दर्जन से ज्यादा किसान संगठनों की इस बेमिसाल मोर्चेबंदी में गांधी, भगत सिंह और अम्बेडकर की वैचारिकी की त्रिवेणी दिखाई देती है. क्या भारतीय राजनीति और राजनेता, खासकर विपक्ष विचारों की इस अनोखी त्रिवेणी से कुछ सीखेगा? वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश का विश्लेषण:
तमाम मुश्किलों और बड़ी चुनौतियों के बावजूद मौजूदा किसान आंदोलन ने आजादी के बाद के भारत में सत्याग्रह और प्रतिरोध की नयी संस्कृति का आगाज़ किया है. दर्जन से ज्यादा किसान संगठनों की इस बेमिसाल मोर्चेबंदी में गांधी, भगत सिंह और अम्बेडकर की वैचारिकी की त्रिवेणी दिखाई देती है. क्या भारतीय राजनीति और राजनेता, खासकर विपक्ष विचारों की इस अनोखी त्रिवेणी से कुछ सीखेगा? वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश का विश्लेषण:
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