NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
भारत बंद से पहले चंद्रशेखर का विरोध मार्च, कहा-किसी को आरक्षण ख़त्म नहीं करने देंगे
चंद्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में अंबेडकरवादी दलित संगठनों ने 23 फरवरी को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है और मांग की है कि सरकार इस फैसले को निरस्त करने के लिए एक अध्यादेश लाए।
प्रणिता
17 Feb 2020
Chandra Sekhar

दिल्ली : सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ भीम आर्मी के नेतृत्व में रविवार को दिल्ली में मंडी हाउस से जंतर मंतर तक विरोध मार्च निकाला गया। यह मार्च 23 फरवरी के भारत बंद से पहले एक संकेतिक विरोध प्रदर्शन था। भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि आज भी लोग अगर लाठी, गोली, जेल और मुकदमें से डरे तो हमारी आने वाली पीढ़ी गुलाम पैदा होगी।

मार्च को संबोधित करते हुए उन्होंने "पदोन्नति में आरक्षण बचाने, सीएए-एनआरसी-एनपीआर को हटाने और संविधान की रक्षा करने" का आह्वान किया।

आपको बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि राज्य सरकारें सरकारी सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं हैं। इसी के विरोध में भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की अगुवाई में मंडी हाउस से जंतर मंतर तक यह जुलूस निकाला गया। आज़ाद के नेतृत्व में अंबेडकरवादी दलित संगठनों ने 23 फरवरी को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है और मांग की है कि सरकार इस फैसले को निरस्त करने के लिए एक अध्यादेश लाए।

आज़ाद ने कहा, ‘‘वक्त आ गया है कि एसी/एसटी/ओबीसी एवं अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के लोग अपने अधिकारों के लिए एक साथ आएं। भारतीय जनता पार्टी देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्र आंबेडकर के संविधान से चलेगा और यहां यह आंदोलन नहीं रुकेगा। 23 फरवरी को बड़ा आंदोलन होगा और यह शांतिपूर्ण होगा।’’

सुनिये चंद्रशेखर ने अपने संबोधन में और क्या कहा..

मार्च में भीम आर्मी के प्रवक्ता हरजीत सिंह भट्टी ने कहा, ‘‘शीर्ष अदालत का फैसला पूरी तरह से संविधान में समानता के अधिकार के प्रावधान के खिलाफ है। हम लोग चाहते हैं कि सरकार इस फैसले के खिलाफ संशोधन लाए।’’

शीर्ष अदालत ने यह फैसला उत्तराखंड सरकार के पांच सितंबर, 2012 के फैसले के संबंध में दायर याचिकाओं पर दिया था। उस समय उत्तराखंड में विजय बहुगुणा के नेतृत्व कांग्रेस सरकार थी। उत्तराखंड सरकार के फैसले में राज्य में सरकारी सेवाओं के सभी पदों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को आरक्षण दिए बिना भरने के लिए कहा गया था।

सरकार के इस फैसले को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी जिसने इसे खारिज कर दिया था। लेकिन इसके बाद बाद में बीजेपी सरकार हाईकोर्ट के फ़ैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई। और सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फ़ैसला रद्द कर दिया।

इसे पढ़ें :प्रमोशन में आरक्षण : उत्तराखंड की भाजपा सरकार अपने ही जाल में उलझी

केंद्र में भाजपा सरकार द्वारा लागू नागरिकता (संशोधन) अधिनियम पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार न केवल मुस्लिम भाइयों को परन्तु एससी, एसटी समुदायों को भी वोट वंचित करने की कोशिश कर रही है।

भीम आर्मी के कानूनी सलाहकार, महमूद प्राचा, जो मार्च के लिए उपस्थित थे, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 7 फरवरी के फैसले को "संविधान विरोधी" कहा।

सुनिए वो क्या कह रहे हैं

<

मार्च में मुख्य रूप से दिल्ली और उत्तर प्रदेश के प्रदर्शनकारियों की भागीदारी देखी गई।
अपना विरोध दर्ज कराने के लिए नरेला से आए गोपीराम सांवरिया ने कहा, 'वे (सरकार) नहीं चाहते कि हम कुदाल छोड़ और कलम उठाएं। वे हमारे बीच मतभेदों को पैदा कर रहे है। यही कारण है कि मैं यहां आया हूं। उन्होंने कहा इसके खिलाफ़ एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। ”

गीता (बदला हुआ नाम), मार्च में कम महिला प्रदर्शनकारियों में से एक थी। उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया, “मैं इस सरकार के कामकाज के तरीके का विरोध करती हूं। सत्ता का उनका अनर्गल उपयोग - जैसे कि जामिया में हुआ - भयावह है। ”

उन्होंने कहा “आज यहाँ महिलाएँ कम हैं। लेकिन वे बड़ी संख्या में शाहीन बाग जैसे दिन रात के प्रदर्शन में वो मौजूद हैं। वे इस प्रतिरोध का हिस्सा हैं।"

कुछ प्रदर्शनकारियों ने नागरिकता (संशोधन) कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी के खिलाफ नारे लगाए।

वे ‘गोधरा हमको याद है’, ‘जामिया हमको याद रहेगा’, ‘कश्मीर हमको याद रहेगा’, ‘कश्मीर में हिंसा नहीं सहेंगे’, ‘यूपी में हिंसा नहीं चलेगी’ और ‘मॉब लिंचिंग नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगा रहे थे। इस दौरान कई संस्कृति कर्मी भी इस प्रदर्शन में पहुंचे और उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से अपना प्रतिरोध दर्ज कराया।

दिल्ली के लक्ष्मी नगर निवासी महेश अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ आये थे। वो अपने छह साल के छोटे बेटे आतिश के साथ एक बड़े समूह का नेतृत्व करते हुए 'जय भीम' और 'जय वाल्मीकि, जय रविदास' जैसे नारे लगा रहे थे। महेश ने कहा, "मैं अपने बच्चों को संविधान के महत्व को समझने के लिए लाता हूं। उन्हें यह समझने की जरूरत है कि आरक्षण का मतलब समानता क्यों है और हमें अपने अधिकारों के लिए क्यों लड़ना है। ”

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ )

Chandrashekhar Azad
Bhim Army
Bharat Bandh
BJP
Supreme Court
Reservation in promotions
M Nagaraj Case
CAA
NRC
NPR

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

लंबे संघर्ष के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायक को मिला ग्रेच्युटी का हक़, यूनियन ने बताया ऐतिहासिक निर्णय

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?


बाकी खबरें

  • Women Hold Up More Than Half the Sky
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    महिलाएँ आधे से ज़्यादा आसमान की मालिक हैं
    19 Oct 2021
    हाल ही में जारी हुए श्रम बल सर्वेक्षण पर एक नज़र डालने से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली 73.2% महिला श्रमिक कृषि क्षेत्र में काम करती हैं; वे किसान हैं, खेत मज़दूर हैं और कारीगर हैं।
  • Vinayak Damodar Savarkar
    डॉ. राजू पाण्डेय
    बहस: क्या स्वाधीनता संग्राम को गति देने के लिए सावरकर जेल से बाहर आना चाहते थे?
    19 Oct 2021
    बार-बार यह संकेत मिलता है कि क्षमादान हेतु लिखी गई याचिकाओं में जो कुछ सावरकर ने लिखा था वह शायद किसी रणनीति का हिस्सा नहीं था अपितु इन माफ़ीनामों में लिखी बातों पर उन्होंने लगभग अक्षरशः अमल भी किया।
  • Pulses
    शंभूनाथ शुक्ल
    ‘अच्छे दिन’ की तलाश में, थाली से लापता हुई ‘दाल’
    19 Oct 2021
    बारिश के चलते अचानक सब्ज़ियों के दाम बढ़ गए हैं। हर वर्ष जाड़ा शुरू होते ही सब्ज़ियों के दाम गिरने लगते थे किंतु इस वर्ष प्याज़ और टमाटर अस्सी रुपए पार कर गए हैं। खाने के तेल और दालें पहले से ही…
  • migrant worker
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कश्मीर में प्रवासी मज़दूरों की हत्या के ख़िलाफ़ 20 अक्टूबर को बिहार में विरोध प्रदर्शन
    19 Oct 2021
    "अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद घाटी की स्थिति और खराब हुई है। इससे अविश्वास का माहौल कायम हुआ है, इसलिए इन हत्याओं की जिम्मेवारी सीधे केंद्र सरकार की बनती है।”
  • Non local laborers waiting for train inside railwaysation Nowgam
    अनीस ज़रगर
    कश्मीर में हुई हत्याओं की वजह से दहशत का माहौल, प्रवासी श्रमिक कर रहे हैं पलायन
    19 Oct 2021
    30 से अधिक हत्याओं की रिपोर्ट के चलते अक्टूबर का महीना सबसे ख़राब गुज़रा है, जिसमें 12 नागरिकों की हत्या शामिल हैं, जिनमें से कम से कम 11 को आतंकवादियों ने क़रीबी टारगेट के तौर पर मारा है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License