NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
उत्पीड़न
शिक्षा
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है
छात्र ऋण अश्वेत एवं भूरे अमेरिकिर्यों को गैर-आनुपातिक रूप से प्रभावित करता है। समय आ गया है कि इस सामूहिक वित्तीय बोझ को समाप्त किया जाए, और राष्ट्रपति चाहें तो कलम के एक झटके से ऐसा कर सकते हैं।
सोनाली कोल्हटकर
10 May 2022
Education

“यदि अमेरिका में सर्दी-जुकाम चल रहा है, तो समझ लीजिये कि अश्वेत समुदाय को फ्लू है,” यह कहना था इंडिया वाल्टन का, जो बता रही थीं कि कैसे अफ्रीकी मूल के अमेरिकियों को छात्र ऋण का बोझ असमान रूप से वहन करना पड़ता है। वाल्टन, जिन्होंने पिछले वर्ष न्यूयॉर्क के बफैलो में मेयर पद की प्राथमिक प्रतिस्पर्धा में एक डेमोक्रेटिक पदग्राही को हराने के लिए उत्कृष्ट रूप से एक समाजवादी मंच पर प्रचार अभियान चलाया था। आजकल वे रूट्सएक्शन.ओआरजी के साथ एक वरिष्ठ रणनीतिक आयोजक के रूप में संगठन के “विदाउट स्टूडेंट डेब्ट” अभियान का नेतृत्व कर रही हैं। उनका कहना था, “4.7 करोड़ अमेरिकी छात्र ऋण लेते हैं, लेकिन कर्ज का बोझ अश्वेतों और भूरे लोगों पर असमान रूप से पड़ता है।”

एजुकेशन डेटा इनिशिएटिव के मुताबिक, वाल्टन ने जिन 4.7 करोड़ अमेरिकियों का हवाला दिया था, उनमें से लगभग 92% (4.3 करोड़ अमेरिकियों) ने उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए अमेरिकी सरकार से 1.6 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक का कर्ज ले रखा है। प्रति कर्जदार पर औसतन संघीय ऋण आकार 37,113 डॉलर बैठता है, लेकिन जब निजी ऋण कर्जदारों के साथ इसका औसत निकालते हैं तो यह संख्या बढ़कर 40,000 डॉलर से भी अधिक पहुँच जाती है। 

अब चूँकि आय और धन की खाई को नस्लीय आधार पर इतने विरोधी रूप में निरुपित किया गया है कि इस बात में कहीं भी कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि ऋण लेने वालों के बीच में अश्वेत एवं भूरे रंग के छात्र असमान रूप से प्रतिनधित्व करते हैं। कर्ज लेने वालों में महिलाएं भी बड़ी तादाद में हैं। नस्लीय और लैंगिक मोड़ पर खड़े लोग इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं। वाल्टन ने बताया, “एक औसत अश्वेत महिला छात्र ऋण में 35,000 डॉलर से अधिक कर्ज लेती है।”

सभी स्नातक छात्रों में से करीब एक तिहाई छात्र कालेज या विश्वविद्यालय में प्रवेश पाने के लिए संघीय सरकार से उधार पर पैसे क्यों लेते हैं के पीछे की सरल वजह यह है कि उच्च शिक्षा की लागत में इस बीच नाटकीय ढंग से वृद्धि हुई है। एक गहन विश्लेषण के मुताबिक, यह पिछली आधी सदी में मुद्रास्फीति की तुलना में पांच गुना तेजी से बढ़ा है। और यदि उच्च शिक्षा की कीमत का बिल्ला मुद्रास्फीति के अनुरूप रहा होता, तो चार वर्ष के सार्वजनिक या निजी स्कूल में प्रवेश पाने के लिए प्रति वर्ष क्रमशः 10,000 या 20,000 डॉलर के करीब ही खर्च आता। इसके बजाए, जहाँ एक तरफ सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में लागत तुलनात्मक रूप से अभी भी कम बनी हुई है, वहीं निजी स्कूलों की लागत 50,000 डॉलर प्रति वर्ष से अधिक हो सकती है।

चूँकि उच्च शिक्षा की आसमान छूती कीमतों के साथ मजदूरी नहीं बढ़ी है, ऐसे में छात्र ऋण का आकार लगातार बढ़ता जा रहा है क्योंकि कर्जदारों के लिए इन ऋणों को चुका पाना लगातार असंभव होता जा रहा है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि कुछ लोग आत्महत्या के बारे में विचार करने लगे हैं क्योंकि उनके सामने दसियों हजार डॉलर का भुगतान कर पाने में असमर्थता की विकट संभावनाएं मुहं बाए खड़ी हैं।

नतीजे के तौर पर छात्र ऋण, चिकित्सा ऋण या बढ़ते किराए को चुका पाने में असमर्थता कि तरह ही कहीं न कहीं लोगों के कल्याण के बजाय वाल स्ट्रीट के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन की गई पूंजीवादी, बाजार-संचालित व्यवस्था की ही एक दूसरी विशेषता के तौर पर तैयार की गई है। और, यह दोहराता है – ये वित्तीय तनाव मिश्रित रंग के लोगों को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। वाल्टन ने कहा, “यह दुनिया के सबसे धनी देश के माथे पर एक धब्बा है, कि हम अपने लोगों को बुनियादी सेवाएं तक प्रदान कर पाने में असमर्थ हैं।”

इस बीच, अपने चुनावी अभियान के बाद से ही, राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कर्ज के बोझ से दबे अमेरिकियों को संकेत दिया था कि वे संघीय छात्र ऋणों को माफ़ करने के अपने चुनावी अभियान के वायदे को पूरा करने जा रहे हैं। उनका प्रारंभिक अभियान का वादा 50,000 डॉलर तक के ऋणों को माफ़ करने का था, जो नाटकीय रूप से घटकर सिर्फ 10,000 डॉलर तक सिमट गया है। वाल्टन का इस बारे में कहना है, “हम जिस चीज की मांग कर रहे हैं, जो हम मांग कर रहे हैं, वह यह है कि सभी संघीय गारंटीशुदा छात्र ऋण को रद्द कर दिया जाये,” न कि सिर्फ एक हिस्से को।

जैसा कि पूर्वानुमान था, कॉर्पोरेट मीडिया संस्थान अपने हिस्से के काम के तौर पर बाइडेन को कर्ज माफ़ी के विचार को त्यागने के लिए मदद करने वाली भूमिका में जुटे हुए हैं। भले ही अमेरिकियों के एक छोटे से हिस्से को ही ऐसा महसूस होता है कि कुछ लोगों के ऋणों को माफ़ कर देना अनुचित है क्योंकि अन्य लोगों ने उन्हें चुकता करने के साधन खोजे हैं, लेकिन मीडिया संस्थानों ने इस मुद्दे को तूल दे दिया है।

वाल्टन के अनुसार यह तर्क अपने आप में “वैध नहीं है।” कालेजों की उच्च लागत और कम वेतन का हवाला देते हुए वे कहती हैं, “हम लोग वैसी आर्थिक स्थिति में नहीं हैं, जो अपने छात्र ऋणों का भुगतान चुकता कर देने का ताना मारते प्रतीत होते हैं।” 

इसके अलावा, कुछ मीडिया विद्वान छात्र ऋण को समाप्त किये जाने की मांग को एक कट्टरपंथी विचार के तौर पर ठप्पा लगा रहे हैं, जैसे कि “पुलिस का वित्तपोषण बंद करो”, या “आईसीई को खत्म करो” (इनमें से कोई भी वास्तव में रेडिकल नहीं है)। डेविड फ्रुम ने अटलांटिक में अपने लेख में दावा किया है कि छात्र ऋण को खत्म करने का आह्वान वामपंथी कार्यकर्ताओं के द्वारा बाइडेन के लिए बिछाया गया एक “जाल” है। उन्होंने विचित्र रूप से इसकी तुलना फ्लोरिडा के गवर्नर रान डेसेंटिस जैसे जीओपी नेताओं के द्वारा छेड़े जा रहे दक्षिणपंथी सांस्कृतिक युद्ध के साथ की है।

जिस प्रकार से डेसेंटिस के द्वारा अपने कट्टर होमोफोबिक एवं ट्रांसफोबिक मतदाता आधार से राजनीतिक अंक हासिल करने के लिए ट्रांसजेंडर युवाओं को निशाने पर लिया जा रहा है, क्या कुछ उसी प्रकार से बाइडेन 4.3 करोड़ अमेरिकी छात्रों के ऋणों को मिटाने जा रहे हैं? यदि ऐसा कुछ नहीं है तो जीओपी कर्जमाफी को ठीक इसलिए विरोध कर सकता है क्योंकि इस प्रकार की पहल बड़ी मात्रा में प्रभावित अश्वेत एवं भूरे लोगों को लाभ पहुंचा सकता है।

मौजूदा समय में अमेरिकी जनता अर्थव्यस्था की स्थिति को लेकर चिंतित है और इसके लिए वे बाइडेन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। ऐसे मौके पर छात्र ऋण माफ़ी एक बिना दिमाग वाली बात होगी। यह न केवल उच्च शिक्षा के लिए पूर्वव्यापी सरकारी मदद को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है – जो कि टैक्स डॉलर के रचनात्मक इस्तेमाल के लिए, उदहारण के लिए जीवाश्म ईंधन उद्योग की तुलना में– यह एक आर्थिक प्रोत्साहन की राशि भी मानी जा सकती है। कम ऋण भुगतान के साथ, कर्जदारों के पास अपनी जरूरतों पर खर्च करने के लिए अधिक आय उपलब्ध होगी। उच्च मुद्रास्फीति के इस दौर में, कोई भी अतिरिक्त आय घरेलू वित्तपोषण को मदद करने जा रही है।

जैसा कि डेमोक्रेट्स के लिए सदन और सीनेट में अपनी मामूली बढ़त को नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में बरकारर रख पाना काफी क्षीण नजर आ रही हैं, ऐसे में यह एक स्पष्ट चुनावी रणनीति हो सकती है, भले ही नैतिक रूप से यह कोई बुद्धिमानी भरा फैसला न हो, कि छात्र ऋण को माफ़ कर दिया जाये, जिसने अनेकों लोगों की जिंदगियों को प्रभावित कर रखा है, और विशेषकर अश्वेतों और भूरे अमेरिकिर्यों की जिंदगी को। चुनावी सर्वेक्षण दर्शाते हैं कि इसके लिए जबर्दस्त समर्थन मिल रहा है।

जीओपी की ओर से कर्जमाफी पर प्रतिक्रिया “समाजवाद” के ठप्पे से आगे नहीं जाने वाली है। रिपब्लिकन की ओर से यह दावा भी किया जा रहा है कि बाइडेन के पास ऋण को रद्द करने के कार्यकारी अधिकार नहीं हैं– जो कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निरंतर कार्यकारी अतिरेक की रौशनी में उन्हें हास्यास्पद स्थिति में खड़ा करता है। लेकिन, रिपब्लिकन की ओर से छात्र ऋण को रद्द करने के लियए बाइडेन के कार्यकारी अधिकार क्षेत्र को विफल करने के लिए हाल ही में एक विधेयक पेश किया गया था। इसके जवाब में विश्लेषकों ने बताया है कि रिपब्लिकन पार्टी अनजाने में स्वीकार किया है कि राष्ट्रपति के पास वास्तव में ऐसा करने के लिए क़ानूनी अधिकार हैं।

वाल्टन ने कहा, “1964 का उच्च शिक्षा अधिनियम राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वे अपने शिक्षा सचिव को व्यापक रूप से ऋण माफ़ करने के लिए निर्देशित कर सकते हैं। असल में, पिछले दो वर्षों से, बाइडेन ने इसी अधिकार का इस्तेमाल कर महामारी से संबंधित वित्तीय तकलीफों के मद्देनजर संघीय छात्र ऋण के भुगतान पर रोक में इस्तेमाल किया था। 

फिर भी, यह ओबामा काल के शिक्षा विभाग के सामान्य सलाहकार चार्ली रोज को यह दावा करने से नहीं रोक सका कि छात्र ऋण को खत्म करने के लिए राष्ट्रपति की कार्यवाही क़ानूनी तौर पर सवालों के घेरे में है और सुझाया है कि कर्ज देने वाली कंपनियां चाहें तो प्रशासन के खिलाफ मुकदमा ठोंक सकती हैं।

वाल्टन कहती हैं, “मैं चिंतित हूँ। मुझे नहीं पता कि किन कारणों से [ऋणों का] व्यापक रद्दीकरण नहीं [किया] जा रहा है।” रिपब्लिकन एक पल भी अपने ध्यान को यह सुनिश्चित करने से नहीं डिगाते हैं कि धन का उर्ध्वगामी प्रवाह धनी श्वेत अभिजात वर्ग की ओर बना रहे। और डेमोक्रेट्स अक्सर ही कई बार दूसरी दिशा में विपरीत बल प्रदान कर पाने में विफल रहते हैं।

सोनाली कोल्हाटकर एक टेलीविजन एवं रेडियो शो “राइजिंग अप विद सोनाली,” की संस्थापक, मेजबान और निर्मात्री हैं जिसे फ्री स्पीच टीवी और पैसिफिक स्टेशनों पर प्रसारित किया जाता है। आप इंडिपेंडेंट मीडिया इंस्टीट्यूट में इकॉनमी फॉर आल परियोजना के लिए  राइटिंग फेलो हैं।

इस लेख को इकॉनमी फॉर आल के द्वारा तैयार किया गया था, जो कि इंडिपेंडेंट मीडिया इंस्टीट्यूट की एक परियोजना है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Why Cancelling Student Debt is a Matter of Racial Justice

US
debt
Students loan
education loan
Racism
USA

Related Stories

इतवार की कविता : "फिर से क़ातिल ने मेरे घर का पता ढूंढ लिया..."

अफ़ग़ानिस्तान: गढ़े गये फ़सानों के पीछे की हक़ीक़त

अमेरिका में फ्लॉयड की बरसी पर रखा गया मौन, निकाली गईं रैलियां

फ्लॉयड हत्या मामला: सात जूरी सदस्यों से फिर से होंगे सवाल-जवाब


बाकी खबरें

  • गुजरात: धर्म-परिवर्तन क़ानून को लेकर हाईकोर्ट और सरकार के बीच क्या विवाद है?
    सोनिया यादव
    गुजरात: धर्म-परिवर्तन क़ानून को लेकर हाईकोर्ट और सरकार के बीच क्या विवाद है?
    29 Aug 2021
    धर्म-परिवर्तन के नए क़ानून पर हाईकोर्ट की सख़्ती से गुजरात सरकार सकते में है। कानून के कई प्रावधानों पर हाईकोर्ट की रोक के ख़िलाफ़ राज्य की विजय रुपाणी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा की है।
  • 200 हल्ला हो: अत्याचार के ख़िलाफ़ दलित महिलाओं का हल्ला बोल
    रचना अग्रवाल
    200 हल्ला हो: अत्याचार के ख़िलाफ़ दलित महिलाओं का हल्ला बोल
    29 Aug 2021
    "जाति के बारे में क्यों ना बोलूं सर जब हर पल हमें हमारी औक़ात याद दिलाई जाती है..."
  • रोटी के लिए जद्दोजहद करते खाना पहुंचाने वाले हाथ
    समृद्धि साकुनिया
    रोटी के लिए जद्दोजहद करते खाना पहुंचाने वाले हाथ
    29 Aug 2021
    नई श्रम सुधार संहिता के दायरे में गिग वर्कर्स को लाए जाने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा के लाभ प्रदान करने के बावजूद फुड डिलीवरी कर्मचारियों का शोषण बदस्तूर है, खासकर महामारी के बाद से। समृद्धि साकुनिया…
  • अफ़गानिस्तान: ‘ग्रेट गेम’  खेलने की सनक में अमेरिका ने एक देश को तबाह कर दिया
    जॉन पिलगर
    अफ़गानिस्तान: ‘ग्रेट गेम’  खेलने की सनक में अमेरिका ने एक देश को तबाह कर दिया
    29 Aug 2021
    कुछ दशक पहले अफ़गानिस्तान की अवाम ने अपनी आज़ादी ली थी, लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देशों की महत्वाकांक्षाओं ने उसे तबाह कर दिया
  • अन्न महोत्सव: मुफ़लिसी का मंगलगान, सरकारी खर्च पर हिंदुत्व प्रचार
    असद रिज़वी
    अन्न महोत्सव: मुफ़लिसी का मंगलगान, सरकारी खर्च पर हिंदुत्व प्रचार
    29 Aug 2021
    “उतना ही खाद्यान्न मुफ़्त मिला जितना पहले मिलता आ रहा था। मुफ़्त सिर्फ़ एक थैला मिला है, जो पहले नहीं मिला था। थैला देने के बदले सरकार अगर मुफ़्त खाद्यान्न बढ़ा कर देती तो ज़्यादा अच्छा होता।”
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License