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भारत
राजनीति
विधानसभा चुनाव परिणामः बीजेपी की करारी हार
तीन राज्यों में चुनाव हार कर बीजेपी ने अपना आधार खो दिया है। ऐसे में मोदी सरकार के अंत की लगभग शुरूआत हो गई है।
सुबोध वर्मा
12 Dec 2018
विधानसभा चुनाव परिणामः बीजेपी की करारी हार

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। जिन तीन राज्यों में बीजेपी सत्ता में थी वहां उसे मुंह की खानी पड़ी है। ये राज्य राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ हैं। उधर तेलंगाना में पार्टी का वोट घट गया और इसकी सीट संख्या पांच से तीन तक पहुंच गई। मिजोरम में निवर्तमान विधानसभा में कोई सीट नहीं था। हालांकि इस बार एक ही सीट से उसे संतोष करना पड़ा है।

राजस्थान की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को साल 2013 के विधानसभा चुनावों की तुलना में इस बार उसके वोट शेयर में लगभग 7% का नुकसान हुआ है। वहीं एमपी में 3.5% और छत्तीसगढ़ में 8.5% का भारी नुकसान हुआ है।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों की तुलना में जब इसने इन तीन राज्यों का तथाकथित मोदी लहर में सफाया कर दिया था ऐसे में बीजेपी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। इसे न्यूजक्लिक साइट पर उपलब्ध चुनाव डेटा टूल में देखा जा सकता है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में इसका वोट शेयर लगभग 17% घट गया है जबकि एमपी में यह लगभग 13% घट गया है।

 

चुनावों में सीटों के मिलने और सरकार के गठन की बात करें तो मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला रहा। यहां कांग्रेस को 114 सीट मिले जबकि बीजेपी को 109 सीट ही प्राप्त हुए। यहां बड़ी पार्टी के रूप कांग्रेस सामने आई है। यहां कि विधानसभा में कुल सदस्यों की संख्या 230 है ऐसे में दोनों ही पार्टियों को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया है। सरकार गठन के लिए कम से कम 116 सदस्यों की ज़रूरत है इसलिए यहां त्रिशंकु सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। उधर बीएसपी के दो उम्मीदवारों ने जीत हासिल किया है। वहीं चार निर्दलीय उम्मीदवारों को जीत मिली है और समाजवादी के एक विधायक ने इस चुनाव में अपना जीत दर्ज किया है। राज्य में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस की निगाहें इन्हीं छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों पर टिकी है। उधर बीएसपी हाल के दिनों में लगातार बीजेपी का विरोध करती रही है। बीएसपी ने कांग्रेस को समर्थन देने का भी ऐलान कर दिया है। यहां कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए केवल दो विधायकों की ज़रूरत है क्योंकि उसके 114 उम्मीदवार चुनाव जीत चुके हैं।

उधर राजस्थान में कांग्रेस को 99 सीट मिली जबकि बीजेपी को 73 सीटों पर संतोष करना पड़ा। इस तरह सत्तारूढ़ बीजेपी को भी यह राज्य गवानी पड़ी है। यहां 200 सीटों में199 सीटों पर चुनाव हुए। सरकार बनाने के लिए यहां 100 सीटों की ज़रूरत है जो कांग्रेस पास लगभग दिखाई पड़ रही है। बीएसपी के 6 उम्मदीवारों ने चुनाव जीता है वहीं सीपीआईएम के दो उम्मीदवारों को राज्य में जीत मिली है साथ ही अन्य छोटे दल हैं जिनके उम्मीदवारों ने जीत दर्ज किया है। इसके अलावा राज्य में जीते हुए निर्दलीय विधायकों की संख्या 13 है ऐसे में यहां कांग्रेस की सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं छत्तीसगढ़ में 90सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया है। उसे इस चुनाव में 68 सीट मिले हैं जबकि बीजेपी को मात्र 15 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है। बीजेपी पिछले 15 वर्षों से राज्य की सत्ता पर काबिज थी लेकिन इस चुनाव में उसे भारी नुकसान उठानी पड़ी है।

इसलिए वोट शेयर और सीटों के मामले में बीजेपी को इन तीन राज्यों में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। बीजेपी के इस आश्चर्यजनक हार के कारणों को तलाशना काफी मुश्किल काम नहीं है।

विनाशकारी आर्थिक नीतियों का परिणाम

जैसा कि न्यूजक्लिक ने पिछले कुछ महीनों से बार-बार इस बात को उजागर किया था कि मुख्य रूप से किसानों को हुए नुकसान, बेरोजगारी (विशेष रूप से युवाओं के बीच),क़ीमतों में वृद्धि के बावजूद स्थिर वेतन और नोटबंदी तथा जीएसटी के चलते इन तीन बड़े राज्यों में लोगों के बीच असंतोष बढ़ रहा था। दूसरे शब्दों में बीजेपी नेतृत्व में लागू किए गए अपरिपक्व नव उदारवादी मॉडल के तहत आर्थिक आफत को अस्वीकार कर दिया गया।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में जहां पिछले दशक में खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ गया था वहीं घोषित एमएसपी अप्रासंगिक हो रहा था क्योंकि सरकारी ख़रीद में कटौती के कारण सरकारी ख़रीद घट गया था। गैर-लाभकारी कीमतों के कारण बड़ी संख्या में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। खुले बाज़ार में क़ीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से बहुत कम था। किसानों को नरेंद्र मोदी से कुल उत्पादन लागत से 50 प्रतिशत अधिक क़ीमत रखने की उम्मीद थी जिसको उन्होंने कभी पूरा नहीं किया। इस विश्वासघात के परिणामस्वरूप क़र्ज़ बढ़ गया इसके परिणामस्वरूप किसानों की परेशानी बढ़ गई और कई किसानों ने आत्महत्या कर ली। ये उन्हीं प्रत्य़क्ष परिणामों में से एक था। राजस्थान में भी इसी तरह की स्थिति का सामना किसानों ने किया था जिसके कारण कई महीनों तक भारी विरोध हुआ। मध्यप्रदेश में जून 2017 में मंदसौर में विरोध करने वाले किसानों पर पुलिस ने गोलीबारी की थी।

बेरोज़गारी मोदी सरकार की एक उल्लेखनीय खासियत रही है। इन तीनों राज्यों में सत्तारूढ़ बीजेपी को मोदी के एक अन्य विश्वासघात यानी एक करोड़ नौकरी देने के वादे को लेकर लोगों के गुस्सा का सामना करना पड़ा। राज्य सरकार ने अपने स्वयं के रोज़गार लक्ष्यों को पेश करने की कोशिश की लेकिन उसे पूरा करने में बुरी तरह विफल रही। वे युवा जिन्होंने पूर्ववर्ती चुनावों में मोदी का समर्थन किया था इस विश्वासघात के कारण बीजेपी के ख़िलाफ़ हो गए।

 

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