NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत
24 घंटे लाइब्रेरी खोलने की मांग को लेकर साल 2016 में बीएचयू के छात्रों ने जोरदार आंदोलन किया था। इस दौरान भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को आधी रात भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने निलंबित कर जेल तक भिजवा दिया, लेकिन छात्रों ने इसके बाद भी हार नहीं मानी।
सोनिया यादव
30 Mar 2022
BHU

देश का प्रतिष्ठित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी यानी बीएचयू अक्सर अपने छात्रों के संघर्ष और आंदोलन को लेकर सुर्खियों में रहता है। कभी प्रशासन से शिक्षा और सुरक्षा को लेकर भिड़ती छात्राएं हों या कभी हॉस्टल और समाजिक सरोकार से जुड़े विषयों पर छात्रों की एकजुटता। हर बार अपने और अपनों के अधिकारों की मांग को लेकर छात्र-छात्राएं यहां संघर्षरत रहे हैं और उनकी जीत भी हुई है। इस बार भी छात्र आंदोलन की एक बड़ी जीत हुई है। छात्र बीते 6 सालों से 24 घंटे लाइब्रेरी खोलने की मांग कर रहे थे, जिसे अब आखिरकार प्रशासन ने मान लिया है और विश्वविद्यालय की साइबर लाइब्रेरी को 21 घंटे खोलने की मंजूरी दे दी है।

बता दें कि बीएचयू की साइबर लाइब्रेरी एशिया की सबसे बड़ी साइबर लाइब्रेरी है और ये बीते कई सालों से महज़ 12 घंटे ही खुला करती थी। 24 घंटे लाइब्रेरी खोलने की मांग को लेकर साल 2016 में बीएचयू के छात्रों ने जोरदार आंदोलन किया था। इस दौरान भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को आधी रात भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने निलंबित कर जेल तक भिजवा दिया, लेकिन छात्रों ने इसके बाद भी हार नहीं मानी। साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इन छात्रों का निलंबन हटाते हुए विश्वविद्यालय को कड़ी फटकार भी लगाई थी।

क्या है पूरा मामला?

शनिवार, 26 मार्च को बीएचयू के पब्लिक रिलेशन ऑफिस ने अपने एक ट्वीट में बताया कि सोमवार, 28 मार्च से साइबर लाइब्रेरी नई टाइम टेबल के हिसाब से खोली जाएगी। इस ट्वीट में प्रशासन की ओर से कहा गया कि छात्र हित में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा एक अहम निर्णय लिया गया है। इसके तहत बीएचयू स्थित सयाजीराव गायकवाड केन्द्रीय ग्रंथालय का साइबर लाइब्रेरी स्टडी सेंटर 28 मार्च 2022 से हर कार्य दिवस में विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए प्रातः 08.00 बजे से प्रातः 05.00 बजे तक खोला जायेगा।

छात्र हित में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा एक अहम निर्णय लिया गया है। इसके तहत #BHU स्थित सयाजीराव गायकवाड केन्द्रीय ग्रंथालय का साइबर लाइब्रेरी स्टडी सेंटर 28.03.2022 से हर कार्य दिवस में विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु प्रातः 08.00 बजे से प्रातः 05.00 बजे तक खोला जायेगा। pic.twitter.com/WkQ45bNOuw

— BHU Official (@bhupro) March 26, 2022

मालूम हो कि बीएचयू की साइबर लाइब्रेरी यहां की सेंट्रल लाइब्रेरी का एक हिस्सा है। यह लाइब्रेरी पूरी तरह से एयर कंडीशन से लैस है। यहां छात्रों को कंप्यूटर नेटवर्किंग और वाई-फाई की सुविधा भी दी गई है। साइबर लाइब्रेरी की वेबसाइट पर बड़ी मात्रा में दुनिया भर की किताबों और जर्नल्स का ई-रिसोर्सेज उपलब्ध हैं, जिसे छात्र अपने आईडी और पासवर्ड से एक्सेस कर सकते हैं। इसके अलावा छात्र साइबर लाइब्रेरी के शांतिपूर्ण माहौल में अपनी किताबें ले जाकर भी पढ़ सकते हैं। ये लाइब्रेरी छात्र-छात्राओं को शिक्षा का बेहतर वातावरण देने के उद्देश्य से ही शुरू की गई थी। 

BHU

साल 2016 में क्या हुआ था?

बीएचयू में साल 2016 एक ऐतिहासिक आंदोलन का साल बना। साइबर लाइब्रेरी को 24 घंटे खोले जाने की मांग को लेकर छात्रों ने न सिर्फ शांतिपूर्ण जोरदार आंदोलन किया बल्कि वो अपने भविष्य को दांव पर लगाकर जेल भी गए। तब छात्रहित का ये मुद्दा संसद में भी गूंजा। दो बार इस पूरे मामले को तत्कालिन कांग्रेस सांसद अली अनवर ने राज्यसभा में उठाया तो वहीं लोकसभा में राजीव सातव ने छात्रों के संघर्ष की ओर सबका ध्यान केंद्रित किया।

मई 2016 के आखिरी सप्ताह में जब 24 घंटे लाइब्रेरी की मांग कर रहे छात्र भूख हड़ताल कर रहे थे, तभी आधी रात लगभग 16 थानों की पुलिस बीएचयू कैंपस में घुसी और कुछ ही मिनटों में अनशनकारी छात्रों को गिरफ्तार कर अपने साथ बाहर ले आई और इन सभी छात्रों के जेल में डाल दिया गया। इस दौरान प्रशासन द्वारा इन छात्रों को निलंबित कर उनके परीक्षा में बैठने पर रोक लगा दी गई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद छात्रों के निलंबन का फैसला तो वापस तो मगर लाइब्रेरी खोलने को लेकर विश्वविद्यालय का अड़ियल रवैया बना रहा।

BHU

छात्रों के मुताबिक पूर्व कुलपति प्रोफेसर जीसी त्रिपाठी ने 21 घंटे लाइब्रेरी के समय को घटाकर सिर्फ 12 घंटे कर दिया था। छात्रों ने उनसे जब समय बढ़ाने की मांग की तो वो उलजुलूल तर्क देते थे, जैसे लड़कियों को रात में बाहर निकलने की अनुमति नही हैं। रात में अच्छे छात्र पढ़ाई नहीं करते आदि। कुलपति त्रिपाठी को उनकी महिला विरोधी रवैये के चलते साल 2017 में छात्राओं के आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय छोड़ना पड़ा।

निलंबन और जेल के बावजूद भी छात्र हारे नहीं और डटकर लड़े

इस आंदोलन के दौरान निष्कासित रहे पूर्व छात्र डॉ. विकास सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे से हजारों-हज़ार छात्र लाभान्वित होंगे। 24 घंटे लाइब्रेरी का खुलना सत्य की जीत है, छात्र आंदोलन की जीत है। सभी का बहुत-बहुत आभार जो इस लड़ाई को लड़े। उन सभी को शुभकामनाएं जो इस सुविधा से लाभान्वित होंगे। 

विकास ने न्यूज़क्लिक को बताया कि बीएचयू में छात्रों ने 24 घंटे लाइब्रेरी खोले जाने समेत अन्य मुद्दों के लिए मजबूत लड़ाई लड़ी है। 2016 में तत्कालीन वीसी ने छात्रों को इसी मांग के लिए विश्वविद्यालय से निलंबित कर, जेल भेज दिया था। बावजूद इसके छात्र हारे नहीं और डटकर लड़े। ये जीत सभी छात्रों की जीत है।

BHU जॉइंट एक्शन कमिटी के सदस्य और विश्वविद्यालय के छात्र रहे राज अभिषेक इसे लाइब्रेरी आंदोलन की अधूरी जीत बताते हैं। उनके मुताबिक वाईस चांसलर जैन साहब के इस निर्णय को अभूतपूर्व घोषित न करके इसे एक आम निर्णय की तरह देखा जाना चाहिए, क्योंकि 24 घंटे लाइब्रेरी छात्रों का मौलिक अधिकार है।

BHU

ये जीत लाइब्रेरी आंदोलन की अधूरी जीत है 

राज अभिषेक ने न्यूज़क्लिक से कहा, “काशी हिंदू विश्वविद्यालय में 6 साल से चल रहे लाइब्रेरी आंदोलन को आंशिक रूप से जीत मिली है। 24 घंटे लाइब्रेरी छात्रों का मौलिक अधिकार है, जैन साहब ने इसे पुनः चालू बस छात्र हित के तरफ एक कदम बढ़ाया है। पर छात्र समुदाय इससे संतुष्ट नही हैं। हमारी कई मांगे आज भी अधूरी है जो इस आंदोलन के साथ शुरू हुईं थीं। जैसे कि छात्राओं के लिए भी सामान्य रूप से पुस्तकालय की व्यवस्था लागू हो। विश्वविद्यालय परिसर के अंदर सुरक्षा का स्तर बढ़ाया जाए, न कि इस बहाने छात्र छात्राओं को उनके कमरों में कैद रखा जाए। रात्रि कैंटीन की व्यवस्था सुचारू रूप से चालू हो। लैंगिक भेदभाव को ख़त्म करने के लिए GSCSH की मांग आज भी अधूरी पड़ी है।"

राज आगे कहते हैं, "विश्वविद्यालय में एक लोकतांत्रिक वातावरण तैयार होना चाहिए ताकि परिसर में समसामयिक मुद्दों पर मुखर होने वाले विद्यार्थियों को एफआईआर और निलंबन न झेलना पड़े। फ़र्ज़ी तरीके से पुलिस केस दर्ज कर निलंबित छात्रों को वापस विश्वविद्यालय में पढ़ने का मौका दिया जाए। अब वक्त है जब छात्रों को भी अपने अधिकारों के लिए बोलना पड़ेगा। छात्रसंघ की मांग काफी लंबे समय से अलग-अलग समूहों ने उठाई है, पर प्रशासन का रवैया एकदम नकारात्मक रहा है। उम्मीद है जिस तरह से नए वाईस चांसलर साहब छात्र हितों में फैसले ले रहे हैं, उस कड़ी में हमारे अन्य मांगों पर भी ध्यान देंगे।"

कर्फ्यू टाइमिंग को लेकर लड़कियों की समस्याएं और एक बेहतर कल की उम्मीद

गौरतलब है कि बीएचयू में साइबर लाइब्रेरी की शुरुआत साल 2012 में तत्कालीन वाइस चांसलर डॉ. लालजी सिंह के कार्यकाल में हुई थी। तब यह लाइब्रेरी सुबह 8 बजे खुलती थी और फिर अगले दिन सुबह 5 बजे (3 घंटे साफ सफाई के लिए) बंद की जाती थी। कुलपति लालजी के कार्यकाल के बाद इस लाइब्रेरी के खुलने के समय को सीमित कर दिया गया। जिसके बाद सालों बाद अब एक बार फिर पुराने समय को बहाल किया गया है। हालांकि प्रशासन का ये फैसला बीएचयू कैम्पस के हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों के फिलहाल किसी काम का नहीं है। क्योंकि वहां हॉस्टल्स के गेट पर कर्फ्यू टाइमिंग लागू है और गेट रात 10 बजे ही बंद हो जाते हैं। 

छात्राओं में इसे लेकर नाराज़गी भी देखी गई है। लंबे समय से कर्फ्यू टाइमिंग को हटाने और गर्ल्स हॉस्टल्स में भी बॉयज़ हॉस्टल्स की तरह सुविधा मुहैया कराने की मांग लड़कियां करती रही हैं। वैसे लाइब्रेरी वाले मुद्दे को लेकर बीएचयू के पब्लिक रिलेशन ऑफिस ने 28 मार्च को ट्वीट करते हुए कहा कि प्रशासन के नए फैसले के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि फीमेल स्टूडेंट्स भी पुस्तकालय की इस सुविधा का इस्तेमाल कर पाएं। जाहिर है एक उम्मीद जागी है और ये उम्मीद बेहतर कल की है, जिसे छात्र-छात्राएं अपने संघर्षों से खूबसूरत बनाने में लगे हैं।

इसे भी पढ़ें: बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!

Banaras Hindu University
students protest
protest for library
central university
gender discrimination

Related Stories

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

बीएचयू : सेंट्रल हिंदू स्कूल के दाख़िले में लॉटरी सिस्टम के ख़िलाफ़ छात्र, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!

बीएचयू: सोते हुए छात्रों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई, थाना घेराव के बाद गिरफ़्तार छात्र हुए रिहा

सुपवा: फीस को लेकर छात्रों का विरोध, कहा- प्रोजेक्ट्स-प्रैक्टिकल्स के बिना नहीं होती सिनेमा की पढ़ाई

बीएचयू: प्रवेश परीक्षा के ख़िलाफ़ ‘छात्र सत्याग्रह’ जारी, प्रशासन का किसी भी विरोध से इंकार

तुर्की : महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के विरोध में हज़ारों ने मार्च किया

परीक्षा का मसला: छात्रों का सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन जारी

बीएचयू: छात्रावास में लगा ताला, जबरन हॉस्टल खाली कराने के ख़िलाफ़ छात्रों का धरना!

एक नज़र इधर भी : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और मैला ढोती महिलाएं


बाकी खबरें

  • BJP
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: भाजपा के घोषणा पत्र में लव-लैंड जिहाद का मुद्दा तो कांग्रेस में सत्ता से दूर रहने की टीस
    11 Feb 2022
    “बीजेपी के घोषणा पत्र का मुख्य आकर्षण कथित लव जिहाद और लैंड जिहाद है। इसी पर उन्हें वोटों का ध्रुवीकरण करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घोषणा पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया में लव-लैड जिहाद को…
  • LIC
    वी. श्रीधर
    LIC आईपीओ: सोने की मुर्गी कौड़ी के भाव लगाना
    11 Feb 2022
    जैसा कि मोदी सरकार एलआईसी के आईपीओ को लांच करने की तैयारी में लगी है, जो कि भारत में निजीकरण की अब तक की सबसे बड़ी कवायद है। ऐसे में आशंका है कि इस बेशक़ीमती संस्थान की कीमत को इसके वास्तविक मूल्य से…
  • china olampic
    चार्ल्स जू
    कैसे चीन पश्चिम के लिए ओलंपिक दैत्य बना
    11 Feb 2022
    ओलंपिक का इतिहास, चीन और वैश्विक दक्षिण के संघर्ष को बताता है। यह संघर्ष अमेरिका और दूसरे साम्राज्यवादी देशों द्वारा उन्हें और उनके तंत्र को वैक्लपिक तंत्र की मान्यता देने के बारे में था। 
  • Uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : जंगली जानवरों से मुश्किल में किसान, सरकार से भारी नाराज़गी
    11 Feb 2022
    पूरे राज्य के किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, मंडी, बढ़ती खेती लागत के साथ ही पहाड़ों में जंगली जानवरों का प्रकोप और लगातार बंजर होती खेती की ज़मीन जैसे तमाम मुद्दे लिए अहम हैं, जिन्हें इस सरकार ने…
  • Uttarakhand
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तराखंड चुनाव : क्या है युवाओं के मुद्दे
    10 Feb 2022
    उत्तराखंड चुनाव के बीच हमने गढ़वाल के सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दौरा किया और नौजवानों से उनके मुद्दे जानने चाहे ?गढ़वाल के सेंट्रल यूनिवर्सिटी एक तरह से इस राज्य का शिक्षा का केन्द्र है यहां राज्य के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License