NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
विजय माल्या का अपना स्वर्ग
पैराडाइज पेपर्स ने इस बात पर प्रकाश डाला कि माल्या ने भारतीय बैंकों से लिये पैसे को किस तरह से विदेशी कंपनियों में रखा.
बोदापाती सृजना
17 Nov 2017
Translated by महेश कुमार
paradise papers

पिछले कुछ वर्षों में,  श्री विजय माल्या का पलायन और भारतीय बाजार से सार्वजनिक निधियों का भारतीय बैंक व्यवस्था में बिना किसी रोक-टोक के इस्तेमाल किया जाना भारतीय समाचार पत्रों में एक नियमित समाचार बन गया है. हाल ही में पैराडाइस पेपर्स द्वारा किये गए रहस्योद्घाटन में यह पाया गया कि श्री माल्या ने बहार की नकली कंपनियों (शेल कंपनी) का उपयोग अपनी कंपनी यूनाईटेड स्पिरीट्स लिमिटेड इंडिया (यूएसएल) का डेढ़ अरब डॉलर रखने के लिए किया – जोकि लगभग 10,000 करोड़ रुपया है, यह खुलासा श्री माल्या के काम करने का ढंग को दर्शाता है.

पैराडाइस पेपर्स के मुताबिक, माल्या ने विदेश में चार नकली कंपनियां बनाई जिसमें - एक ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में स्थित है, और बाकी तीन इंग्लैंड में, इन्हें मूल भारतीय कंपनी यूनाईटेड स्पिरीट्स लिमिटेड इंडिया की सहायक कंपनियों के रूप में स्थापित किया गया.

मूल कंपनी यानी यूनाईटेड स्पिरीट्स लिमिटेड इंडिया ने इन चार कंपनियों को 1.5 अरब डॉलर के ऋण दिए हैं. इस ऋण देने का कोई उद्देश्य नहीं दिया गया है. यह धनराशि अक्टूबर 2010 और जुलाई 2014 के बीच दी गयी.

फिर 2014 में, ब्रिटिश बहुराष्ट्रीय पेय कंपनी, डीएगियो ने यूनाइटेड स्पिरिट्स (यू.एस.एल.) में माल्या की हिस्सेदारी के शेयर को 1,225 करोड़ रुपए में खरीद लिया.

यूनाईटेड स्पिरीट्स लिमिटेड इंडिया को अधिग्रहित करने के बाद, डीएगियो ने 1.5 अरब डॉलर के ऋण को माफ़ कर दिया जिसे यू.एस.एल. ने अपनी चार विदेशी सहायक कंपनियों को दिया था।

अब, सवाल उठता है कि आखिर डिएगो ने यह क़र्ज़ माफ़ क्यों किया?

डिएगो के मुताबिक, इन सहायक कंपनियों के पास 1.5 अरब डॉलर के ऋण का औचित्य सिद्ध करने के लिए पर्याप्त मूल्य नहीं था. यह मूल रूप से दर्शाता है कि विदेश में गया धन की अब वापस आने की  कोई संभावना नहीं है.

डिएगो का कहना है कि 1.5 अरब डॉलर को माल्या से संबद्ध कंपनियों को दिया गया था. इस बात की बहुत संभावना है कि श्री मल्ल्या ने इस पैसे को भारतीय राजस्व अधिकारियों की पहुंच बहार रखने के लिए कहीं और स्थानांतरित कर दिया हो.

सवाल यह है कि यह कार्रवाई भारतीयों, खासकर भारतीय बैंकिंग क्षेत्र को कैसे प्रभावित करती है?

हम सभी जानते हैं कि माल्या ने एक दर्जन भारतीय बैंकों से लिया 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वापस नहीं किया है. यह साफतौर पर दर्शाता है कि मल्ल्या ने भारतीय बैंकों से लिए बड़े क़र्ज़ को 10,000 करोड़ रुपये के रूप में विदेशी कंपनियों में भेज दिया है.

इसका कुल निचोड़ यह है कि बैंकों को गुमराह सिर्फ माल्या की जेब भरने के लिया किया गया.

ऐसा कहा जाता है कि डिएगो ने 4 सहायक कंपनियों को दिए गए 1.5 अरब डॉलर के ऋण को माफ कर दिया था, जिसे बाद में कहीं और स्थानांतरित कर दिया गया – यह उसी वक्त तय हो गया था जब डिएगो और यू.एस.एल. के बीच अधिग्रहण को लेकर माल्या के साथ सौदा किया गया था.

अगर यह सच है, तो यह एक दूसरे के अपराधों में कंपनियों की सहभागिता या आपसी सहयोग के सवाल को दर्शाता है.

माल्या के अलावा, एक अन्य बैंक डिफॉल्टर एस्सार ग्रुप – का नाम भी पैराडाइस पेपर्स में उभरा है.

इससे पहले, राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने एस्सार ग्रुप के साथ-साथ अदानी समूह व अन्य कॉर्पोरेट समूह्हों को कोयले के आयात के लिए ओवर-इनवॉइसिंग (ज्यादा दर के बिल तैयार करना) एवं टैक्स से बचने के लिए विदेशों में पैसा रखने के लिए आरोपित किया था, पैराडाइस पपेर्स से ये जानकारी इन आरोपों को मजबूत करती है.

तथ्य यह है कि श्री माल्या की कंपनी 1.5 अरब डॉलर की पूँजी को अपनी सहायक कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा के रूप में उधार दे सकती है और फिर इसे गायब भी कर सकती है और बड़ी बात यह है कि यह सब बिना वित्तीय नियामकों या प्रवर्तन एजेंसियों के साथ चर्चा किये हो जाता है. यह कॉर्पोरेट को भारतीय कंपनियों के द्वारा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार काम करने के लिए अथाह स्वतंत्रता देने के परिणामों का नतीजा है.ये वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ तथाकथित एकीकरण एवं पूंजी के स्वतंत्र निर्वाह की वकालत करने का सबसे बड़ा ख़तरा है.

जबकि श्री माल्या और उनके जैसे अन्य कार्पोरेट कंपनियां जहां कहीं भी चाहे,  वे अपने लिए बेईमानी से भरा लाभ ले सकते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि भारतीय कानून को सीमाओं से परे लागू नहीं किया जा सकता है. देश, ऐसे वित्तीय अपराधियों को सज़ा देने के लिए उन्हें वापस लाने के लिए और उस धन को जिसपर यहाँ की जनता का हक़ है, विदेशी सरकारों और उनके कानूनों की दया पर निर्भर हो जाता है. 

NPA
bad loans
paradise papers
panama papers

Related Stories

बैंक निजीकरण का खेल

अमीरों का, पैसे से पैसा बनाने के कुचक्र का हथियार है बैड बैंक!

धन्नासेठों की बीमार कंपनियों से पैसा वसूलने वाला क़ानून पूरी तरह बेकार

एमएसएमईज़ (MSMEs) के मदद के लिए अपनाई गई लोन की नीति रही बेअसर: सर्वे

मृत्यु महोत्सव के बाद टीका उत्सव; हर पल देश के साथ छल, छद्म और कपट

कहीं लोन मेला के नाम पर अमीरों की क़र्ज़माफ़ी तो नहीं की जायेगी ?

राइट ऑफ़ और क़र्ज़ माफ़ी: तकनीकी शब्दावली में मत उलझाइए, नीति और नीयत बताइए

कोविड-19 : एनबीएफ़सी के लिए आरबीआई के राहत उपायों में एनपीए का इलाज नहीं है

मोदी दौर में बैंकों ने 660 हज़ार करोड़ कर्ज का नामोनिशान मिटा दिया

भारतीय बैंक वित्तीय स्तर पर लाचार क्यों हो रहे हैं?


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 7,145 नए मामले, ओमिक्रॉन के मामले 100 के पार हुए 
    18 Dec 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 84 हज़ार 565 हो गयी है वही ओमिक्रॉन के 24 नए मामलों के साथ देश में ओमिक्रॉन के मामलों की संख्या बढ़कर 113 हो गयी है।
  • Sino-Russian
    एम. के. भद्रकुमार
    चीन-रूसी सैन्य गठबंधन के मायने क्या हैं! 
    18 Dec 2021
    चीन-रूसी गठबंधन किसी भी तरह से वैसा नहीं है जैसा कि अमेरिका अपने किसी भी पश्चिमी साथी के साथ होने का दावा कर सकता है। इस मामले की खास बात यह है कि चीन-रूसी गठबंधन अपनी समकालीनता में अमेरिका के…
  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    अमरीका की महँगाई का भारत पर हो सकता है बुरा असर
    17 Dec 2021
    अमरीका में महँगाई दर 40 सालों में सबसे ज़्यादा होने से वहाँ ब्याज़ दर बढ़ने की संभावना हैI यूएस के अर्थशास्त्री कह रहे हैं कि वहाँ जल्द महँगाई के साथ बेरोज़गारी और आर्थिक मंदी छा सकती हैI इसका भारत…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    बैंक कर्मियों की देश्वयापी हड़ताल, गुड़गांव नमाज़ मामला SC में और अन्य ख़बरें
    17 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी बैंक कर्मियों की देश्वयापी हड़ताल, गुड़गांव नमाज़ मामला सुप्रीम कोर्ट में और अन्य ख़बरों पर।
  • rupee vs Doller
    अजय कुमार
    डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट उन्हें भी मारती है जिन्होंने पूरी जिंदगी डॉलर नहीं देखा है!
    17 Dec 2021
    डॉलर के मुकाबले रुपया पिछले 20 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। इसका आम जनजीवन पर क्या असर पड़ेगा?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License