NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
वर्तमान चुनाव विचारधाराओं की लड़ाई : येचुरी
भोपाल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राष्ट्रीय महासचिव सीताराम येचुरी ने बुद्धिजीवियों से चर्चा में कहा कि भाजपा अपनी संभावित हार के डर से सांप्रदायिकता एवं राष्ट्रवाद के मुद्दे उछाल रही है।
राजु कुमार
03 May 2019
भोपाल में सीताराम येचुरी।

लोकसभा का वर्तमान चुनाव विचारधाराओं की लड़ाई है। एक ओर भाजपा है, जिसका संवैधानिक मूल्यों पर विश्वास नहीं है, तो दूसरी ओर धर्मनिरपेक्षता, भारत की विविधता और सामाजिक न्याय को मानने वाले लोग हैं। ऐसे में मतदाताओं को वोट डालते समय इस बात का जरूर ध्यान रखना चाहिए कि देश को बचाना है, तो सांप्रदायिकता, कट्टरता, नफरत, हिंसा और छद्म राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने वाली शक्तियों के खिलाफ वोट करें। ये बातें भोपाल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राष्ट्रीय महासचिव कॉ. सीताराम येचुरी ने न्यूज़क्लिक से कही।

कॉ. येचुरी भोपाल में “संसदीय प्रणाली - चुनाव और जनतंत्र” विषय पर आयोजित व्याख्यान में वक्तव्य देने आए हुए थे। इसके पहले उन्होंने शहर के बुद्धिजीवियों से चर्चा भी की। इस दरम्यान उन्होंने न्यूज़क्लिक के विभिन्न सवालों पर भी अपने विचार व्यक्त किए।

DSCN5293 (1).jpg

येचुरी ने बताया कि भाजपा अपनी संभावित हार के डर से सांप्रदायिकता एवं राष्ट्रवाद के मुद्दे उछाल रही है। देश में लोकसभा चुनाव के दरम्यान रोजमर्रा के मुद्दे हावी होने लगे, तो भाजपा के रणनीतिकारों के पसीने छूटने लगे। बेरोजगारी, किसानी की समस्या, नोटबंदी, जीएसटी और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने जैसे सवालों पर भाजपा के लिए चुनाव कठिन दिखने लगा। पहले चरण के बाद ही उसे यह बात समझ में आने लगी कि जनता ने सरकार बदलने का मन बना लिया है। दूसरे चरण के दरम्यान उसने कट्टर हिन्दुत्व और सांप्रदायिक सोच वाली प्रज्ञा ठाकुर को भाजपा की सदस्यता दिलाकर भोपाल से टिकट दे दिया। ध्रुवीकरण की साजिश के तौर पर इसे किया गया। फिर तीन चरणों यानी 303 सीटों के मतदान के बाद भाजपा पूरी तरह से सांप्रदायिक और छद्म राष्ट्रवाद के मुद्दे पर केन्द्रित हो गई। इन 303 में से 113 भाजपा की सीटें थी। भाजपा इन पर कमजोर दिखाई दी। इसलिए आगे के 240 सीटों पर उसने मतदाताओं के रोजमर्रा के जीवन से जुड़े मुद्दों से ध्यान हटाना शुरू किया, जिसे लेकर लोगों में सरकार के खिलाफ भारी नाराजगी है। इनमें से उसकी 159 सीटें हैं। भाजपा को लगता है कि यदि इन सीटों को नहीं बचा पाई, तो सरकार बनाना असंभव है।

DSCN5297 (1).jpg

उन्होंने कहा कि भोपाल की परंपरा गंगा-जमुनी तहजीब की है। यह बेगमों का शहर रहा है। यह बुद्धिजीवियों का शहर है। प्रज्ञा ठाकुर की उम्मीदवारी यहां की मिली-जुली संस्कृति को बर्बाद करने  के लिए है। यह भोपाल के साथ-साथ देश के लिए भी खतरनाक है। वह इमोशनल कार्ड खेल रही है। टॉर्चर की झूठी कहानी लोगों को सुना रही है। शहीद पुलिस अधिकारी के खिलाफ उन्होंने अपशब्द कहे। उनके लिए झूठ तैयार किया जा रहा है। यह भोपाल की विरासत के खिलाफ है। यहां की जनता को तय करना है कि वह भोपाल और देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं।

देश में वामपंथ के प्रदर्शन के सवाल पर उन्होंने कहा कि संयुक्त रूप से वामपंथी पार्टियों का प्रदर्शन बेहतर होगा। बुनियादी सवालों को लेकर बंगाल, केरल, त्रिपुरा और अन्य राज्यों में जहां वामपंथी उम्मीदवार हैं, वहां मतदाताओं का जुड़ाव दिख रहा है।

व्याख्यान में कॉ. येचुरी ने कहा कि पिछले 5 सालों में देश में एक तरफ संवैधानिक और जनतांत्रिक मूल्यों पर हमला हुआ है। गौ रक्षा एवं मोरल पुलिसिंग के नाम पर निजी सेनाओं को बढ़ावा एवं राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है। यह सामाजिक न्याय के खिलाफ है और इंसानियत एवं सामाजिक मूल्यों की गिरावट है। पिछले 5 सालों में चुनाव आयोग को कमजोर किया गया। इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। सीबीआई का दुरूपयोग, आरबीआई को कमजोर, सीएजी की रिपोर्ट को प्रभावित करना, सीवीसी पर प्रभाव डालना जैसे कई मसले हमें दिख रहे हैं। 

देश का झुकाव विदेशी पूंजी की ओर बढ़ा है। मोदी राज में बैंकों को चूना लगा कर कई उद्योगपति देश से बाहर भाग चुके हैं। भारतीय पूंजी को लूटने वाले 36 लोगों ने विदेशी नागरिकता ले ली है। पिछले 5 सालों में उद्योगपतियों के 5.55 लाख करोड़ कर्ज माफ किए गए हैं। इलेक्ट्रॉल बॉण्ड के नाम पर भ्रष्टाचार को कानूनी जामा पहना दिया गया। इसका 95 फीसदी राशि भाजपा के खाते में गई है। 

उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी आतंकवाद के खिलाफ मजबूत सरकार का झूठा दावा करते हैं। यदि 2009 से 2014 और 2014 से अभी तक के आतंकवादी हमले को देखें, तो पिछले 5 साल में 109 के मुकाबले 626 आतंकी व नक्सली हमले हुए हैं, 139 के मुकाबले 483 जवान शहीद हुए हैं, 12 नागरिकों के मुकाबले 210 नागरिक ऐसे हमले में मारे गए हैं और 563 के मुकाबले 5596 सीज़फायर उल्लंघन की घटनाएं हुई हैं। ऐसे में कैसे कहा जा सकता है कि देश सुरक्षित हाथों में है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान तक ने कहा ने कहा कि हम चाहते हैं कि मोदी फिर प्रधानमंत्री बने, इसके क्या मायने हैं? कुछ दिन पूर्व बालाकोट में आतंकियों के मरने की संख्या को लेकर सत्तापक्ष की ओर से ही कई भ्रम फैलाए गए और विपक्ष को दोषी ठहराने की कोशिशें की जाती रही है। 

पिछले 5 सालों में जनता में असंतोष फैला है। इसलिए भाजपा ने घोषणा-पत्र में भी वे सांप्रदायिकता एवं हिन्दुत्व ले आए। अनुच्छेद 370, राम मंदिर, समान नागरिक संहिता के साथ-साथ अब भाजपा द्वारा धर्म के आधार पर नागरिकता देने की बात की जाने लगी है, जिसे लेकर उत्तर-पूर्व में गहरा असंतोष है। हिन्दू राष्ट्र और इस्लामिक स्टेट दोनों ही अतिवादी सोच हैं जिनकी भारत को ज़रूरत नहीं। गांधी जी की सोच थी कि हिन्दू का ‘ह’ और मुसलमान का ‘म’ को मिल कर ही ‘‘हम’’ बनता है जो इस देश को मज़बूत बनाने के लिए अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि भोपाल का चुनाव दिग्विजय सिंह और प्रज्ञा ठाकुर के बीच नहीं, बल्कि विचारधाराओं के बीच है। हमारा उद्देश्य मोदी सरकार को हराना है और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने वाली सरकार, एक वैकल्पिक सरकार और एक वैकल्पिक प्रधानमन्त्री को लाना है।

DSCN5310 (1).jpg

इस मौके पर कांग्रेस के प्रत्याशी मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह चुनाव देश और लोकतंत्र को बचाने के लिए है। आरएसएस और भाजपा ने महात्मा गांधी के मूल विचारों को कभी नहीं स्वीकारा। सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाई जा रही है। ज़मीनी हकीकत यह है कि नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि यूपीए एक यानी डॉ. मनमोहन सिंह के पहले कार्यकाल की सफलता का मूल कारण था, वामपंथी दलों का अंकुश। उन्होंने सरकार पर अंकुश भी लगाया और कई अच्छे कानून एवं योजनाएं बनवाई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 2019 में नई सरकार का गठन होगा और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की जीत होगी।

General elections2019
2019 आम चुनाव
2019 Lok Sabha elections
BJP-RSS
Congress
left parties
Left unity
Madhya Pradesh
Bhopal
Narendra modi
Sitaram yechury
Digvijay Singh
pragya thakur
Hindutva
Hindu Nationalism
Secularism
Save Democracy
save constitution
Save Nation

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

डिजीपब पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर के साथ आया, यूपी पुलिस की FIR की निंदा

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

परिक्रमा वासियों की नज़र से नर्मदा


बाकी खबरें

  • working women
    सोनिया यादव
    ग़रीब कामगार महिलाएं जलवायु परिवर्तन के चलते और हो रही हैं ग़रीब
    03 Feb 2022
    सीमित संसाधनों में रहने वाली गरीब महिलाओं का जीवन जलवायु परिवर्तन से हर तरीके से प्रभावित हुआ है। उनके स्वास्थ्य पर बुरा होने के साथ ही उनकी सामाजिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है, इससे भविष्य में…
  • RTI
    अनुषा आर॰
    गुजरात में भय-त्रास और अवैधता से त्रस्त सूचना का अधिकार
    03 Feb 2022
    हाल ही में प्रदेश में एक आरटीआई आवेदक पर अवैध रूप से जुर्माना लगाया गया था। यह मामला आरटीआई अधिनियम से जुड़ी प्रक्रियात्मक बाधाओं को परिलक्षित करता है। यह भी दिखाता है कि इस कानून को नागरिकों के…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: ये दुःख ख़त्म काहे नहीं होता बे?
    03 Feb 2022
    तीन-तीन साल बीत जाने पर भी पेपर देने की तारीख़ नहीं आती। तारीख़ आ जाए तो रिज़ल्ट नहीं आता, रिज़ल्ट आ जाए तो नियुक्ति नहीं होती। कभी पेपर लीक हो जाता है तो कभी कोर्ट में चला जाता है। ऐसे लगता है जैसे…
  • Akhilesh Yadav
    भाषा
    लोकतंत्र को बचाने के लिए समाजवादियों के साथ आएं अंबेडकरवादी : अखिलेश
    03 Feb 2022
    सपा प्रमुख अखिलेश ने कहा कि, "मैं फिर अपील करता हूं कि हम सब बहुरंगी लोग हैं। लाल रंग हमारे साथ है। हरा, सफेद, नीला… हम चाहते हैं कि अंबेडकरवादी भी साथ आएं और इस लड़ाई को मजबूत करें।"
  • Rahul Gandhi
    भाषा
    मोदी सरकार ने अपनी नीतियों से देश को बड़े ख़तरे में डाला: राहुल गांधी
    03 Feb 2022
    कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि एक किंग हैं, शहंशाह हैं, शासकों के शासक हैं। राहुल गांधी ने दो उद्योगपतियों का उल्लेख करते हुए सदन में कहा कि कोरोना के समय कई…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License