NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
कोरोना के गंभीर मामलों के लिए WHO शुरू करेगा नई क्लिनिकल ट्रॉयल, दूसरे रोगों में कारगर दवाइयां होंगी शामिल
WHO द्वारा चुनी गई इन तीनों दवाइयों को छोटे क्लिनिकल ट्रायल में इनके सकारात्मक रुझान और इनकी आसानी से उपलब्धता होने की वज़ह से चुना गया है।
संदीपन तालुकदार
12 May 2021
covid

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) "सॉलिडेरिटी" नाम की एक नई क्लिनिकल ट्रायल का संयोजन करने जा रहा है, जिसमें प्रत्याशियों पर कुछ दवाइयों के असर का अध्ययन किया जाएगा। यह दवाइयां पहले से दूसरी बीमारियों के इलाज़ में इस्तेमाल की जा रही हैं। लेकिन अब इनका गंभीर तौर पर कोरोना से पीड़ित मरीज़ों के इलाज़ में इस्तेमाल के लिए परीक्षण किया जा रहा है। 

इन दवाइयों को "पुनरुद्देशित दवाइयां" कहा जाता है। मौजूदा परीक्षण में जांचा जा रहा है कि क्या इन दवाइयां का कोरोना के इलाज़ के लिए भी उपयोग किया जा सकता है या नहीं।

सॉलिडेरिटी ट्रायल में तीन दवाइयों का जल्द ही कई देशों में परीक्षण किया जाएगा। इन दवाइयों को शरीर में सूजन कम करने के लिए जाना जाता है। सूजन, किसी बाहरी संक्रमण से निपटने के लिए हमारे प्रतिरोधक तंत्र द्वारा दी गई प्रतिक्रिया होती है। संक्रमणों से लड़ने के क्रम में प्रतिरोधक तंत्र द्वारा जिन प्रोटीन का रिसाव किया जाता है, उनके चलते यह सूजन आती है।

सॉलिडेरिटी ट्रायल की संचालन समिति को “नॉर्वेजियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ पब्लिक हेल्थ” नियंत्रित कर रहा है। इस संस्थान के वैज्ञानिक निदेशक जॉन-आर्ने रोटिंगन के मुताबिक़, WHO द्वारा चुनी गई इन तीनों दवाइयों को छोटे क्लिनिकल ट्रायल में इनके सकारात्मक रुझान और इनकी आसानी से उपलब्धता होने की वज़ह से चुना गया है। रोटिंगन कहते हैं, "आपको कम से कम कुछ संकेतों की जरूरत होती है, जो बताएं कि इनमें से कुछ दवाइयां काम करेंगी और हमें ऐसी दवाइयों के अध्ययन की जरूरत होती है, जिन्हें ज़्यादा देशों तक पहुंचाया जा सके।"

यहां बताना जरूरी है कि सॉलिडेरिटी की शुरुआत मार्च, 2020 में हुई थी। इस ट्रायल में पहले से कई बीमारियों के खिलाफ़ कारगर एंटीवायरल ड्रग्स शामिल हैं, इन दवाओं का इस्तेमाल कोविड के इलाज़ में भी किया जा सकता है। इस ट्रायल में 30 देशों के 11,000 भागीदारों ने हिस्सा लिया है, जिन्हें कोरोना के चलते भर्ती करवाया गया था। इस ट्रायल में रेमडेसिविर, HIV में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं- लोपिनाविर, रिटोनाविर और हॉयड्रोक्सीक्लोरोक्विन का मिश्रण, मलेरिया की दवाइयां और इंटरफेरॉन (विषाणु रोधक रसायन) को शामिल किया गया था। लेकिन इन एंटीवायरल में किसी ने भी अस्पताल में भर्ती कोरोना के मरीज़ों पर बहुत अच्छी कार्यकुशलता नहीं दिखाई। रोटिंगन के मुताबिक़, "आम सहमति बन रही है कि हम काफ़ी देरी कर चुके थे। एंटीवायरल दवाइयां सिर्फ़ पॉजिटिव टेस्ट के तुरंत बाद लेने से ही फायदा पहुंच सकती हैं।"

अब इस ट्रायल में दवाइयों को बदलने का फ़ैसला किया गया और एंटीवायरल के बजाए ‘प्रतिरोधी निरोधक’ दवाइयों का विकल्प चुना गया।

नई ट्रायल के लिए पहला परीक्षण ‘इनफ्लिक्सिमैब’ का किया जाएगा। इस दवाई का इस्तेमाल रह्यूमेटॉइड आर्थाराइटिस और क्रॉन्स डिसीज़ जैसी स्वप्रतिरक्षित बीमारियों (ऑटोइम्यून डिसीज़) के इलाज़ में किया जाता है। स्वप्रतिरक्षित बीमारियां, वह रोग होते हैं, जिनमें किसी व्यक्ति का प्रतिरोधक तंत्र अपने ऊतकों और कोशिकाओं को रोग जनित समझकर उन्हीं पर हमला शुरू कर देता है। यह दवाई "ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर अल्फा" नाम के प्रोटीन में अवरोधक बनकर काम करती है। इस प्रोटीन का रिसाव प्रतिरोधक तंत्र में मौजूद मौक्रोफेगस नाम की कोशिकाएं करती हैं। इस प्रोटीन से सूजन आती है।

इमटिनिब, दूसरी दवाई है, जिसका परीक्षण किया जाना है। यह कैंसर की दवाई है। इसे परीक्षण में इस आशा के साथ शामिल किया गया है कि इससे कोरोना वायरस और सूजन दोनों पर असर होगा। उम्मीद है कि इमटिनिब इंसानी कोशिकाओं में वायरस के प्रवेश को रोकेगी और साइटोकाइन्स जैसे प्रोटीन की गतिविधि को कम करेगी, जिससे सूजन बढ़ती है।

आर्टेसुनेटे, परीक्षण में शामिल तीसरी दवाई है। इसका इस्तेमाल मलेरिया के खिलाफ़ किया जाता है। आर्टेसुनेटे को भी सूजन-रोधी प्रभावों के लिए जाना जाता है। रोटिंगन का कहना है कि इनमें से हर दवाइयों का उपयोग मानक उपचार के आधार पर कई देशों में किया जाएगा। इस उपचार में फिलहाल डेक्सामेथासोन शामिल है।

इन दवाइयों का उपयोग क्यों?

गंभीर तौर पर कोरोना से पीड़ित लोगों के कई मामलों में देखा गया है कि शरीर का प्रतिरोधक तंत्र ही संक्रमित कोशिकाओं को मारने की कोशिश में स्वस्थ्य कोशिकाओं को मारकर ज़्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। प्रतिरोधक तंत्र संक्रमित कोशिकाओं पर कई हमले करता है, इस प्रक्रिया में यह तंत्र स्वस्थ्य कोशिकाओं और ऊतकों को भी नुकसान पहुंचा देता है।

कोरोना के चलते वेंटिलेटर पर पहुंच चुके मरीज़ों या जिन्हें ऑक्सीजन लगी है, उनकी जीवनरक्षा में डेक्सामेथासोन नाम के स्टेरॉयड को कारगर पाया गया है। यूके में हुई रिकवरी नाम की एक दूसरी क्लिनिकल ट्रायल में इस ड्रग के कोरोना में भी उपयोगी होने का तथ्य खोजा गया था।

REMAP-CAP नाम के एक और बड़े स्तर के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया कि ऐसी दवाइयां जो इंटरल्यूकिन 6 (IL-6) रिसेप्टर को रोक सकती हैं, उनसे गंभीर तौर पर कोरोना से पीड़ित मरीज़ों में कई की जान बचाई जा सकती है। IL-6 प्रतिरोधक तंत्र का एक अहम प्रोटीन है।

इंपीरियल कॉलेज, लंदन में एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और REMAP-CAP की संचालन समिति में शामिल एंथनी गॉर्डन के मुताबिक़, "डेक्सामेथासोन या IL-6 रिसेप्टर ब्लॉकर्स के साथ डेक्सामेथासोन स्टेरॉयड को दिया जाना कई देशों में अस्पताल में भर्ती कोरोना के मरीज़, जिन्हें सांस लेने में सहायता की जरूरत है, उनके लिए मानक इलाज़ बन गया है।"

गॉर्डन ने यह भी बताया कि इमाटिनिब को REMAP-CAP में भी शामिल किया जाएगा। उनका मानना है कि इससे फेंफड़ों के आसपास होने वाले द्रव्य के रिसाव को रोका जा सकेगा। इस अध्ययन में नामिलुमाब को भी शामिल किया जाएगा, जो GM-CSF नाम के प्रतिरोधाी प्रोटीन को रोकने का काम करेगा। इससे कोरोना से संक्रमित होने के बाद होने वाली साइटोसिन की गतिविधियों में कमी आने की उम्मीद है।

इन सभी दवाइयों का लक्ष्य प्रतिरोधक तंत्र पर नियंत्रण पाना है। लेकिन शोधार्थियों को इस बात की खास सावधानी रखनी होगी कि इनसे प्रतिरोधक तंत्र इतना कमज़ोर ना हो जाए कि शरीर में दूसरे तरह के संक्रमण घर करने लगें।

इस लेख को मूल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

WHO to Begin Clinical Trial on New Repurposed Drugs for Severe COVID-19 Cases

COVID-19
corona vaccinne
corona drug
corona critical patient
WHO

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के फ़ैक्ट चेक का फ़ैक्ट चेक
    13 Jan 2022
    सूचना एवं लोक संपर्क विभाग का फ़ैक्ट चेक ग़लत और भ्रामक है। इससे एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर उठता है कि उत्तर प्रदेश का सूचना एवं लोक संपर्क विभाग भाजपा की आइटी सेल की तरह व्यवहार क्यों कर रहा है?
  • Palestine
    पीपल्स डिस्पैच
    ब्रिटेन: फ़िलिस्तीन के ख़िलाफ़ यूज किए जाने वाले हथियार बनाने वाली इज़राइली फ़ैक्ट्री बंद, आगे भी जारी रहेगा अभियान
    13 Jan 2022
    फ़िलिस्तीन एक्शन ग्रुप ने अपने अभियान के हिस्से के रूप में कारखाने पर कब्ज़ा करने, नाकेबंदी करने और तोड़फोड़ करने जैसे प्रत्यक्ष कार्रवाइयों की एक श्रृंखला को अंजाम दिया, जो आख़िरकार इसके बेचने और…
  • CST
    एम. के. भद्रकुमार
    पुतिन ने कज़ाकिस्तान में कलर क्रांति की साज़िश के ख़िलाफ़ रुख कड़ा किया
    13 Jan 2022
    कज़ाकिस्तान की घटनाओं पर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की नाराज़गी अतार्किक थी।
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    हासिल किया जा सकने वाला स्वास्थ्य का सबसे ऊंचा मानक प्रत्येक मनुष्य का मौलिक अधिकार है
    13 Jan 2022
    कोरोना महामारी की वजह से संयुक्त राज्य अमेरिका ब्राजील और भारत में सबसे अधिक मौतें हुई हैं। इन मौतों के लिए कोरोना महामारी से ज्यादा जिम्मेदार इन देशों का स्वास्थ्य का सिस्टम है। 
  • jammu and kashmir
    अनीस ज़रगर
    जम्मू में जनजातीय परिवारों के घर गिराए जाने के विरोध में प्रदर्शन 
    13 Jan 2022
    पीड़ित परिवार गुज्जर-बकरवाल जनजाति के हैं, जो इस क्षेत्र के सबसे हाशिए पर रहने वाले समुदायों में से एक हैं। यह समुदाय सदियों से ज्यादातर खानाबदोश चरवाहों के रूप में रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License