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"विमेन मार्च फ़ॉर चेंज" : मोदी सरकार के ख़िलाफ़ महिलाओं ने बुलंद की अपनी आवाज़
"औरतें उट्ठी नहीं तो ज़ुल्म बढ़ता जाएगा" सफ़दर हाशमी की इन पंक्तियों को आत्मसात करते हुए, भारत की महिलाओं ने महिला विरोधी केंद्र में काम करने वाली और दलित विरोधी नरेंद्र मोदी सरकार ख़िलाफ़ वोट करने के लिए सड़कों पर उतरने का संकल्प लिया।
मुकुंद झा
04 Apr 2019
"विमेन मार्च फ़ॉर चेंज" : मोदी सरकार के ख़िलाफ़ महिलाओं ने बुलंद की अपनी आवाज़

आज दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में तमाम महिलाओं ने भाजपा और मोदी सरकार से यह सवाल करते हुए मार्च किया कि कहाँ है विकास! रोज़गार में गिरावट क्यों आई है! सरकार और संवैधानिक संस्थाओं में औरतों को प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिला! महिला आरक्षण विधेयक क्यों नहीं पास किया गया!
महिलाओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि वो अपने नागरिकों से ही लड़ाई लड़ रही है और अपना अधिकार मांगने और शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के ख़िलाफ़ क़ानूनों का नाजायज़ इस्तेमाल करके उन्हें देशद्रोही, राष्ट्रद्रोही, नक्सली बताकर गिरफ़्तार करके जेल में बंद कर के प्रताड़ित कर रहे हैं। इस सरकार ने समाज में अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वाले लोगों को ही अपराधी बना दिया है। 
इन्हीं मांगों के तहत आज दिल्ली "विमेन मार्च फ़ॉर चेंज" के बैनर तले मंडी हाउस से संसद मार्ग तक मार्च किया गया, इसमें हज़ारों की संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया। 

महिला संगठनों ने कहा, "यह सरकार देश की वास्तविक समस्या को हल करने के बजाए काल्पनिक दुश्मन से लड़ाई का एक वातावरण बनाकर एक  पुरुषवादी उन्माद का निर्माण कर रही है, जो कि हर दृष्टि से महिलाओं के लिए ख़तरनाक है।" आज के मार्च में महिलाएँ केवल अपने मुद्दों को लेकर चिंतित नहीं थीं बल्कि समाज में जिस तरह से नफ़रत और सांप्रदायिक माहौल है, उसे लेकर भी सवाल उठाए गए। 
महिलाओं ने हाथों में प्लेकार्ड्स ले रखे थे जिन पर लिखा था, "चुप्पी तोड़ें! एकजुट हों! झूठ का पर्दाफ़ाश करें!" इनका कहना था कि मोदी सरकार ने केवल झूठ बोला है और ज़मीन पर कुछ नहीं किया है। 

"औरतें उट्ठी नहीं तो ज़ुल्म बढ़ता जाएगा"  सफ़दर हाशमी की इन पंक्तियों को आत्मसात करते हुए, भारत की महिलाओं ने महिला विरोधी केंद्र में काम करने वाली और दलित विरोधी नरेंद्र मोदी सरकार ख़िलाफ़ वोट करने के लिए सड़कों पर उतरने का संकल्प लिया। मंडी हाउस से संसद मार्ग तक हुए इस मार्च में, महिलाओं ने आगामी चुनावों में अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने का समर्थन करने का वादा करते हुए, आज़ादी के नारे लगाए।

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न्यूज़क्लिक से बात करते हुए, अनहद से शबनम हाशमी जो दिल्ली के इस मार्च के आयोजकों में से एक हैं, ने कहा, "हम यह मार्च पूरे देश में करने में सक्षम हुए हैं, यह सौ से अधिक स्थानों पर बीस राज्यों में हो रहा है। मार्च एक खुला आह्वान था, जिसमें हमने देश की महिला मतदाताओं से आह्वान किया कि वे हमारे संस्थानों और हमारे लोकतांत्रिक चरित्र को बचाने के लिए भारत के आइडिया पर हो रहे हमलों का मुक़ाबला करें।”
इस मार्च की भावना से साफ़ होता है कि हर वर्ग की महिलाओं - घरेलू कामगारों, गृह आधारित कामगारों, विश्वविद्यालय की छात्राओं और समाज के सदस्यों के लिए मैला ढोने वालों सहित सैकड़ों कामकाजी वर्ग की महिलाओं ने एक दूसरे के साथ मिलकर महिलाओं के अधिकारों के लिए आज यह मार्च निकाला है। एक साथ मार्च कर रही महिलाओं ने एकजुटता में गाते हुए बड़े पैमाने पर मोदी सरकार और अन्य राजनीतिक दलों को एक शक्तिशाली संदेश भेजा है कि इस समय में महिलाओं के मुद्दों को राजनीतिक दलों की प्राथमिकता सूची में जगह मिलनी ही चाहिए। 
अपेक्षा प्रियदर्शिनी ने कहा, "बीजेपी महिलाओं पर हो रहे हमलों को रोकने में नाकाम रही है, बल्कि इस सरकार ने उन राजनीतिक चेहरों का समर्थन किया है जिनके ख़िलाफ़ बलात्कार जैसे संगीन मामले दर्ज हैं।" 

अमृता जौहरी ने कहा, ''मोदी सरकार ने महिलाओं के अधिकारों पर हमला किया है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएँ जुमलों के अलावा कुछ नहीं हैं जिन पर सबसे ज़्यादा ख़र्च प्रचार पर किया गया है। उज्ज्वला योजना और ऐसी तमाम योजनाओं से सरकार ये दिखाना चाहती है कि उसने महिलाओं के लिए कोई बहुत बड़ा काम किया है, लेकिन आज महिलाएँ एकजुट हो कर साथ आई हैं और मोदी सरकार के जुमलों का जवाब दे रही हैं। 

अब जबकि आगामी चुनाव बेहद नज़दीक हैं, देश भर की महिलाएँ एक साथ खड़ी हुई हैं और मिल कर ये संकल्प लिया है कि "मनुवादी और महिला विरोधी" मोदी सरकार को इस बार सत्ता से हटाना है।

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