NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
घटना-दुर्घटना
चुनाव 2022
नज़रिया
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
यूपी चुनाव चौथा चरण: लखीमपुर हिंसा और गोवंश से फ़सलों की तबाही जैसे मुद्दे प्रमुख
उत्तर प्रदेश में तीन चरणों के चुनावों के बाद अब चौथे चरण के लिए जंग शुरू हो गई है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाद अब अवध की चुनावी परिक्रमा लगातार जारी है। लेकिन चौथे चरण में अवध की वो सीटे भी हैं जहां लखीमपुर हिंसा और गोवंशों से हुई तबाही का मुद्दा भी हावी हो सकता है।
रवि शंकर दुबे
21 Feb 2022
यूपी चुनाव चौथा चरण:  लखीमपुर हिंसा और गोवंश से फ़सलों की तबाही जैसे मुद्दे प्रमुख

यूपी की सत्ता में अवध की अहमियत राजधानी लखनऊ, राम मंदिर के मुद्दे के अलावा सीटों के गणित से भी बढ़ जाती है। अवध में कुल 21 जिले हैं, जिसमें कुल 118 सीट आती है। हालांकि चौथे चरण में कुल 9 जिलों में मतदान होगा, जिसमें अवध के 7 जिले आते हैं। 118 सीटों वाले इस इलाके में पिछले 2 विधानसभा के नतीजे बताते हैं कि यहां चुनाव में हवा के रुख का काफी असर रहता है और अवध के आशीर्वाद से सरकार बन जाती है।

पिछला रिकॉर्ड दोहराएगी भाजपा?

2017 के चुनावों में भाजपा को 97 सीटें मिली थीं, 2012 में बीजेपी को इसी क्षेत्र में 10 सीटें मिली थीं। मतलब 2017 के चुनावों में बीजेपी ने 87 सीटें ज्यादा जीतीं। वहीं समाजवादी पार्टी को 2012 के तुलना में 2017 में घाटा हुआ। 2012 में समाजवादी पार्टी को 90 सीटें मिली थीं, जो 2017 में घटकर 12 रह गईं। यूपी चुनाव में बीएसपी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि अवध क्षेत्र में वो 10 से 12 सीटों पर दखल रखती है। 2012 में बीएसपी को यहां 10 सीटें मिलीं जो 2017 में घटकर 6 रह गईं लेकिन उसका दखल बना रहा।

चौथा चरण: 9 ज़िले, 59 सीटें  

  • पीलीभीत ज़िला- पीलीभीत, बरखेड़ा, पूरनपुर (एससी), बीसलपुर
  • लखीमपुर खीरी ज़िला- पलिया, निघासन, गोला गोकर्णनाथ, श्रीनगर (एससी), धौरहरा, लखीमपुर, कसता (एससी), मोहम्मदी
  • सीतापुर ज़िला- महोली, सीतापुर, हरगांव (एससी), लहरपुर, बिसवां, सेवता, महमूदाबाद, सिधौली (एससी), मिश्रिख (एससी)
  • हरदोई ज़िला- सवायजपुर, शाहबाद, हरदोई, गोपामऊ (एससी), सान्डी (एससी), बिलग्राम-मल्लांवान, बालमऊ (एससी), संडीला
  • लखनऊ ज़िला- मलिहाबाद (एससी), बख्शी का तालाब, सरोजिनी नगर, लखनऊ पश्चिम, लखनऊ उत्तर, लखनऊ पूर्व, लखनऊ सेंट्रल, लखनऊ छावनी, मोहनलालगंज (एससी)
  • उन्नाव ज़िला- बांगरमऊ, सफीपुर (एससी), मोहान (एससी), उन्नाव, भगवंतनगर, पुरवा
  • रायबरेली ज़िला- बछरावां (एससी), हरचंदपुर, रायबरेली, सरेनी, ऊंचाहार, सलोन
  • फतेहपुर ज़िला- जहानाबाद, बिन्दकी, फतेहपुर, आयहशाह, हुसैनगंज, खागा (एससी)
  • बांदा ज़िला- तिन्दवारी, बबेरू, नरैनी (एससी), बांदा

केंद्र सरकार के मंत्रियों की साख दांव पर

चौथे चरण की 59 सीटों पर 624 उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां सबसे बड़ी बात ये है कि उम्मीदवारों के साथ-साथ केंद्र सरकार के मंत्रियों की साख भी दांव पर लगी है। क्योंकि चौथे चरण में जिन 9 ज़िलों में वोट डाल जाएंगे उसमें मोदी सरकार के चार मंत्रियों के संसदीय क्षेत्र में शामिल हैं। पहला नाम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह है.... जो लखनऊ से सांसद हैं। दूसरा नाम स्मृति ईरानी है... जो अमेठी सांसद हैं। तीसरा नाम कौशल किशोर का है... जो मोहनलाल गंज लोकसभा से सांसद हैं। वहीं चौथा नाम अजय मिश्र टेनी का है... जो सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री है साथ ही लखीमपुर से सांसद भी हैं।

सिर्फ इन चारों मंत्रियों के संसदीय क्षेत्रों की बात करें तो 21 विधानसभा सीटें आती हैं। यही कारण है कि चौथा चरण इन चारों के लिए भी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। वहीं दूसरे भले ही सबसे ज्यादा ज़ुबानी जंग अखिलेश यादव और भाजपा के बीच छिड़ी हो लेकिन बसपा को भी नज़अंदाज़ नहीं किया जा सकता है। क्योंकि अवध क्षेत्र में बसपा का बड़ा वोट हैं जो इस बार साइलेंट माना जा रहा है।

जातीय समीकरण: अनुसूचित जाति का वोट अहम

चौथे चरण में जिन इलाकों में मतदान होगा, वहां आबादी के लिहाज से अनुसूचित जाति (एससी) वोट काफी अहम माना जा रहा है, अवध क्षेत्र की बात करें तो सीतापुर में सबसे ज्यादा 32 फीसदी एससी मतदाता हैं। वहीं हरदोई, उन्नाव, रायबरेली में 30 फीसदी के करीब वोटर हैं। लखनऊ में सबसे कम 21 फीसदी एससी मतदाता हैं। यानी चौथे चरण में अवध के आधे से ज्यादा जिलों में अनुसूचित जाति आबादी 30 फीसदी से ज्यादा है।

जाटव-गैर जाटव वोट की लड़ाई?

अवध में एससी आबादी में बड़ी संख्या गैर जाटव वोट की है और साल 2017 के नतीजे बताते हैं कि अनुसूचित जाति वोट भले ही बसपा के पास हों, लेकिन गैर जाटव वोट बंट चुका है। 2017 चुनावों को देखें तो सबसे ज्यादा 43 फीसदी गैर जाटव वोट समाजवादी पार्टी को मिले हैं। लेकिन 31 फीसदी वोटों के साथ बीजेपी ज्यादा पीछे नहीं है। बीएसपी को गैर जाटव वोट 10 फीसदी के आस पास ही मिले हैं लेकिन जाटव वोट 86 फीसद मिले हैं। इसमें पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, फतेहपुर और बांदा जिले में शामिल हैं।

क्या हैं चौथे चरण के मुद्दे

चौथे चरण की 59 सीटों में लखीमपुर खीरी भी शामिल हैं, जो पिछले दिनों लखीमपुर हिंसा के लिए चर्चा का विषय बना रहा। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी का बेटा और हिंसा मामले में आरोपी आशीष मिश्र पर कई किसानों को कुचलकर हत्या करने का आरोप लगा और उसे जेल भेजा गया। हालांकि पिछले दिनों आरोपी आशीष मिश्रा को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया जिसके बाद से ही राजनीतिक पारा बेहद गर्म है। वहीं दूसरी ओर आरोपी की रिहाई के खिलाफ पीड़ित किसानों के परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। इसके अलावा लगातार मांग के बाद भी आरोपी के पिता अजय मिश्र टेनी अभी तक बर्खास्त नहीं किया गया है। यानी अगर लखीमपुर और आसपास के क्षेत्रों को विपक्ष की बात समझ में आ गई तो भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

गोवंश चर जाएगा भाजपा का वोट बैंक?

लखीमपुर खीरी के अलावा चौथे चरण की 59 में 50 सीटों पर सांड के कहर का असर देखने को मिल सकता है। ऐसा योगी सरकार में मिले गोवंश को संरक्षण में इनकी तादाद बढ़ने से हुआ है। गोवंशों द्वारा खेतों की बर्बादी और लोगों की जा रही जान का मुद्दा भांपते हुए सपा और कांग्रेस ने हमले में मरने वालों को 5-5 लाख मुआवजा देने का ऐलान कर दिया है। वैसे तो गोवंशों से किसान साल 2017 के बाद से ही परेशान हैं लेकिन 2022 विधानसभा चुनाव की सभाओं में भी इसका खूब असर देखने को मिला:

  • 25 दिसंबर 2021 में आगरा के गांव बटेश्वर में CM योगी की विजिट थी। ठीक उससे पहले सभास्थल में सांड घुस आया था। अफरा-तफरी मच गई थी।
  • 04 फरवरी 2022 कानपुर में जनसभा में उद्योग मंत्री सतीश महाना मौजूद थे। अचानक सांड आने से भगदड़ मच गई थी। बाद में उन्होंने कहा चलो नंदी के दर्शन हुए।
  • 17 फरवरी 2022 फिरोजाबाद में सपा की जनसभा के दौरान सांड घुस आए थे। अखिलेश यादव भाषण दे रहे थे। भगदड़ जैसे हालात बन गए थे।

गोवंश का कहां कितना कहर?

पिछले 10 सालों का आंकड़ा अगर देखें तो 20वीं पशुगणना के अनुसार आवारा पशुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। साल 2012 में जहां यूपी के अंदर 10 लाख से ज्यादा आवारा पशु थे, वहीं साल 2019 में इनकी संख्या बढ़कर 11 लाख 84 हज़ार पार पहुंच गई थी। वहीं शहरों की बात करें चित्रकूट ज़िला इस मामले में टॉप पर है।

अवध में चौंकाने वाले आंकड़े

उत्तर प्रदेश में अवध वो क्षेत्र है जहां रसूखदार नेताओं का घर और गढ़ माना जाता है। फिर चाहे लखनऊ हो या रायबरेली... पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर कांग्रेस के बड़े-बड़े दिग्गज इन्हीं क्षेत्रों से संसदीय और विधानसभा सीट जीते हैं। अब ऐसे में एडीआर की एक रिपोर्ट ने चौथे चरण की 59 सीटों पर एक सर्वे किया है, जिसमें चौंका देने वाले आंकड़े सामने आए हैं:

सबसे ज्यादा सुरक्षित सीटें

पूरनपुर, श्रीनगर, कस्ता, हरगांव, सिधौली, मिश्रिख, गोपामऊ, सफीपुर, सांडी, मोहान, मलिहाबाद, मोहनलालगंज, बछरावां और नरैनी।

कितने पढ़े लिखे हैं नेता

  • 201 यानी 32 फीसदी, 5वीं से 12वीं के बीच पढ़े लिखे
  • 375 यानी 60 फीसदी, स्नातक या इससे अधिक पढ़े लिखे
  • 09 उम्मीदवार असाक्षर
  • 30 उम्मीदवार सिर्फ साक्षर
  • 91 यानी 15 फीसदी महिला उम्मीदवार मैदान में

कितने अमीर हैं नेता

  • 621 में 231 यानी 37 फीसदी करोड़पति
  • लखनऊ पश्चिम से आप उम्मीदवार राजीव बक्शी-56 करोड़
  • सीतापुर के महोली से सपा प्रत्याशी अनूप कुमार गुप्ता-52 करोड़
  • हरदोई से बसपा प्रत्याशी शोभित पाठक-34 करोड़

किस पार्टी में कितने करोड़पति प्रत्याशी

  • भाजपा- 57 में 50 यानी 88 फीसदी
  • सपा- 57 में 48 यानी 84 फीसदी
  • बसपा- 59 में 44 यानी 75 फीसदी
  • कांग्रेस- 58 में 28 यानी 48 फीसदी
  • आप- 45 में 16 यानी 36 फीसदी

किस पर कितने मामले

  • लखनऊ मध्य-सपा-रविदास मेहरोत्रा-22 मामले
  • हरदोई, बालामऊ-कांग्रेस-सुरेंद्र कुमार -09
  • लखनऊ,सरोजिनी नगर-बसपा-जलीश खान-05

किस पार्टी में कितने आपराधिक मामले

  • सपा- 57 में से 30 यानी 53 फीसदी
  • कांग्रेस- 58 में से 31 यानी 53 फीसदी
  • बसपा- 59 में से 26 यानी 44 फीसदी
  • भाजपा- 57 में से 23 यानी 40 फीसदी
  • आप- 45 में 11 यानी 24 फीसदी

इन तमाम आंकड़ों और समीकरणों के बीच 23 फरवरी को मतदान किए जाएंगे, अब लखीमपुर और गोवंशों से खेतों की बर्बादी समेत कितने मुद्दे चुनावों पर हावी होते हैं इसका पता तो 10 मार्च को ही चलेगा।

UP ELections 2022
LakhimpurKheri
Ajay Mishra Teni
cows

Related Stories

यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

जनता की उम्मीदों पर कितना खरा होगा अखिलेश का ‘वचन’

क्या चोर रास्ते से फिर लाए जाएंगे कृषि क़ानून!

लड़ाई अंधेरे से, लेकिन उजाला से वास्ता नहीं: रामराज वाली सरकार की किसानों के प्रति उदासीनता

किसान आंदोलन का अब तक का हासिल

अजय मिश्रा टेनी भारत सरकार के मंत्रिपरिषद का हिस्सा नहीं रह सकते : एसकेएम

लखीमपुर हत्याकांड: जब तक मंत्री की बर्ख़ास्तगी नहीं तब तक आंदोलन चलता रहेगा

गरमाने लगा बनारस: किसान आंदोलन के समर्थक छात्रों के खिलाफ FIR, सिंधोरा थाने पर प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    पाकिस्तानी क्रिकेटर हसन पर हमले से भारत के लिए सबक
    12 Nov 2021
    वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा आज चर्चा कर रहे हैं T20 वर्ल्ड कप के बारे में, हार की वजह सिर्फ एक खिलाड़ी क्यों? पहले भारतीय खिलाड़ी मोहम्मद शमी, अब पाकिस्तानी खिलाड़ी हसन अली, हार के बाद इन दोनों…
  • Bihar: Minor girl gangraped, one accused in custody
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः नाबालिग लड़की से गैंगरेप, एक आरोपी हिरासत में
    12 Nov 2021
    नालंदा के हिलसा के एसडीपीओ ने न्यूज़क्लिक को बताया कि पीड़िता की मां ने घटना के संबंध में केस दर्ज कराया है। पीड़िता के पुरूष-मित्र को हिरासत में ले लिया गया है, जबकि अन्य दो आरोपियों की तलाश जारी है।
  • Central TUs
    रौनक छाबड़ा
    केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने बजट सत्र के दौरान बेरोज़गारी, मूल्य वृद्धि के ख़िलाफ़ 2-दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है
    12 Nov 2021
    सीटीयू के नेतृत्व की ओर से केंद्र सरकार द्वारा “लोगों के मानव अस्तित्व को बचाए रखने के अधिकार को कमज़ोर करने” के खिलाफ निंदा प्रस्ताव को अपनाते हुए अपनी दस मांगों को पेश किया गया है।
  • ICF
    शशि देशपांडे, गीता हरिहरन
    "लोकतंत्र यानी संवाद, बहस और चर्चा..."
    12 Nov 2021
    लोगों को विभाजनकारी विचारधारा को स्वीकार करने के लिए बरगलाया गया है।
  • Bihar Poisonous Liquor Case
    अनिल अंशुमन
    बिहार ज़हरीली शराब कांड: नहीं थम रहा मौत का सिलसिला, 16 नवंबर को समीक्षा करेगी सरकार
    12 Nov 2021
    ‘ताला लागल बा, पाला खुलल बा’ की तर्ज़ पर जारी है शराबबंदी: भाकपा माले ने विपक्षी महागठबंधन से एकजुट होकर राज्य सरकार को घेरने का किया आह्वान।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License