NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
अपराध
आंदोलन
उत्पीड़न
कानून
भारत
राजनीति
सिर्फ बलरामपुर ही नहीं, हाथरस के बाद कई और दुष्कर्म, NHRC ने योगी सरकार को भेजा नोटिस
‘बेहतर कानून व्यवस्था’ और ‘न्यूनतम अपराध’ का दावा करने वाली बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार महिला-दलित सुरक्षा के मुद्दे पर नाकाम साबित होती दिखाई पड़ रही है। बलरामपुर के अलावा बीते 24 घंटों में आजमगढ़, बुलंदशहर और फतेहपुर में भी दुष्कर्म की वारदातें सामने आई हैं।
सोनिया यादव
01 Oct 2020
कार्टून क्लिक- इरफान
कार्टून क्लिक- इरफान

“हाथरस के बाद अब बलरामपुर में भी एक बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार और उत्पीड़न का घृणित अपराध हुआ है।...भाजपा सरकार बलरामपुर में हाथरस जैसी लापरवाही व लीपापोती न करे और अपराधियों पर तत्काल कार्रवाई करे।”

ये ट्वीट उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का है। हाथरस जैसी घटना ही अब प्रदेश के बलरामपुर में दोहराए जाने पर अखिलेश यादव ने पीड़िता को श्रद्धांजलि देते हुए ‘नो मोर बीजेपी’ हैशटैग के साथ पीड़िता के लिए न्याय की मांग की। हाथरस की घटना के बाद से ही ट्विटर पर ‘नो मोर बीजेपी’ ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

akhilesh yadav.JPG
बता दें कि हाथरस की ‘निर्भया’ को लेकर देशभर में उबाल अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि यूपी के ही बलरामपुर में पुलिस को एक और दलित युवती के साथ हैवानियत की शिकायत मिली है। बलरामपुर के अलावा बीते 24 घंटों में आज़मगढ़, बुलंदशहर और फतेहपुर में भी दुष्कर्म की वारदातें सामने आई हैं।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक मंगलवार, 29 सितंबर को बलरामपुर के गैसड़ी कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में 22 साल की एक दलित युवती सुबह अपने घर से किसी काम के सिलसिले में बाहर निकली थी। लेकिन जब देर शाम तक लड़की घर नहीं लौटी तो परिजनों ने बेटी तलाश की शुरू की। जिसके बाद छात्रा बदहवास एवं गंभीर हालत में रिक्शे पर सवार घर पहुंची।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक छात्रा ने परिजनों को आपबीती सुनाई और कहा कि उसे एक युवक कॉलेज ले गया था। उसके बाद वही युवक उसे बाजार और फिर अपने घर ले गया। जहां उस युवक तथा उसके चाचा ने बारी-बारी उसके साथ दुष्कर्म किया। जिससे छात्रा की हालत खराब हो गई।

परिजन पीड़िता को पहले पास के निजी अस्पताल ले गए लेकिन हालत गंभीर तथा मामला संदिग्ध होने के चलते चिकित्सक ने उसे जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। जिसके बाद रास्ते में ही पीड़िता ने दम तोड़ दिया।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह कहा जा रहा हा कि इस घटना में अभियुक्तों ने लड़की के हाथ, पैर और कमर तोड़ दिए। लेकिन फिलहाल पुलिस ने इन सभी खबरों को खारिज़ किया है।

पुलिस प्रशासन क्या कह रहा है?

बलरामपुर के जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में आरोपी चाचा-भतीजे के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और दोनों फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में हैं।

balrampur police.JPG
इस संबंध में बलरामपुर पुलिस ने ट्विटर पर कई वीडियो जारी कर बताया, "लड़की के परिजन ने अपनी तहरीर में दो लड़कों को नामज़द किया है और उनके बारे में कहा है कि उन लड़कों ने किसी डॉक्टर के पास ले जाकर हमारी लड़की का इलाज कराया और लड़की के साथ बलात्कार किया और जब लड़की की हालत ख़राब हुई तो उसे अस्पताल न ले जाकर घर पर भेज दिया।"

पुलिस ने इस प्रकरण में दो अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है। पुलिस का कहना है कि ये नामजद अभियुक्त हैं और आगे छानबीन करके अन्य जो भी अभियुक्त हैं उनको गिरफ़्तार करेगी।

पुलिस का हाथ, पैर व कमर तोड़ने वाली बात से इंकार

ट्विटर पर पत्रकार साहिल मुरली ने बताया कि हाथरस के बाद यूपी के बलरामपुर में एक और दलित लड़की का गैंगरेप और मर्डर हुआ है। जो उससे भी ज़्यादा भयावह है। रेप के बाद लड़की के पैर, कमर को कुचल दिया गया। इसके बाद उसे ज़हर भरा इंजेक्शन दिया गया। पुलिस का कहना है कि दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है।

sahil murli.JPG
इस ट्वीट का खंडन करते हुए बलरामपुर पुलिस ने लिखा कि इस मामले में "हाथ, पैर व कमर तोड़ने वाली बात असत्य है।"

balrampur police 2JPG.JPG
बलरामपुर के अलावा बीते 24 घंटों में उत्तर प्रदेश के ही आजमगढ़ के जीयनपुर में आठ साल की बच्ची, बुलंदशहर में 14 साल की नाबालिग लड़की और फतेहपुर के ललौली में सात साल की मासूम के साथ दुष्कर्म की खबरें सामने आई हैं।

बता दें कि इससे पहले हाथरस में 14 सितंबर को एक दलित लड़की कथित गैंगरेप का शिकार हुई जिसके बाद मंगलवार, 29 सितंबर को दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल में पीड़िता ने दम तोड़ दिया और उसी रात पुलिस ने आनन-फानन में पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद पुलिस प्रशासन और योगी सरकार की चौतरफा आलोचना हुई। 30 सितंबर को देशभर में पीड़िता के न्याय के लिए जोरदार प्रदर्शन हुए, मशाल जुलूस निकाले गए।

Image removed.
मानवाधिकार आयोग ने भेजा नोटिस, विपक्ष ने सीएम योगी से मांगा इस्तीफ़ा

बाजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार भले ही ‘बेहतर कानून व्यवस्था’ और ‘न्यूनतन अपराध’ का दावा कर रही हो लेकिन प्रदेश में एक के बाद एक लगातार दुष्कर्म की घटनाओं से ‘रामराज’ पोल खुलती नज़र आ रही है। कानून व्यवस्था के मामले को लेकर विपक्ष सरकार हमलावर है तो वहीं हाथरस में ‘गैंगरेप’ मामले और आधी रात में अंतिम संस्कार कराए जाने को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से लेकर महिला आयोग ने योगी सरकार को नोटिस जारी किया है।

nhrc.JPG
अपने नोटिस में आयोग ने कहा है कि "इस घटना ने राज्य की क़ानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। राज्य में इस तरह की घटनाएं हुई हैं जिसमें ऊंची जाति के लोगों द्वारा दलितों के साथ भेदभाव किया गया है, उनका उत्पीड़न किया गया है। पुलिस और प्रशासन के ख़िलाफ़ भी कई आरोप लगाए गए हैं। ये मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है।"

मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस से चार सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए कहा है। साथ ही प्रदेश के डीजीपी से परिवार को सुरक्षा देने के लिए भी कहा गया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर लिखा है, "यूपी गैंग रेप ट्रेजडी में, रात ढाई बजे पुलिसकर्मियों द्वारा अंतिम संस्कार किया गया, परिवार को इससे बाहर रखा गया। राष्ट्रीय महिला आयोग इसकी निंदा करता है। आख़िर मरघट पर परिजनों को क्यों नहीं आने दिया गया? आख़िर रात में क्यों किया गया?"

rekha sharma.JPG
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस घटना की निंदा की है और प्रदेश पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है, "भारत सबका देश है। यहाँ सबको इज्जत की ज़िंदगी जीने का अधिकार है। संविधान ने हमें ये अधिकार दिया है।"

हाथरस गैंगरेप पीड़िता के शव को आधी रात जलाए जाने के मामले में सोनिया गांधी ने न्याय की मांग की है और कहा है कि "हाथरस की निर्भया की मृत्यु नहीं हुई है, उसे मारा गया है।"

sonia gandhi.JPG
उन्होंने सरकार से सवाल किया है "मरने के बाद भी इंसान की एक गरिमा होती है। हमारा हिन्दू धर्म उसके बारे में भी कहता है। मगर उस बच्ची को अनाथों की तरह पुलिस की ताक़त के ज़ोर से जला दिया गया।"

बलरामपुर की घटना पर आम आदमी पार्टी के नेता और सांसद संजय सिंह ने ट्वीट किया, "बलरामपुर में दिल दहला देने वाली घटना। एक दलित की बेटी हैवानों की दरिंदगी का शिकार हो गई. योगी राज में बेटी होना अभिशाप बन गया है। बेटियों की रक्षा नहीं कर सकते तो सत्ता छोड़ दो योगी जी।"

आखिर चुप क्यों हैं सत्तापक्ष के नेता और सांसद?

बता दें कि तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखने वाली केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी या राज्य महिला एवं बाल विकास मंत्री स्वाति सिंह का इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है और न ही उनके ट्विटर हैंडल से कुछ ट्वीट ही हुआ है। अनुराग कश्यप के मामले में संसद में दहाड़ने वाले सांसद रवि किशन या धरने पर बैठीं रूपा गांगुली ने भी चुप्पी साध रखी है।

हालांकि इकनॉमिक्स टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में स्मृति ईरानी ने इतना जरूर कहा है कि महिलाओं के मुद्दे राजनीतिक मुद्दे नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दे हैं। लेकिन शायद स्मृति ईरानी ये भूल गई हैं कि 2017 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले उनकी पार्टी और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही तब की समाजवादी पार्टी के खिलाफ महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था के नाम पर वोट मांगे थे।

Capture_27.JPG

यूपी में महिलाओं-दलितों के खिलाफ़ अपराध के सर्वाधिक मामले

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक साल 2019 में उत्तर प्रदेश में महिलाओं एवं दलितों के खिलाफ अपराध के सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। एनसीआरबी की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में साल दर साल दलितों और महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं।

भारत में 2019 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 405,861 मामले दर्ज हुए, जिसमें से 59,853 मामले अकेले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए थे। यह संख्या देश में कुल मामलों का 14.7 फीसदी है, जो कि किसी भी राज्य की तुलना में सर्वाधिक है। ध्यान देने वाली बात ये है कि ये उन अपराधों पर तैयार की गई रिपोर्ट है जो थानों में दर्ज होते हैं। इन रिपोर्ट से कई ऐसे केस रह जाते हैं जिनकी थाने में कभी शिकायत ही दर्ज नहीं हो सकी।

एनसीआरबी देश के गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है। उसके अनुसार, यूपी में दलितों के खिलाफ अपराधों में वर्ष 2014 से 2018 तक 47 प्रतिशत की भारी बढ़ोत्तरी हुई है। इसके बाद गुजरात और हरियाणा हैं, जहां क्रमश: 26 और 15 फीसदी अपराध बढ़े हैं।

‘रामराज’ में कानून व्यवस्था भगवान भरोसे!

गौरतलब है कि इस साल फ़रवरी में विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव देते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि इस देश में रामराज ही चाहिए, समाजवाद नहीं चाहिए। हमारी सरकार रामराज की अवधारणा को ज़मीन पर उतारने को प्रतिबद्ध है।

हालांकि जानकारों का कहना है कि इस वक्त राज्य की कानून व्यवस्था ‘भगवान भरोसे’ ही नज़र आती है। सरकार और उसके आंकड़े कुछ भी कहें, लेकिन प्रदेश में अपराध की स्थिति किसी से छुपी नहीं है।

UttarPradesh
Yogi Adityanath
women safety
crimes against women
crime in up
Dalit atrocities
UP Law And Order
AKHILESH YADAV
UP police
UP Hathras GangRape
Balrampur rape case

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

सवर्णों के साथ मिलकर मलाई खाने की चाहत बहुजनों की राजनीति को खत्म कर देगी

ग्राउंड रिपोर्ट: ‘पापा टॉफी लेकर आएंगे......’ लखनऊ के सीवर लाइन में जान गँवाने वालों के परिवार की कहानी

न्याय के लिए दलित महिलाओं ने खटखटाया राजधानी का दरवाज़ा

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप

यूपी चुनाव परिणाम: क्षेत्रीय OBC नेताओं पर भारी पड़ता केंद्रीय ओबीसी नेता? 

यूपी चुनाव में दलित-पिछड़ों की ‘घर वापसी’, क्या भाजपा को देगी झटका?

यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित


बाकी खबरें

  • Sudan
    पवन कुलकर्णी
    कड़ी कार्रवाई के बावजूद सूडान में सैन्य तख़्तापलट का विरोध जारी
    18 Jan 2022
    सुरक्षा बलों की ओर से बढ़ती हिंसा के बावजूद अमेरिका और उसके क्षेत्रीय और पश्चिमी सहयोगियों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र भी बातचीत का आह्वान करते रहे हैं। हालांकि, सड़कों पर "कोई बातचीत नहीं, कोई समझौता…
  • CSTO
    एम. के. भद्रकुमार
    कज़ाख़िस्तान में पूरा हुआ CSTO का मिशन 
    18 Jan 2022
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बुधवार को क्रेमलिन में रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु के साथ कज़ाख़िस्तान मिशन के बारे में कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीट ऑर्गनाइजेशन की “वर्किंग मीटिंग” के बाद दी गई चेतावनी…
  • election rally
    रवि शंकर दुबे
    क्या सिर्फ़ विपक्षियों के लिए हैं कोरोना गाइडलाइन? बीजेपी के जुलूस चुनाव आयोग की नज़रो से दूर क्यों?
    18 Jan 2022
    कोरोना गाइडलाइंस के परवाह न करते हुए हर राजनीतिक दल अपनी-अपनी तरह से प्रचार में जुटे हैं, ऐसे में विपक्षी पार्टियों पर कई मामले दर्ज किए जा चुके हैं लेकिन बीजेपी के चुनावी जुलूसों पर अब भी कोई बड़ी…
  • Rohit vemula
    फ़र्रह शकेब
    स्मृति शेष: रोहित वेमूला की “संस्थागत हत्या” के 6 वर्ष बाद क्या कुछ बदला है
    18 Jan 2022
    दलित उत्पीड़न की घटनायें हमारे सामान्य जीवन में इतनी सामान्य हो गयी हैं कि हम और हमारी सामूहिक चेतना इसकी आदी हो चुकी है। लेकिन इन्हीं के दरमियान बीच-बीच में बज़ाहिर कुछ सामान्य सी घटनाओं के प्रतिरोध…
  • bank
    प्रभात पटनायक
    पूंजीवाद के अंतर्गत वित्तीय बाज़ारों के लिए बैंक का निजीकरण हितकर नहीं
    18 Jan 2022
    बैंकों का सरकारी स्वामित्व न केवल संस्थागत ऋण की व्यापक पहुंच प्रदान करता है बल्कि पूंजीवाद की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License