सर्टिफिकेट्स, मार्कशीट और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर काम रहे हैं, जिसे सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगने की खबर सामने आई थी।

इसके बाद सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार नींद से जागी और धड़ाधड़ फ़र्ज़ी शिक्षकों की खबरें सामने आने लगी। बीते जुलाई में फ़र्ज़ी शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर नौकरी करनेवाले 1427 शिक्षक सामने आए थे। जिसके बाद करीब हजार की सेवा समाप्‍त करने तो वहीं 500 के खिलाफ केस दर्ज कराए जाने की खबर आई थी। इसके अलावा यूपी सरकार ने फ़र्ज़ी शिक्षकों से 900 करोड़ रुपये की वसूली की योजना बनाई थी।

बेसिक शिक्षा महकमा अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम है!

गौरतलब है कि एसआईटी जांच में 1356 फ़र्ज़ी डिग्री वाले अभ्यर्थी चिह्नित हुए थे। इनमें से 1140 शिक्षकों के वेतन विभाग ने पहले ही रोक दिया था। बेसिक शिक्षा विभाग में फ़र्ज़ी प्रमाणपत्रों के नाम पर नौकरी हासिल करने और सत्यापन के दौरान विभागीय मिलीभगत के जरिए नौकरी पाने की हजारों शिकायतें है।

एक के बाद एक ऐसे प्रकरण सामने आ रहे हैं, जिनमें फ़र्ज़ी प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी हथिया ली गई। इनमें से चंद मामले जाति व अन्य प्रमाणपत्रों के हैं तो ज्यादातर मामलों में शैक्षिक प्रमाणपत्र फ़र्ज़ी ढंग से लगा दिए गए थे। बावजूद बेसिक शिक्षा महकमा अपनी कोई जिम्मेदारी महसूस नहीं कर रहा है। संदिग्ध किस्म के प्रमाणपत्रों की जांच कर खुद से फ़र्ज़ीवाड़ा पकड़ने की जरूरत बेसिक शिक्षा विभाग के जिला स्तर पर ही नहीं हो पा रही। यह हाल तब है, जब एक के बाद एक फ़र्ज़ीवाड़े जिले में सामने आ रहे हैं।

खस्ता शिक्षा व्यवस्था से वर्तमान ही नहीं भविष्य को भी ख़तरा!

यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी भले ही ट्विटर पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री को अपने प्रदेश के स्कूल बेहतर होने का चैलेंज देते हों लेकिन माननीय मंत्री जी बार-बार अपने ही विभाग में हो रहे घोटालों पर चुप्पी साध लेते हैं। कई जगह प्राइमरी स्कूलों की जर्जर बिल्डिंग, बरसात में छत से टपकता पानी और शिक्षकों के नाम पर खानापूर्ति अक्सर ही सवालों के घेरे में रहती है लेकिन मंत्री जी को इसेस कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसे में कहा जा सकता है कि राज्य की ऐसी खस्ता शिक्षा व्यवस्था न सिर्फ वर्तमान बल्कि भविष्य को भी खतरे में डाल रही है।

इसे भी पढ़ें: यूपी: शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला, छुट्टी के लिए टीचर्स से वसूली जाती है रिश्वत!

UP Basic Education Department
Uttar Pradesh education scam
UP Education System
CM Yogi Adityanath
Corruption in Education
BJP corruption

Related Stories


बाकी खबरें

  • Ahmed Hasan passes away
    भाषा
    उप्र विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन का निधन; योगी, अखिलेश ने दुख जताया
    19 Feb 2022
    वह पूर्व पुलिस अधिकारी थे। बाद में समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव उन्हें राजनीति में ले आये थे। हसन सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह विधान परिषद सदस्य और नेता…
  • Ravish Tiwari passes away
    भाषा
    वरिष्ठ पत्रकार रवीश तिवारी का निधन, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया शोक
    19 Feb 2022
    इंडियन एक्सप्रेस के राष्ट्रीय ब्यूरो के प्रमुख रवीश तिवारी कैंसर से पीड़ित थे और पिछले करीब दो वर्षों से इस बीमारी से जूझ रहे थे।
  • police
    नाइश हसन
    योगी की पुलिस कैसे कर रही चुनाव में ग़रीबों से वसूली: एक पड़ताल
    19 Feb 2022
    सवाल यह है कि क्या मात्र विज्ञापन या भाषण स्थितियों की असलियत बयान कर सकते हैं? हमने हालिया पुलिसिया दमन की पड़ताल करनी चाही, तो ‘अमृतकाल’ में ग़रीब बस्तियों का हाल कुछ और ही दिखा।
  • Protest in Myanmar
    लव पुरी
    कैसे सैन्य शासन के विरोध ने म्यांमार को 2021 के तख़्तापलट के बाद से बदल दिया है
    19 Feb 2022
    म्यांमार में सैन्य शासन नया नहीं है, लेकिन कुछ टिप्पणीकार बाइनरी लेंस से परे म्यांमार की स्थिति को समझने का प्रयास करते हैं।
  • AFGHAN
    क्रिस्टीन लेहनेन
    तालिबान के आने के बाद अफ़ग़ान सिनेमा का भविष्य क्या है?
    19 Feb 2022
    तीन पुरस्कार विजेता महिला निर्देशकों ने अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उद्योग से अफ़ग़ान सिनेमा को बचाने की अपील की है। आज के दौर में इन महिला फिल्मकारों का समर्थन पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।  
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License