NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
अपराध
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
यूपी: बेहतर कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर उठते सवाल!, दलित-नाबालिग बहनों का शव तालाब में मिला
परिवार वालों के मुताबिक लड़कियों को रेप के बाद धारदार हथियार से मारा गया है। इस घटना के बाद एक बार फिर यूपी में योगी सरकार के ‘रामराज’ और दलितों पर अत्याचार के बीच कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
सोनिया यादव
18 Nov 2020
Image Courtesy:  Amar Ujala
Image Courtesy: Amar Ujala

उत्तर प्रदेश में दलित नाबालिग बच्चियों के खिलाफ अपराध की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। पहले हाथरस फिर बाराबंकी और अब फतेहपुर से दो दलित नाबालिग बहनों के साथ कथित दुष्कर्म और निर्मम हत्या का मामला सामने आया है। परिजनों का कहना है कि दोनों लड़कियों की आंखें फोड़ दी गई हैं, सिर पर वार किए गए हैं और एक कान भी काट दिया गया है। परिवार वालों के मुताबिक लड़कियों को रेप के बाद धारदार हथियार से मारा गया है।

हालांकि पुलिस का कहना है कि दोनों की मौत तालाब में डूबने से हुई है। फिलहाल, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है, लेकिन इस घटना के बाद एक बार फिर यूपी में योगी सरकार के ‘रामराज’ और दलितों पर अत्याचार के बीच कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक घटना असोथर थाना क्षेत्र के गांव छिछनि की है। यहां सोमवार 16 नवंबर की दोपहर दो सगी बहनें चने का साग तोड़ने के लिए घर से निकली थीं। दोनों जब शाम तक घर नहीं लौटीं तो परिवार वालों ने तलाश शुरू कर दी। जिसके बाद जंगल से वापस आ रहे कुछ गांव वालों को दोनों बहनों की लाशें गांव के पास वाले तलाब में मिलीं। बड़ी बहन की उम्र 11 साल और छोटी बहन सात-आठ साल बताई जा रही है।

पीड़ित परिजनों ने मीडिया से बातचीत में कहा, “दोनों बहनों के हाथ पुआल से बंधे थे। सिर और कान पर किसी धारदार हथियार से चोट के निशान थे। दोनों बच्चियों की एक-एक आंख भी फोड़ दी गई थी।”

कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौके पर मौजूद लड़कियों के चाचा ने शव देखने के बाद रेप और हत्या की आशंका जताई तो पुलिस उन पर भड़क गई। उनकी बातों का दबाने का प्रयास किया। जब चाचा नहीं माने तो पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर थाने लेकर चली गई। इसके बाद परिवारवालों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया तो पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।

गांव वालों के मुताबिक बच्चियों के पिता मुंबई में मजदूरी करते हैं। पीड़ित परिवार में कुल पांच बच्चे थे, जिसमें से दो बच्चे अब नहीं रहे। परिवार के लोग इस घटने के बाद सदमे में हैं और दोनों बहनों के लिए इंसाफ की मांग कर रहे हैं।

Image Credit- local media

पुलिस का क्या कहना है?

पुलिस अधीक्षक प्रशान्त वर्मा के मुताबिक बच्चियां तलाब में सिंघाड़ा तोड़ने के लिए उतरी थीं लेकिन गहरे पानी में चले जाने के कारण उनकी मौत हो गई। फिलहाल रेप की कोई बात सामने नहीं आई है।

थाना असोथर अन्तर्गत ग्राम छिछनी में घटित घटना के सम्बंध में पुलिस अधीक्षक द्वारा दी गयी वीडियो बाईट। @Uppolice pic.twitter.com/HYsg1PAofY

— FATEHPUR POLICE (@fatehpurpolice) November 16, 2020

मंगलवार 17 नवंबर को भी एसपी प्रशांत वर्मा ने एक वीडियो जारी कर कहा, “सोशल मीडिया पर चल रही बच्चियों के हाथ पैर बंधे होने और आंखें फोड़ देने की बात पूरी तरह से गलत है। प्रथम दृष्टया डूबने से हुई मौत का मामला है। लेकिन फिर भी पैनल के द्वारा पोस्टमार्टम किया जा रहा है। जिसमें सारे तथ्य साफ हो जाएंगे। पुलिस इस मामले में विधिक कार्रवाई करेगी।”

थाना असोथर क्षेत्रान्तर्गत ग्राम छिछनी में हुई घटना के संबंध में सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भ्रामक खबर /अफवाह के संबंध में पुलिस अधीक्षक फ़तेहपुर द्वारा दी गयी बाइट।@uppolice @igrangealld @ADGZonPrayagraj pic.twitter.com/3wQSsBLYgt

— FATEHPUR POLICE (@fatehpurpolice) November 17, 2020

हालांकि पुलिस जब सूचना पर गांव पहुंची तो उसे काफी विरोध का सामना करना पड़ा। गांव के लोगों का कहना है कि पुलिस रात में ही दोनों शवों को ले जाना चाहती थी। गांववालों के विरोध के बाद पुलिस की रात गांव में ही गुजरी। सीओ अनिल कुमार के साथ काफी फोर्स गांव में मौजूद रही।

विपक्ष का सरकार पर निशाना

इस घटना के बाद महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार एक बार फिर से विपक्ष के निशाने पर आ गई है। ट्विटर पर लोग इस घटना को शेयर कर रहे हैं और यूपी पुलिस व यूपी सरकार से सवाल पूछ रहे हैं।

समाजवादी पार्टी ने ट्वीट कर कहा, “फतेहपुर में 2 सगी बहनों से रेप की आशंका के साथ उनकी निर्मम हत्या कर शव तालाब में फेंकने की नृशंस घटना ने एक बार फिर यूपी को दहला दिया है! बीजेपी राज में बेटियां कहीं भी सुरक्षित नहीं रह गई हैं! शोकाकुल परिवार से गहन संवेदना, शीघ्र हो न्याय। दरिंदों को मिले महादंड, बेटियों को सुरक्षा।”

फतेहपुर में 2 सगी बहनों से रेप की आशंका के साथ उनकी निर्मम हत्या कर शव तालाब में फेंकने की नृशंस घटना ने एक बार फिर यूपी को दहला दिया है!
BJP राज में बेटियां कहीं भी सुरक्षित नहीं रह गई हैं!शोकाकुल परिवार से गहन संवेदना, शीघ्र हो न्याय।दरिंदों को मिले महादंड, बेटियों को सुरक्षा। pic.twitter.com/rmp8h0kntO

— Samajwadi Party (@samajwadiparty) November 17, 2020

पूर्व राज्य मंत्री और सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आईपी सिंह ने अपने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “रेप प्रदेश में यूपी में गैंगरेप से हाहाकार एक बाद एक जिले में रेप के बाद हत्याओं का दौर बढ़ता जा रहा है कल संतकबीरनगर,आज हाथरस और फतेहपुर में गैंगरेप बाद दो सगी बहनों की हत्या कर दी गई सीएम अपने गृह राज्य उत्तराखंड के दौरे पर है जोगी की आत्मनिर्भर पुलिस आत्महत्या बता देगी।”

रेप प्रदेश में यूपी में गैंगरेप से हाहाकार एक बाद एक जिले में रेप के बाद हत्याओं का दौर बढ़ता जा रहा है कल संतकबीरनगर,आज हाथरस और फतेहपुर में गैंगरेप बाद दो सगी बहनों की हत्या कर दी गई सीएम अपने गृह राज्य उत्तराखंड के दौरे पर है जोगी की आत्मनिर्भर पुलिस आत्महत्या बता देगी।

— I.P. Singh (@IPSinghSp) November 16, 2020

वहीं इस मामले में कांग्रेस ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश को बेटियों के लिए सबसे असुरक्षित जगह बताया।

प्रदेश में चलाया जा रहा अपराधियों को शक्ति देने वाला मिशन पूरे चरम पर है। बच्चियों के साथ दरिंदगी की घटनाओं की बाढ़ आ चुकी है। अगर अपराधियों को बचाया न जाता तो शायद आज प्रदेश की ये हालत ना होती। बेटियों के लिए सबसे असुरक्षित बन चुका है उत्तर प्रदेश।https://t.co/w2f4whWcb7

— UP East Congress (@INCUPEast) November 17, 2020

कांग्रेस नेता तनुज पुनिया ने जंगलराज हैशटैग का इसेतमाल करते हुए ट्वीट किया कि उत्तर प्रदेश में बच्चियों के साथ दरिंदगी की घटनाओं की बाढ़ आ चुकी है। बेटियों के लिए सबसे असुरक्षित प्रदेश बन चुका है।”

उत्तर प्रदेश में बच्चियों के साथ दरिंदगी की घटनाओं की बाढ़ आ चुकी है। बेटियों के लिए सबसे असुरक्षित प्रदेश बन चुका है।
फतेहपुर में 02 दलित बहनों की निर्मम हत्या कर शव तलाब में फेंका गया #जंगलराज #यूपीमें_जंगलराज_कायम#यूपी_की_उम्मीद_अब_सिर्फ_कांग्रेस @INCIndia @INCUttarPradesh pic.twitter.com/n3kUDbdzBL

— Tanuj Punia (@punia_tanuj) November 17, 2020

इसे पढ़ें : सिर्फ बलरामपुर ही नहीं, हाथरस के बाद कई और दुष्कर्म, NHRC ने योगी सरकार को भेजा नोटिस  

दलितों के ख़िलाफ़ हिंसा

गौरतलब है प्रदेश में महिलाओं-दलितों की सुरक्षा को लेकर सत्ताधारी पार्टी के तमाम दावे हक़ीक़त से कोसों दूर नज़र आते हैं। बीते दिनों उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 साल की एक दलित युवती के साथ कथित गैंगरेप और हत्या का मामला सामने आया। आनन-फानन में पुलिस ने शव का अंतिम संस्कार तक दिया। जिसके बाद हाईकोर्ट ने शासन-प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा था कि क्या पीड़िता किसी रसूखदार की बेटी होती, तो उसके साथ ऐसा ही किया जाता। 

इस घटना के बाद एक बार फिर दलितों के शोषण-उत्पीड़न पर सवाल उठने लगे। कहा जाने लगा कि आज़ादी के सात दशकों बाद भी आज दलित सामनता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। साल दर साल की ऐसी कई घटनाओं का जिक्र होने लगा जो दलितों के ख़िलाफ़ हिंसा की एक नई कहानी बयां करती हैं।

साल 2015 में राजस्थान के डंगावास में दलितों के ख़िलाफ़ हिंसा की खबर हो या 2016 में हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में दलित स्कॉलर रोहित वेमुला की आत्महत्या। इसी साल तमिलनाडु में 17 साल की दलित लड़की का गैंगरेप और हत्या राष्ट्रीय सुर्खी बना। 2017 में सहारनपुर हिंसा, 2018 में भीमा कोरेगांव हिंसा जिसकी जांच में कई नागरिक समाज और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी भी हुई। साल 2019 में डॉक्टर पायल तड़वी की आत्महत्या की पूरे देश में चर्चा हुई लेकिन सिलसिला फिर भी रुका नहीं। साल 2020 हाथरस की घटना और आंदोलन के लिए याद रखा जाएगा।

इसे भी पढ़ें: यूपी: ‘रामराज’ के दावे के बीच प्रदेश में दलित-नाबालिग बच्चियों पर बढ़ते अत्याचार!

एनसीआरबी के आंकड़े भयावह

अगर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के हालिया आंकड़ों की बात करें तो वो भी यही बयां करते हैं कि दलितों के ख़िलाफ़ अत्याचार के मामले कम होने के बजाय बढ़े हैं।

एनसीआरबी ने हाल ही में भारत में अपराध के साल 2019 के आँकड़े जारी किए जिनके मुताबिक अनुसूचित जातियों के साथ अपराध के मामलों में साल 2019 में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जहां 2018 में 42,793 मामले दर्ज हुए थे वहीं, 2019 में 45,935 मामले सामने आए।

इनमें सामान्य मारपीट के 13,273 मामले, अनुसूचित जाति/ जनजाति (अत्याचार निवारण) क़ानून के तहत 4,129 मामले और रेप के 3,486 मामले दर्ज हुए हैं।

राज्यों में सबसे ज़्यादा मामले 2,378 उत्तर प्रदेश में और सबसे कम एक मामला मध्य प्रदेश में दर्ज किया गया है। अनुसूचित जनजातियों के ख़िलाफ़ अपराध में साल 2019 में 26.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। जहां 2018 में 6,528 मामले सामने आए थे वहीं, 2019 में 8,257 मामले दर्ज हुए हैं।

UttarPradesh
UP police
Yogi Adityanath
UP Law And Order
FATEHPUR
Dalit atrocities
crime against women
crime in up

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

ग्राउंड रिपोर्ट: ‘पापा टॉफी लेकर आएंगे......’ लखनऊ के सीवर लाइन में जान गँवाने वालों के परिवार की कहानी

न्याय के लिए दलित महिलाओं ने खटखटाया राजधानी का दरवाज़ा

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप

यूपी चुनाव परिणाम: क्षेत्रीय OBC नेताओं पर भारी पड़ता केंद्रीय ओबीसी नेता? 

यूपी चुनाव में दलित-पिछड़ों की ‘घर वापसी’, क्या भाजपा को देगी झटका?

यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित

यूपी चुनाव: दलितों पर बढ़ते अत्याचार और आर्थिक संकट ने सामान्य दलित समीकरणों को फिर से बदल दिया है


बाकी खबरें

  • Sustainable Development
    सोनिया यादव
    सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत काफी पीछे: रिपोर्ट
    03 Mar 2022
    एनुअल स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट 2022 रिपोर्ट के मुताबिक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत फिलहाल काफी पीछे है। ऐसे कम से कम 17 प्रमुख सरकारी लक्ष्य हैं, जिनकी समय-सीमा 2022 है और धीमी गति…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पूर्वांचल की जंग: 10 जिलों की 57 सीटों पर सामान्य मतदान, योगी के गोरखपुर में भी नहीं दिखा उत्साह
    03 Mar 2022
    इस छठे चरण में शाम पांच बजे तक कुल औसतन 53.31 फ़ीसद मतदान दर्ज किया गया। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है। आज के बाद यूपी का फ़ैसला बस एक क़दम दूर रह गया है। अब सात मार्च को सातवें और आख़िरी चरण के लिए…
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: बस्ती के इस गांव में लोगों ने किया चुनाव का बहिष्कार
    03 Mar 2022
    बस्ती जिले के हर्रैया विधानसभा में आधा दर्ज़न गांव के ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार करने का एलान किया है। ग्रामीणों ने बाकायदा गांव के बाहर इसका बैनर लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी…
  • gehariyaa
    एजाज़ अशरफ़
    गहराइयां में एक किरदार का मुस्लिम नाम क्यों?
    03 Mar 2022
    हो सकता है कि इस फ़िल्म का मुख्य पुरुष किरदार का अरबी नाम नये चलन के हिसाब से दिया गया हो। लेकिन, उस किरदार की नकारात्मक भूमिका इस नाम, नामकरण और अलग नाम की सियासत की याद दिला देती है।
  • Haryana
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हरियाणा: आंगनबाड़ी कर्मियों का विधानसभा मार्च, पुलिस ने किया बलप्रयोग, कई जगह पुलिस और कार्यकर्ता हुए आमने-सामने
    03 Mar 2022
    यूनियन नेताओं ने गुरुवार को कहा पंचकुला-यमुनानगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरवाला टोल प्लाजा पर हड़ताली कार्यकर्ताओं और सहायकों पर  हरियाणा पुलिस ने लाठीचार्ज  किया।  
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License