NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
भारत
राजनीति
यूपी: बेमौसम बारिश से किसानों के हाल बेहाल, सरकार से मुआवजे का इंतज़ार
बारिश से सिर्फ धान ही नहीं उड़द, अगैती आलू और सरसों की फसल को भी भारी नुकसान की संभावना है। मौजूदा सब्जियों के साथ ही सर्दियों की फसल की नर्सरी भी बर्बाद होने से किसान लाचार महसूस कर रहे हैं। प्रदेश सरकार की ओर से किसानों की फसल को हुए नुकसान का मुआवजा देने का फैसला किया गया है। हालांकि ये मुआवज़ा कब और कितना मिलेगा अभी इसकी कोई जानकारी नहीं है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Oct 2021
kisan
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

उत्तर प्रदेश में रविवार से तेज बारिश का दौर शुरु हो गया है। मौसम विभाग ने तीन दिन का अलर्ट जारी किया है, जिसमें सोमवार यानी आज 18 तारीख को यूपी और उत्तराखंड के लिए रेड अलर्ट है। बारिश से खेती-किसानी को भारी नुकसान हो रहा है। अभी तक सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद हो चुकी है और दो मजदूरों के मौत की भी खबर है। प्रदेश सरकार की ओर से किसानों की फसल को हुए नुकसान का मुआवजा देने का फैसला किया गया है। हालांकि ये मुआवज़ा कब और कितना मिलेगा अभी इसकी कोई जानकारी नहीं है।

बता दें कि मौसम विभाग ने कई दिन पहले ही 16 से 19 अक्टूबर के बीच कई राज्यों में भारी बारिश, तेज हवा, गरज और बिजली कड़कने की आशंका जताते हुए अलर्ट जारी किया था। पूर्वानुमान के मुताबिक ही दिल्ली, यूपी समेत देश के कई राज्यों में बेमौसम बरसात ने भारी तबाही मचाई है। धान समेत खरीफ की दूसरी फसलों की कटाई कर रहे किसानों के लिए मौसम का बदला रुख आफत बन गया है। यूपी, बिहार में ज्यादातर किसानों का धान अभी खेत में लगा है। जबकि हरियाणा-पंजाब में कटाई आखिरी चरण में है। मौसम के जानकारों के मुताबिक 16 अक्टूबर से शुरु हुई बारिश से खेत में लगी फसल को भारी नुकसान हो सकता है।

Thunderstorm and heavy rainfall activity over Uttarakhand, West UP and Haryana on 17th & 18th as a result of WD interaction with low level easterlies.

Cloud drifting towards West UP and southeast Haryana from the Low Pressure area over Telangana begins from today afternoon 1/2 pic.twitter.com/lm3X1oCtZt

— India Meteorological Department (@Indiametdept) October 16, 2021

सब्जियों की फसल को नुकसान तो सर्दियों की फसल की नर्सरी भी बर्बाद

धान खरीफ की मुख्य फसल है और यूपी में इस वक्त ज्यादातर किसानों का धान खेत में लगा है। प्रदेश में इस बार करीब 60 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी। ऐसे में इस बारिश से उसे भारी नुकसान हो सकता है। किसानों की मानेंं तो अक्टूबर के पहले हफ्ते में हुई बारिश के चलते पहले ही फसल में देरी और नुकसान हुआ है अब रही सही कसर ये बारिश निकाल रही है। बारिश से सिर्फ धान ही नहीं उड़द की फसल को भी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा जिन किसानों ने अगैती आलू और सरसों की बुवाई की थी उन्हें भी भारी नुकसान हो सकता है। बीज खेत में ही सड़ सकते हैं। इतना ही नहीं आलू और सरसों की बुवाई भी पिछड़ेंगी। इसके साथ ही मौजूदा सब्जियों की फसल को तो नुकसान होगा ही सर्दियों की फसल की नर्सरी भी बर्बाद होगी।

बनारस से सटे बलिया जिले के धान किसान रामराज न्यूज़क्लिक से बातचीत में बताते है कि इस बार उनकी धान की फसल अच्छी थी, जो नुकसान हुआ था वो पिछली बारिश के चलते ही हुआ था। फिर भी फसल को देख कर मन में एक आस थी, अभी देर रात से लगातार पानी गिरने से धान की फसल खेत में ही तहस-नहस हो गई है। अगर ऐसे ही पानी गिरता रहा तो शायद कटाई करके खेतों से कुछ भी घर को नहीं जा पाएगा।

रामराज की तरह ही बैरिया की सब्जी किसान ललिता देवी कहती हैं, “ हम 1800 रुपए का लगभग 15 ग्राम बीज लगाकर 5 एकड़ में टमाटर की रोपाई की तैयारी में थे। इसके लिए अब हमारी नर्सरी और खेत दोनों तैयार थे। लेकिन बारिश से खेत में पानी भर गया है और तैयार बीज सड़ने की नौबत में हैं। खेत में लगी सब्जियों को भी बहुत भारी नुकसान हुआ है। अगर ज्यादा बारिश हुई तो तैयार सब्जियां और नर्सरी दोनों गल जाएगी। फिर हम कहीं के ना रहेंगे।

सरकार क्या कह रही है?

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बारिश और बाढ़ के कारण करीब 2 लाख किसानों की फसल को हुए नुकसान का मुआवजा देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को बारिश के कारण धान और गन्ना जैसी फसलों को हुए नुकसान का आवश्यक आकलन करने का निर्देश दिया है।

नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार, सरकार के प्रवक्ता ने कहा है कि जिस भी किसान की फसल खराब हुई है, उन्हें जल्द से जल्द नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। राजस्व और कृषि विभाग आपस में समन्वय बनाकर इस काम को प्राथमिकता से पूरा करेंगे। इसके अलावा राज्य सरकार बारिश प्रभावित क्षेत्रों में सभी आवश्यक राहत और पुनर्वास के उपाय कर रही है। नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को 68 करोड़ रुपये दिये जाएंगे।

न उचित सिंचाई की व्यवस्था, न खेतों में पानी निकासी का सही इंतज़ाम

गौरतलब है कि प्रदेश के किसानों की खेती-किसानी 'राम भरोसे' यानी प्रकृति पर ही निर्भर है। पिछली बारिश यूपी के किसानों को लाखों का नुकसान देकर गई थी। कई जिलों में धान, केला, गोभी, पपीता, लौकी, तोरई, टमाटर, गन्ना की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। तब भी सबसे ज्यादा नुकसान सब्जियों की फसल को हुआ है। और अब भी सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे और मझोले किसान ही हैं। तब से अब तक प्रभावित किसान सरकार से मुआवजे और बीमा की आस में हैं। सरकार द्वारा जल्द मुआवजा देने की बात भी सामने आई है लेकिन ये अभी कब तक किसानों तक पहुंचेगा, इसकी कोई खबर नहीं है।

वैसे बीते साल कोरोना महामारी के चलते किसानों के हाल बेहाल थे तो इस बार राज्य में पहले ही किसान बिजली और पानी की उचित व्यवस्था ना होने से परेशान हैं, वहीं अब बेमौसम की बारिश उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर रही है। विधानसभा के चुनाव सिर पर हैं, ऐसे में सरकार की ओर से भी विशेष पैकेज और करोड़ों की राहत राशि दिए जाने का ऐलान किया जा रहा है, लेकिन सरकारी दावों और वादों से इतर हक़ीक़त यह भी है कि किसान एक ओर उचित सिंचाई की व्यवस्था न होने से परेशान है तो वहीं दूसरी ओर खेतों में पानी की सही निकासी न होने से बेमौसम बारिश से लाचार है। एक ओर बुंदेलखंड जैसे इलाके हैं जो सालों से सूखे की मार झेल रहे हैं, पानी के संकट से जूझ रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर अब धान, दाल और सब्जियों के लबालब खेत हैं जो अधिक पानी से सड़ने और गलने को मजबूर है।

rain
Harvesting season
Compensation
farmers
agrarian crisis
Uttar pradesh
yogi government

Related Stories

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

ग्राउंड रिपोर्टः डीज़ल-पेट्रोल की महंगी डोज से मुश्किल में पूर्वांचल के किसानों की ज़िंदगी

MSP पर लड़ने के सिवा किसानों के पास रास्ता ही क्या है?

मेरठ: वेटरनरी छात्रों को इंटर्नशिप के मिलते हैं मात्र 1000 रुपए, बढ़ाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे

यूपी चुनाव : किसानों ने कहा- आय दोगुनी क्या होती, लागत तक नहीं निकल पा रही

उप्र चुनाव: उर्वरकों की कमी, एमएसपी पर 'खोखला' वादा घटा सकता है भाजपा का जनाधार

ग्राउंड  रिपोर्टः रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के गृह क्षेत्र के किसान यूरिया के लिए आधी रात से ही लगा रहे लाइन, योगी सरकार की इमेज तार-तार

देशभर में घटते खेत के आकार, बढ़ता खाद्य संकट!


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नज़र भी, ख़बर भी: मोहन भागवत की अच्छी बातें और कुछ किंतु-परंतु
    05 Jul 2021
    आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर कुछ अच्छी-अच्छी बातें कहीे हैं, हालांकि सवाल ये है कि उन्हें भी इन बातों पर कितना यक़ीन है! और विडंबना ये भी कि उनको मानने वाले उनकी इन बातों को शायद ही मानते…
  • स्टेन स्वामी
    भाषा
    स्टेन स्वामी की सेहत नाज़ुक, ज़मानत याचिका के लिए नहीं जा सकते उच्च न्यायालय : वकील
    05 Jul 2021
    अदालत के 28 मई के आदेश के बाद से स्वामी का यहां होली फैमिली हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। निजी अस्पताल में उनके इलाज का खर्च उनके सहयोगी एवं मित्र उठा रहे हैं।
  • रूठा मानसून, संकट में खेती और निष्ठुर राजनीति
    अनिल जैन
    रूठा मानसून, संकट में खेती और निष्ठुर राजनीति
    05 Jul 2021
    सवाल है कि क्या हमारी सत्ता केंद्रित राजनीति इस चुनौती से निबटने का कोई ठोस रास्ता तलाशेगी या कुदरत को ही कोसती रहेगी या फिर खेती को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने के इरादों पर कायम रहेगी?
  • धर्म को लेकर किये गये प्यू के सर्वे से पता चलता है कि हम भारतीय पाखंडी हैं
    एजाज़ अशरफ़
    धर्म को लेकर किये गये प्यू के सर्वे से पता चलता है कि हम भारतीय पाखंडी हैं
    05 Jul 2021
    भारतीयों का दावा होता है कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, मगर उनका यह दावा उन धार्मिक समुदायों के प्रति उनके नज़रिये से मेल नहीं खाता, जिनसे वे जुड़े हुए नहीं हैं।
  • नए शौचालय बनाने से पहले पुराने शौचालयों की कार्यक्षमता और सफ़ाई कर्मियों की दशा दुरुस्त करने की ज़रूरत
    मोहित यादव, आशुतोष रंगा
    नए शौचालय बनाने से पहले पुराने शौचालयों की कार्यक्षमता और सफ़ाई कर्मियों की दशा दुरुस्त करने की ज़रूरत
    05 Jul 2021
    नए सूखे शौचालय भारत में ख़राब स्वच्छता व्यवस्था के बुनियादी ढांचों और साफ-सुथरे शौचालयों की बदतर हालत का भी एक नतीजा हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License