NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
कुलदीप सेंगर के करीबी अरुण सिंह को टिकट देकर रद्द करना बीजेपी का दोहरा चरित्र है?
वोट बैंक को साधने के लालच में पहले टिकट देना और फिर विवाद बढ़ने पर रद्द कर देना बीजेपी के राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अब बीजेपी पर दोहरा चरित्र अपनाने और कथनी और करनी में फर्क करने जैसे आरोप लग रहे हैं।
सोनिया यादव
25 Jun 2021
कुलदीप सेंगर और अरुण सिंह

अंग्रेजी का एक चर्चित मुहावरा है कि प्यार और जंग में सब जायज है। हालांकि अब ये राजनीति में चुनाव जीतने के लिए भी कहा जा सकता है। क्योंकि बीते कुछ सालों में दल-बदल और दागी नेताओं का जिस तरह से सम्मान देखा गया है, उससे तो यही लगता है कि चुनावी जंग में सब जायज है।

बात अगर देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश और सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी की हो तो कहा जा सकता है कि यूपी में उन्नाव और बीजेपी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह पुरानी लेकिन नाम नया है। बीते अप्रैल में बीजेपी ने उन्नाव में जिला पंचायत सदस्य के 51 कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी की थी इसमें उत्तर प्रदेश के बांगरमऊ से 4 बार विधायक रहे कुलदीप सेंगर की पत्नी संगीता सेंगर का भी नाम था। बवाल बढ़ा तो पार्टी ने उनकी उम्मीदवारी को रद्द कर दिया। अब यही किस्सा फिर दोहराया गया है। पार्टी ने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिए अरुण सिंह को प्रत्याशी बनाया फिर विवाद बढ़ा तो उनका टिकट काट दिया। ऐसे में अब बीजेपी पर दोहरा चरित्र अपनाने और कथनी और करनी में फर्क करने जैसे आरोप लग रहे हैं।

पीड़िता ने अरुण सिंह का टिकट रद्द करने की मांग की थी

बता दें कि उन्नाव के चर्चित माखी रेप कांड में अरुण सिंह पर भी आरोप लगे थे। इसके बाद पीड़िता के परिवार वालों का जब एक्सीडेंट हुआ था, तब भी अरुण सिंह को आरोपी बनाया गया था। ऐसे में अरुण सिंह को टिकट मिलने के बाद पीड़िता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिखी थी कि बीजेपी उन लोगों को टिकट दे रही है, जो मुझे जान से मारना चाहते हैं। चिट्ठी में पीड़िता ने अरुण सिंह का टिकट रद्द करने की मांग की थी। इस संबंध में पीड़िता का एक वीडियो भी सामने आया।

इसके बाद पार्टी ने यू-टर्न लेते हुए आनन-फानन में नई चिट्ठी जारी की और अरुण सिंह का टिकट काट दिया गया। बीजेपी ने चिट्ठी में लिखा, “भारतीय जनता पार्टी उन्नाव द्वारा प्रदेश और क्षेत्र नेतृत्व के निर्देश पर पंचायत चुनाव 2021 के जिला पंचायत अध्यक्ष पद हेतु घोषित प्रत्याशी जिला पंचायत सदस्य अरुण सिंह की प्रत्याशिता को निरस्त किया जाता है।”

उन्नाव से लेकर कठुआ तक बीजेपी नेता आरोपियों के समर्थन में खड़े दिखे!

अब अरुण सिंह की जगह पूर्व एमएलसी स्वर्गीय अजित सिंह की पत्नी शकुन सिंह को टिकट दिया गया है। हालांकि ये महज़ एक टिकट देने और फिर रद्द कर देने भर की बात नहीं है। बात है ऑइडियोलॉजी की, विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के दोहरे रवैए की। एक ओर बीजेपी बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं का नारा देती है तो वहीं दूसरी ओर उन्हीं नेताओं को चुनावी मैदान में उतारती है जिन पर बलात्कार जैसे गंभीर मामलों के आरोप लग चुके हैं। उन्नाव से लेकर कठुआ तक बीजेपी नेताओं का आरोपियों के समर्थन में खड़े होना कई सवाल खड़े करता है।

सवाल ये कि क्या विकास के नाम पर सत्ता में आई बीजेपी का केवल और केवल लक्ष्य चुनाव जीत कर अपनी पार्टी का विकास करना ही है फिर वो किसी तरह भी क्यों न हो?  कभी निर्भया मामले में देश की सड़कों पर उतरी बीजेपी, क्या महज़ वोट के लिए खुद दागी नेताओं को राजनीति से बाहर नहीं करना चाहती। या बीजेपी खुद इन नेताओं को अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए श्रेय दे रही है। या फिर पार्टी खुद इन नेताओं की मदद से अपना वोट बैंक बढ़ाना चाहती है? सवाल कई हैं लेकिन जवाब शायद यही है कि राजनीति में कुछ भी स्थिर नहीं, किसी का ईमान और सम्मान भी नहीं।

जातिवादी राजनीति और दाग़ी नेता

मालूम हो कि कुलदीप सेंगर के मामले में पार्टी के ठाकुर यानी राजपूत समुदाय के विधायकों की जिस तरह की गोलबंदी देखी जा रही थी उसका असर सरकार के फ़ैसलों पर भी देखा गया। तमाम विरोध के स्वर को ताक पर रख कर आला कमान ने संगीता सेंगर और फिर अरुण सिंह को चुनावी मैदान में उतार दिया। बाद में उनका टिकट जरूर कट गया लेकिन ये बीजेपी की चुनावी रणनीति ही थी जो एक अपराधी की पत्नी और दूसरे आरोपी को टिकट देकर उसके प्रभाव का लाभ लेने की कोशिश की जा रही थी। क्योंकि ये सभी जानते हैं कि उन्नाव में ठाकुर जाति का अच्छा-खासा दबदबा है।

यूं तो सभी पार्टियां जाति आधारित राजनीति करती हैं। लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार कुछ अलग इरादे और वादे के साथ सत्ता में आई थी। हालांकि सीएम योगी संन्यासी होने और भेद-भाव न करने के अपने वादे के विपरीत ठाकुर और राजपूत जाति के प्रति कुछ ज़्यादा ही 'मेहरबान' दिखते हैं, उन्नाव की घटना ने इन आरोपों को और मज़बूती दे दी। ख़ुद जातिवाद की आलोचना करने वाले योगी आदित्यनाथ पर जातिवादी मुख्यमंत्री होने के आरोप लगे, बावजूद इसके कुलदीप सेंगर का बचाव हो या फिर पूर्व गृह राज्य मंत्री चिन्मयानंद के ख़िलाफ़ चल रहे रेप केस की वापसी योगी सरकार अपने काम में लगी रही।

पार्टियां वोट के लिए कुछ भी कर सकती हैं!

गौरतलब है कि अरुण सिंह को कुलदीप सेंगर का करीबी माना जाता है। वो ब्लॉक प्रमुख रहे हैं और फिलहाल वो औरस वार्ड से जिला पंचायत सदस्य हैं। अरुण उत्तर प्रदेश सरकार में कृषि राज्य मंत्री रणवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी सिंह के दामाद भी हैं। बीजेपी ने जिला पंचायत चुनाव में किसी भी पदाधिकारी को टिकट देने से इंकार कर दिया था। लेकिन अरुण सिंह के लिए उन्नाव में बीजेपी ने अपनी पॉलिसी तक बदल दी। जो ये साफ दर्शाता है कि पार्टी वोट के लिए कुछ भी कर सकती है। जानकारों की मानें तो, मौजूदा समय में राजपूत या ठाकुरों का तबका भारतीय जनता पार्टी का सबसे बड़ा समर्थक वर्ग भी है, संभवतः इसलिए भी पार्टी एक दबंग ठाकुर परिवार को अनदेखा कर अपने समर्थक वर्ग को थोड़ा भी नाराज़ करने का जोखिम नहीं उठाना चाहती थी।

इसे भी पढ़ें: रेप के दोषी कुलदीप सेंगर की पत्नी को टिकट देकर रद्द करने के पीछे बीजेपी की क्या राजनीति है?

Kuldeep Singh Sengar
Arun Singh
Yogi Adityanath
UttarPradesh
BJP
unnao

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!

ग़ाज़ीपुर; मस्जिद पर भगवा झंडा लहराने का मामला: एक नाबालिग गिरफ़्तार, मुस्लिम समाज में डर


बाकी खबरें

  • parliament
    एम श्रीधर आचार्युलु
    भारतीय संसदीय लोकतंत्र का 'क़ानून' और 'व्यवस्था'
    03 Dec 2021
    बिना चर्चा या बहस के संसद से वॉकआउट, टॉक-आउट, व्यवधान और शासन ने 100 करोड़ से अधिक भारतीय नागरिकों की आकांक्षाओं को चोट पहुंचाई है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में आज दूसरे दिन भी एक्टिव मामले में हुई बढ़ोतरी  
    03 Dec 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 9,216 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश भर में अब एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 0.29 फ़ीसदी यानी 99 हज़ार 976 हो गयी है।
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    संबित को पर्यटन विभाग का जिम्मा देने पर उठे सवाल
    02 Dec 2021
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस अंक में वरिष्ठ अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा को कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा भारत पर्यटन विकास निगम का अध्यक्ष नियुक्त किए…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव से पहले उठ रहा मथुरा के मंदिर का मुद्दा, UN ने किया ख़ुर्रम परवेज़ का समर्थन और अन्य ख़बरें
    02 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी यूपी में घुल रहे सांप्रदायिक ज़हर, कार्यकर्ता ख़ुर्रम परवेज़ का UN ने किया समर्थन और अन्य ख़बरों पर।
  • bihar protest
    अनिल अंशुमन
    बिहार : शिक्षा मंत्री के कोरे आश्वासनों से उकताए चयनित शिक्षक अभ्यर्थी फिर उतरे राजधानी की सड़कों पर  
    02 Dec 2021
    शिक्षा मंत्री के कोरे आश्वासनों से उकताए चयनित शिक्षक अभ्यर्थी फिर राजधानी की सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हुए हैं। इनकी एक सूत्री मांग है कि सरकार नियुक्ति की तिथि बताए, वरना जारी रहेगा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License