NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
क्रिप्टो करेंसी की कहानी
क्या आप उसे करेंसी कहेंगे जिसे सरकार जारी नहीं करती है? अगर उसे करेंसी नहीं कहेंगे तो क्रिप्टो करेंसी पर इतनी चर्चा क्यों हो रही है?
अजय कुमार
01 Dec 2021
cr

पिछले कुछ दिनों से जितनी चर्चा पैसे से पैसे कमाने वालों ने क्रिप्टो करेंसी पर की है, उतनी चर्चा उन्होंने कभी गरीबी पर नहीं की होगी। आप पूछेंगे क्यों? तो क्रिप्टो करेंसी का चरित्र ही ऐसा है कि सुबह शाम बस यही देखना होता है कि कब क्रिप्टो करेंसी के भाव बढ़े और कब गिरे। जब बढ़े बेचकर पैसा कमा लिया जाए और जब गिरे तो बढ़ने का इंतजार किया जाए। इसके उतार-चढ़ाव का चरित्र ही ऐसा है कि जिनके पास पैसा है, वह इसमें खूब दिलचस्पी ले रहे हैं कि कैसे अपने पैसे को बिना काम धाम के बढ़ा लिया जाए।

जब क्रिप्टो करेंसी की शुरुआत हुई थी तो ऑनलाइन गेमिंग में टोकन के तौर पर क्रिप्टो करेंसी मिलती थी। लेकिन इसका दायरा इतना अधिक बढ़ता चला गया है कि 15 नवंबर को एक बिटकॉइन की कीमत तकरीबन 48 लाख रुपए हो गई।

यही इसका वह पहलू है, जिसने बिटकॉइन की तरफ उन को खूब आकर्षित किया है जिन्हें भागती हुई दुनिया में दूसरों के हक अधिकार और गरीबी से ज्यादा पैसा कमाने से मतलब है। कुबेर नामक भारत में एक क्रिप्टो एक्सचेंज है। जहां पर 80 क्रिप्टो करेंसी खरीदी और बेची जा सकती है। वहां के मालिक का कहना है कि भारत के तकरीबन डेढ़ दो करोड़ लोगों ने क्रिप्टो करेंसी में तकरीबन 44 हजार करोड रुपए का निवेश किया है। इसी तरह से दूसरे क्रिप्टो एक्सचेंज अपने आंकड़े प्रस्तुत करते हैं। लेकिन भारत सरकार की तरफ से निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा है कि सरकार को पता ही नहीं कि क्रिप्टो में कितना निवेश हुआ है। इसी तरह की बात आरबीआई ने भी कही है। आरबीआई और सरकार दोनों क्रिप्टो की गणित को संदिग्ध मान रहे हैं। सरकार ने तो यहां तक कह दिया कि क्रिप्टो करेंसी ही नहीं है। इस संसदीय सत्र में क्रिप्टो करेंसी को रेगुलेट करने से जुड़ा बिल भी आने वाला है। तो चलिए थोड़ा सिलसिलेवार तरीके से समझे कि आखिरकार यह क्रिप्टो करेंसी है क्या?इसी लेकर जो हो-हल्ला मचा है उसकी नीचे दबी सच्चाई क्या है?


क्रिप्टो करेंसी की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। क्रिप्टोग्राफी मूल रूप से एक ग्रीक शब्द है। जिसका मतलब होता है 'एक ऐसी लिखावट जिसे वह पढ़ पाए, जिसे उसके कोड का पता हो। यानी एक तरह की इनकोडेड लिखावट। जिसे जरूरी कोड की मदद से समझा जा सकता है।और वही समझ सकता है जिसके पास इसका कोड हो। यानी यह क्रिप्टोकरेंसी केवल एक ऐसे समुदाय के भीतर ही काम कर सकती है, जो कोड को डिकोड कर सकता हो। बिटकॉइन की तरह की लाइटकॉइन, पीरकॉइन, एथेरियम भी क्रिप्टो करेंसी है। फिलहाल 7000 से अधिक क्रिप्टो करेंसी चलन में है। विशेषज्ञों का मानना है कि संख्या इसकी दोगुनी भी हो सकती है।

यहां सबसे जरूरी बात यह कि इस पर किसी केंद्रीय अथॉरिटी का कंट्रोल नहीं होता है। यानी इसके लिए कोई रिज़र्व बैंक टाइप कंट्रोलिंग अथॉरिटी नहीं होती है। जो यह बताये कि कितनी क्रिप्टोकरेंसी होगी या नहीं होगी। अगर फेक क्रिप्टोकरेंसी जारी की जाएगी तो उसपर कैसे कंट्रोल होगा? कितने बिटकॉइन जारी किये जाने चाहिए और कोई गड़बड़ी आये तो उसके साथ कैसे निपटा जाए।

केंद्रीय अथॉरिटी न होने के आभाव में एक सवाल यह उठता है कि कोई भी व्यक्ति बहुत सारी क्रिप्टोकरेंसी जारी कर सकता है। फेक क्रिप्टोकरेंसी जारी कर सकता है। जैसे अगर रिज़र्व बैंक के सिवाय सबको नोट छापने की इजाजत दे दी जायेगी तो फेक नोटों की बाढ़ आ जाएगी। इसके जवाब में क्रिप्टोकरेंसी के मॉडल में ब्लॉकचेन मॉडल अपनाया जाता है। ब्लॉकचेन मॉडल यानी एक तरह का ग्लोबल लेजर।

एक तरह से खाते की ऐसी किताब जिसे पूरी दुनिया में डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल करने वाले अपनाते हैं। जिसमें हर एक क्रिप्टोकरेंसी का रिकॉर्ड रखा जाता है। यानी जब किसी को क्रिप्टोकरेंसी के तौर पर एक बिटकॉइन भेजा जाता है तो इसका मतलब है कि ग्लोबल लेजर में इसका रिकॉर्ड रखा जा रहा है। जैसे अगर A ने Bको 100 बिटकॉइन भेजे तो यह ब्लॉकचेन के तहत ग्लोबल लेजर में रिकॉर्ड हो जाएगा। उसके बाद A और B चाहे कितनी भी कोशिश कर लें उसका डुप्लीकेट नहीं बना सकते हैं। क्योंकि रिकार्डेड इंट्री का मिलान किया जाएगा और क्रॉस चेक होने पर उसका बाद में इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।

अब सवाल यह भी उठता है कि ब्लॉकचेन में कैसे रिकॉर्ड रखा जाता है? रिकॉर्ड रखने का पैमाना यह है कि कोई भी लेन- देन हो तो सबको पता चल जाए। इसलिए बिटकॉइन देने वाले और लेने वाले के अपने अकॉउंट नंबर की जानकारी पूरे सिस्टम को देनी होती है। साथ में कितने बिटकॉइन का लेन-देन हुआ, इसकी भी जानकारी देनी होती है। चूँकि यह जानकारी इन्क्रिप्टेड तरीके से पब्लिक की जाती है इसलिए इन्क्रिप्टेड मेथड के 'पब्लिक की' के जरिये यह जानकारी सबको मिल जाती है।

इसके अलावा एक 'प्राइवेट की' होती है। इस 'की' यानी कुंजी के जरिये पब्लिक की हुई जानकारी में फेरबदल करने की अनुमति किसी को नहीं मिल पाती है। इसमें फेरबदल वही कर पाते हैं, जिसके पास 'प्राइवेट की' होती है। और 'प्राइवेट की' उसी के पास होती है, जिससे वह लेन-देन जुड़ा होता है। इसलिए किसी अकाउंट के बारें में पब्लिक जानकरी होते हुए भी उसमें तब-तक फेरबदल नहीं की जा सकती है जब तक 'प्राइवेट की' की जानकारी नहीं होती है।

अब मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि यह काम तो कोई भी कर सकता है। केवल इनकोड और डिकोड करने की है तो बात है। लेकिन ऐसा नहीं है। क्रिप्टोकरेंसी डाउनलोड तो आसानी से किया जा सकता है लेकिन उसके बाद का पचड़ा बहुत मुश्किल है। इसकी इनकोडिंग और डिकोडिंग में बहुत अधिक टाइम लगता है। बहुत अधिक बिजली लगती है। यह एक तरह की मैथमेटिकल प्रॉब्लम की एक सीरीज होती है। इसे हल करके ही एक क्रिप्टोकरेंसी हासिल की जाती है। इसे हल करना आसान नहीं होता है। हर क्रिप्टोकरेंसी के लिए एक नए मैथमेटिकल प्रॉब्लम को सॉल्व किया जाता है। यह काम आम कम्प्यूटर के बूते के बस की बात नहीं होती है। इसके लिए विशेष कम्यूटर की जरूरत होती है। इसके जरिये यह प्रॉब्लम सॉल्व होती है।

अब बात करते हैं कि क्या इसे पैसा कहा जा सकता है? इस मुद्दे पर फ्री सॉफ्टवेयर मूवमेंट के अध्यक्ष प्रबीर पुरकायस्थ कहते हैं कि पैसे का इस्तेमाल हम लेन देन के लिए करते हैं। यह एक तरह का एसेट्स होता है। मेरा मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी जैसे कि बिटकॉइन का इस्तेमाल कुछ ही तरह के लेन देन के लिए किया जा सकता है। यह पूरी तरह से लेन देन के लिए नहीं बना है। इससे आप सीधे तौर पर जाकर चावल नहीं खरीद सकते हैं। आप एक बिटकॉइन के बदले जो डॉलर मिलेगा उसी से कुछ खरीद पाएंगे। और केवल बिटकॉइन वही हासिल कर पाएंगे जो विशेष कम्प्यूटर पर मैथमेटिकल प्रॉब्लम हल कर पाएंगे। यानी यह सबके लिए उपलब्ध नहीं है। जबकि पैसा सबके लिए उपलब्ध होता है। आप काम कीजिए और पैसा लीजिए।

क्रिप्टो करेंसी भौतिक तौर पर मौजूद नहीं होता है। पैसे की तरह ऐसी नहीं होती है इसे छुआ जा सके। कंप्यूटर में ही कोड की तरह होती है। जब हम शेयर मार्केट से शेयर खरीदते हैं। तो हमारे शेयर की कीमत उस कंपनी के कामकाज पर निर्भर करती है जिसका हम शेयर खरीदते हैं। शेयर के पीछे कंपनी होती है। कंपनी का कामकाज होता है। लेकिन क्रिप्टो करेंसी के साथ ऐसा नहीं है। वह महज एक तरह का टोकन है। जिसकी कीमत डिमांड और सप्लाई पर काम करती हैं। बिटकॉइन जैसी क्रिप्टो करेंसी सीमित मात्रा में उपलब्ध है। एथिरियम जैसी क्रिप्टो करेंसी असीमित मात्रा में उपलब्ध है। टकटकी लगाकर खालिस डिमांड सप्लाई का खेल देखना है।

इसलिए यह सट्टा बाजार की तरह है, इसकी कीमत में उतार चढ़ाव की संभावना बहुत अधिक होती है। इसलिए इसमें लगाए गए पैसे से कमाई हो भी सकती है और पैसा डूब भी सकता है। साल 2020 में 1 बिटकॉइन की कीमत 6 लाख 68 हजार रुपये है। पिछले साल इन्हीं दिनों यानी 5 मार्च 2019 को 1 बिटकॉइन की कीमत 2 लाख 70 हजार रुपये थी। 15 दिसंबर 2017 को 1 बिटकॉइन की कीमत 12 लाख 59 हजार रुपये थी। ऐसे में आप देख सकते हैं कितनी जल्दी बिटकॉइन की कीमत ऊपर चढ़ती है और नीचे गिरती है।

प्रबीर कहते हैं कि एक बैंक का एक क्रेडिट कार्ड एक सेकंड में तकरीबन 60 हजार लेन देन कर सकता है। लेकिन ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी के सहारे चलने वाले बिटकॉइन के जरिये एक सेकंड में केवल 3 से 7 लेन देन ही हो पाते हैं। यानी इसके जरिये लेन-देन करने में बहुत अधिक टाइम लगता है। बिटकॉइन का सिस्टम अकॉउंट नंबर के सहारे काम करता है। यानी इसमें किसी के नाम का उल्लेख नहीं होता है इसलिए इसका इस्तेमाल गैरक़ानूनी कामों के लिए किया जा सकने की पूरी संभावना है। मनी लॉड्रिंग से लेकर आतंक के लिए पैसा उगाही करने में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। जब किसी देश का इस पर रेगुलेशन ही नहीं है, किसी तरह का इसपर नियंत्रण ही नहीं है तो कोई भी एक बिटकॉइन के बदले रुपये या डॉलर का किसी भी जगह ट्रांसफर करेगा और उसपर किसी तरह की रोक भी नहीं लग पाएगी।

क्रिप्टोकरेंसी एक तरह की टेक्नोलॉजी पर काम करने वाला सिस्टम है तो यह भी साफ है कि इसमें सेंध लगाई जा सकती है। इसे हैक किया जा सकता है। इसे हैक भी किया गया है। एक बार साउथ कोरियन क्रिप्टोकरेंसी को हैक कर लिया गया। जिसमे बहुत सारे लोगों का पैसा डूब गया।

ब्रिटेन और अमेरिका में बिटकॉइन में कारोबार करने की इजाजत है लेकिन रूस और चीन में नहीं। चीन ने तो इस पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। पूरी दुनिया में महज अल सल्वाडोर और क्यूबा ने इसे वैध मुद्रा के तौर पर स्वीकार किया है। भारत की तरफ से संसद के मौजूदा सत्र में क्रिप्टो करेंसी को रेगुलेट करने के लिए मौजूदा सत्र में बिल लाया जा सकता है।

पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग का मीडिया में बयान छपा है। सुभाष गर्ग के मुताबिक क्रिप्टो करेंसी को लेकर के अब भी ढेर सारी जानकारियां जानना जरूरी है। हमारी वास्तविक दुनिया का ढेर सारा हिस्सा डिजिटल दुनिया से भी जुड़ता जा रहा है। इसलिए डिजिटल दुनिया के अंदर कोई ऐसी चीज है जो मुद्रा की तरह काम करने लगे तो वह बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। लेकिन मुद्रा जारी करना संप्रभु राज्य का काम है। जनता का संप्रभुता पर विश्वास होता है। इसे चंद लोगों के हाथों में नहीं छोड़ा जा सकता है।

भारत में मौजूदा समय में कुल 40 क्रिप्टो एक्सचेंज है। यहां की कुल बाजार पूंजी ( Market capitalisation) तकरीबन 212 लाख करोड रुपए की है। टेक्नोलॉजी कंपनी के मुकाबले चार गुने गति से क्रिप्टो का बाजार बढ़ रहा है। क्रिप्टो के 230 स्टार्टअप खुले हैं। यह संख्या दूसरे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में खुले स्टार्ट अप से अधिक है। पिछले 5 साल में क्रिपटो का कारोबार भारत में 39 फ़ीसदी बढ़ा है। यह सारे अनुमान क्रिप्टो एक्सचेंज से मिलने वाले आंकड़ों से विशेषज्ञों ने लगाए हैं। इन अनुमानों का मतलब यह है कि कई सारी खामियां होने के बावजूद भी इसमें अच्छा खासा पैसा लगा है। देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इसे रेगुलेट कैसे करती है?

cryptocurrency
legal tender and cryptocurrency
bitcoin
crytocurrency blockchain techonology

Related Stories

ख़बरों के आगे-पीछे: चुनाव आयोग की साख पर इतना गंभीर सवाल!

क्या Crypto पर अंकुश ज़रूरी है?

क्रिप्टोकरेंसी पर मोदी सरकार का नया बिल निवेशकों को राहत देगा या नुकसान?

कर्नाटक: बिटकॉइन घोटाला ने सियासत में हलचल क्यों मचा दी है?

एक बिटकॉइन बराबर तकरीबन ₹17 लाख, यह सोचिए कि क्या बिटकॉइन पैसा है?

बहुत पेचीदा और ख़तरनाक़ भी है क्रिप्टकरेंसी का खेल !

लिब्रा के सहारे फेसबुक की दुनिया पर राज करने की तैयारी?

फेसबुक की फनी मनी और रियल मनी


बाकी खबरें

  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    पाकिस्तानी क्रिकेटर हसन पर हमले से भारत के लिए सबक
    12 Nov 2021
    वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा आज चर्चा कर रहे हैं T20 वर्ल्ड कप के बारे में, हार की वजह सिर्फ एक खिलाड़ी क्यों? पहले भारतीय खिलाड़ी मोहम्मद शमी, अब पाकिस्तानी खिलाड़ी हसन अली, हार के बाद इन दोनों…
  • Bihar: Minor girl gangraped, one accused in custody
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः नाबालिग लड़की से गैंगरेप, एक आरोपी हिरासत में
    12 Nov 2021
    नालंदा के हिलसा के एसडीपीओ ने न्यूज़क्लिक को बताया कि पीड़िता की मां ने घटना के संबंध में केस दर्ज कराया है। पीड़िता के पुरूष-मित्र को हिरासत में ले लिया गया है, जबकि अन्य दो आरोपियों की तलाश जारी है।
  • Central TUs
    रौनक छाबड़ा
    केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने बजट सत्र के दौरान बेरोज़गारी, मूल्य वृद्धि के ख़िलाफ़ 2-दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है
    12 Nov 2021
    सीटीयू के नेतृत्व की ओर से केंद्र सरकार द्वारा “लोगों के मानव अस्तित्व को बचाए रखने के अधिकार को कमज़ोर करने” के खिलाफ निंदा प्रस्ताव को अपनाते हुए अपनी दस मांगों को पेश किया गया है।
  • ICF
    शशि देशपांडे, गीता हरिहरन
    "लोकतंत्र यानी संवाद, बहस और चर्चा..."
    12 Nov 2021
    लोगों को विभाजनकारी विचारधारा को स्वीकार करने के लिए बरगलाया गया है।
  • Bihar Poisonous Liquor Case
    अनिल अंशुमन
    बिहार ज़हरीली शराब कांड: नहीं थम रहा मौत का सिलसिला, 16 नवंबर को समीक्षा करेगी सरकार
    12 Nov 2021
    ‘ताला लागल बा, पाला खुलल बा’ की तर्ज़ पर जारी है शराबबंदी: भाकपा माले ने विपक्षी महागठबंधन से एकजुट होकर राज्य सरकार को घेरने का किया आह्वान।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License