NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आंदोलनरत किसानों के साथ महिला संगठन भी एकजुट, मोदी सरकार को लिखा खुला पत्र
महिला संगठनों ने किसानो के साथ अपनी एकजुटता जारी करते हुए कहा: “हम किसानों के संघर्ष के बर्बर दमन की,  और इतनी कड़ी सर्दी मे आँसू गैस और पानी के गोले फेंकने की कड़ी निंदा करते हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
30 Nov 2020
आंदोलनरत किसानों के साथ महिला संगठन भी एकजुट

दिल्ली: देशभर के कई महिला संगठनों ने रविवार को मोदी सरकार को एक खुली चिठ्ठी लिखी और किसानों के आंदोलन पर दमनात्मक कार्रवाई की निंदा की। इसमें ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमेन्स एसोसिएशन (ADWA), नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमेन (NFIW ) और ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वुमेन्स एसोसिएशन (AIPWA) सहित कई अन्य महिलाओं के संगठनों ने हस्ताक्षर किए हैं।

महिला संगठनों ने किसानों के संघर्ष के मद्देनजर अपनी एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा: “हम किसानों के संघर्ष के बर्बर दमन की,  और इतनी कड़ी सर्दी मे आँसू गैस और पानी के गोले फेंकने की कड़ी निंदा करते हैं। बीजेपी-आरएसएस केंद्र सरकार और बीजेपी यूपी और हरियाणा राज्य सरकारों ने भी शांतिपूर्ण किसानों पर, जो अपनी उचित मांगों के लिए दिल्ली पहुंचना चाहते हैं, अभूतपूर्व बर्बरता का उदाहरण पेश किया है।"

कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका पर जोर देते हुए, पत्र में कहा गया है, “महिलाएं, भले ही किसानों के रूप में मान्यता प्राप्त न हों, कृषि कार्यों में समान रूप से संलग्न हैं। महिलाओं की एक बड़ी संख्या अभी भी "अदृश्य योगदानकर्ताओं" के रूप में ही बनी हुई है। कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है क्योंकि वे कृषि श्रम बल का 33% और स्वरोजगार किसानों का 48% हिस्सा है। ”

इस पत्र में कहा गया है, '' किसान लगातार संकट से जूझ रहे हैं और महामारी से निपटने के लिए आपकी सरकार द्वारा उठाए गए अनियोजित और खतरनाक कदमो  से आर्थिक प्रभाव पड़ रहा है। इसने कृषि पर निर्भर परिवारों को गंभीर ऋणग्रस्तता में डाल दिया है और इसके परिणामस्वरूप किसानों की आत्महत्या बढ़ गई है।"

नीचे पूरा पत्र पढ़ें:

महिला संगठनों द्वारा प्रधान मंत्री को खुला पत्र

दिनांक: 29 नवंबर, 2020

सेवा में ,

श्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री

हम, निम्नहस्ताक्षरित राष्ट्रीय महिला संगठन ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं पर आपकी नीतियों के प्रतिकूल प्रभाव और आपकी सरकार द्वारा हाल ही में पारित तीन किसान विरोधी कानूनों के बारे में बहुत गहरे से चिंतित हैं। महिलाएं, भले ही किसान के रूप में न पहचानी जाती हों,  लेकिन कृषि कार्यों में समान रूप से शामिल हैं। महिलाओं की एक बड़ी संख्या अभी भी "अदृश्य योगदानकर्ताओं" के रूप में बनी हुई है। कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है क्योंकि वे कृषि श्रम बल का 33% और स्वरोजगार किसानों का 48% हिस्सा है।

किसान लगातार कृषि संकट से और महामारी से निपटने के लिए आपकी सरकार द्वारा उठाए गए अनियोजित और कठोर उपायों के आर्थिक प्रभाव से जूझ रहे हैं। इन कड़े कदमों ने कृषि पर निर्भर परिवारों को गंभीर ऋणग्रस्तता की स्थिति में डाल दिया है और इसके परिणामस्वरूप किसानों की आत्महत्या बढ़ गई है। आत्महत्या प्रभावित परिवारों की महिला किसान पूरी तरह से दयनीय स्थिति में हैं। महिलाएं जमीनों की मालिक नहीं हैं। इसलिए उन्हें ऋणग्रस्तता और आत्महत्या की दोहरी आपदा से निपटने के लिए सरकारों से कोई मदद नहीं मिलती है। आवश्यक वस्तुओं के निरंतर बढ़ते मूल्य, बेरोजगारी और भूख के कारण महिलाओं और वंचित परिवारों के जीवन पर गंभीर असर पड़ रहे हैं।

अक्टूबर 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि व्यापार और वाणिज्य अधिनियम, किसान मूल्य आश्वासन अधिनियम और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम के कारण देशव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी है, जिसमें महिला किसानों की भारी भागीदारी है, क्योंकि यह किसानों और उनके परिवारों को कृषि व्यवसायों पर निर्भरता की स्थिति में डाल देगा। ठेके पर खेती (कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग) को प्रोत्साहन देने से भूमिहीनता और अभाव की स्थिति और भी बढ़ जाएगी। इन कानूनों से महिला किसानों की दरिद्रता बढ़ेगी क्योंकि कॉरपोरेट लॉबी द्वारा होने वाली असुरक्षित लूट से उन्हे कोई सुरक्षा नहीं है। इन कदमों से सरकार द्वारा विकेन्द्रीकृत खरीद में कमी होगी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली चौपट होगी। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किसान संगठन लगातार कर्जमाफी और न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग उठाते रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपकी सरकार ने इन उचित मांगों की अवहेलना करते हुए किसान विरोधी कानूनों को पारित करके किसानों को और अधिक संकट में धकेल दिया है।

हम किसानों के संघर्ष के बर्बर दमन की,  और इतनी कड़ी सर्दी मे आँसू गैस और पानी के गोले फेंकने की कड़ी निंदा करते हैं। बीजेपी-आरएसएस केंद्र सरकार और बीजेपी यूपी और हरियाणा राज्य सरकारों ने भी शांतिपूर्ण किसानों पर, जो अपनी उचित मांगों के लिए दिल्ली पहुंचना चाहते हैं, अभूतपूर्व बर्बरता का उदाहरण पेश किया है

हम किसानों के संघर्ष के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हैं और आपके नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा प्रदर्शित क्रूर दमन और निर्ममता के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे।

राष्ट्रीय महिला संगठन मांग करते हैं:

1. किसानों के वैध और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर दमन को तुरंत रोकें।

2. संघर्षरत किसानों और किसान संगठनों के नेताओं पर लगाए गए सभी मामलों को वापस लें ।

3. महामारी के दौरान अधिनियमित तीन किसान विरोधी अधिनियमों को निरस्त करें।

4. ठेके पर कृषि को प्रोत्साहन देना बंद करें।

5. सभी कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण और गारंटी तथा सरकार द्वारा विकेन्द्रीकृत खरीद सुनिश्चित करना।

6. भूख और गरीबी की स्थिति को देखते हुए राशन वितरण प्रणाली का सार्वभौमिकरण 

7. छात्रों को मध्याह्न भोजन सुनिश्चित करना।

8. किसानों के लिए ऋण माफी, विशेष रूप से आत्महत्या करने वाले किसानों की विधवाओं के लिए और जिन्होंने माइक्रोफाइनेंस कंपनियों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से ऋण लिया है।

9. सभी वंचित और जरुरतमन्द परिवारों को मासिक आय सहायता।

10. स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा सहायता।

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति  (AIDWA)

भारतीय महिला राष्ट्रीय फेडरेशन  (NFIW)

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ  (AIPWA)

प्रगतिशील महिला संगठन  (PMS)

अखिल भारतीय महिला सांस्कृतिक संगठन  (AIMSS)

अखिल भारतीय अग्रगामी महिला समिति  (AIAMS)

Farm Bills
National Strike
Farmers’ Protests
AIDWA
AIPWA
NFIW
PMS
AIMSS
AIAMS
Delhi
BJP
RSS
UP Government
Haryana Government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग


बाकी खबरें

  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड: NIOS से डीएलएड करने वाले छात्रों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति नहीं
    23 Oct 2021
    उत्तराखंड सरकार द्वारा नवंबर 2020 में प्राथमिक शिक्षक के 2287 पदों पर भर्ती के लिए सूचना जारी की गई थी, इसमें राज्य सरकार द्वारा इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से होने वाले डीएलएड को मान्य किया गया…
  • Supreme Court
    न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    खोरी पुनर्वास संकट: कोर्ट ने कहा- प्रोविजनल एलॉटमेंट के समय कोई पैसा नहीं लिया जाएगा, फ़ाइनल एलॉटमेंट पर तय होगी किस्त 
    23 Oct 2021
    मजदूर आवास संघर्ष समिति ने कहा कि अस्वीकृत आवेदन की प्रकिया में अपारदर्शिता है एवं प्रार्थी को अपील का मौका न देना सरासर अत्याचार एवं धोखा है।
  • inflation
    अजय कुमार
    सरकारी आंकड़ों में महंगाई हो गई कम, ग़रीब जनता को एहसास भी नहीं हुआ! 
    23 Oct 2021
    आख़िर क्या वजह है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों में कमी आने के बाद भी आम आदमी इस पर भरोसा नहीं कर पाता।
  • 100 crore vaccines
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक: क्या भारत सचमुच 100 करोड़ टीके लगाने वाला दुनिया का पहला देश है?
    23 Oct 2021
    भारत न तो पहला देश है जिसने 100 करोड़ डोज़ लगाई है और न ही भारत का टीकाकरण विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है।
  • shareel
    द लीफलेट
    सीएए विरोधी भाषण: भीड़ उकसाने के ख़िलाफ़ ‘अपर्याप्त और आधे-अधूरे सुबूत’, फिर भी शरजील इमाम को ज़मानत से इनकार
    23 Oct 2021
    दिल्ली की एक अदालत ने दिसंबर 2019 में राष्ट्रीय राजधानी में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA)-राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर अपने कथित भड़काऊ भाषण के सिलसिले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License