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मोदी राज से नाराजगी पर लिखा पत्र और इनाम में मिला निलंबन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मॉब लिंचिंग, सरकारी कंपनियों को बेचने, कश्मीर में जारी तालाबंदी, रेप आरोपित नेताओं के संरक्षण और देश में हर दिन हो रहे लोकतंत्र की हत्या से क्षुब्ध होकर कई विश्वविद्यालय के छात्रों ने पत्र लिखा।अभी यह खबर मिल रही है कि इस हरकत पर महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने विश्वविधालय के छह बहुजन छात्रों को निलंबित कर दिया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Oct 2019
modi raj

महाराष्ट्र के वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय  प्रशासन ने बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस मनाने तथा पीएम मोदी को पत्र लिखने के कारण छह बहुजन छात्रों को विश्वविद्यालय से निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए छात्र नेताओं में चन्दन सरोज, रजनीश कुमार अंबेडकर, वैभव पिम्पलकर, राजेश सारथी, नीरज कुमार एवं पंकज बेला के नाम शामिल हैं। गौरतलब हो कि निलंबित किए जाने वाले सभी छात्र एससी व ओबीसी केटेगरी के ही हैं। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि इन छह निलंबित छात्रों में एक छात्र ऐसा भी है जो पास आउट हो चूका है और वर्तमान में विश्वविद्यालय का छात्र नहीं है।

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा रोके जाने के बावजूद मान्यवर कांशीराम जी का परिनिर्वाण दिवस मनाया और पीएम मोदी को खत लिखा था। छात्रों ने दलित-अल्पसंख्यकों के मॉब लिंचिंग  बढ़ते यौन हिंसा व बलात्कार; कश्मीर को दो माह से कैद किए जाने; रेलवे-बीपीसीएल-एयरपोर्ट आदि के निजीकरण; एनआरसी के नाम पर मुस्लिमों को टारगेट किए जाने तथा देशभर में आदिवासी-दलित नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं-लेखकों-बुद्धिजीवियों के दमन व उनपर राजद्रोह के मुकदमे दर्ज किए जाने को लेकर पीएम मोदी को पत्र लिखकर जवाब मांगा था। इसी कारण से चुनाव आचार संहिता का बहाना बनाकर छह बहुजन छात्र नेताओं को निलंबित  किया गया है।
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छात्र संगठन आइसा ने कहा कि जिन छात्रों को निलंबित किया गया है, उनका कथित अपराध देश में वर्तमान स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखना था।

छात्रों का कहना है कि भाजपा सरकार यह नहीं चाहती है कि देश के लोगों को उनके शासन के खतरनाक डिजाइन के बारे में पता चले। पीएम को खुले पत्र में जिन मुद्दों पर ध्यान दिलाया गया है, वे अभी देश के सबसे ज्वलंत मुद्दे हैं। देश में सांप्रदायिक और जातिय लिंचिंग नियमित घटना बन गए हैं। आइसा ने भाजपा शासित राज्यों की पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगया है।

प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए आइसा ने कहा कि "अभी हाल ही में हमने देखा है कि तबरेज़ अंसारी की हत्या के आरोपी को झारखंड पुलिस द्वारा क्लीन चिट दे दी गई है। भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और सांसद चिन्मयानंद द्वारा बलात्कार की शिकायत करने वाली महिलाओं को बेरहमी से प्रताड़ित किया जा रहा है। साथ ही कश्मीर के लोगों की आवाज़ को चुप कराने का और भीमा कोरेगांव में दलितों पर हमला करने वाले दक्षिणपंथी गुंडों और उनके मास्टरमाइंड भाजपा के संरक्षण में मुक्त घूम रहे हैं और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं को जेल हो रही है। दिल्ली में रविदास मंदिर के विध्वंस के खिलाफ चंद्रशेखर आज़ाद और अन्य दलित प्रदर्शनकारियों को जेल में डाल दिया गया है।

इस के साथ ही उन्होंने सरकार पर मुनाफे वाली कंपनियों को बेचने का आरोप भी लगया ,एमटीएनएल / एयर इंडिया जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों जिसने लाखों भारतीय को सेवा और रोजगार प्रदान किया है।उसे कौड़ियों के दम पर सरकार निजी लोगो बेच रही है।

आइसा के अखिल भरतीय अध्यक्ष सुचेता ने कहा कि जब सरकार हमलावरों और कॉरपोरेट लुटेरों का साथ देने का फैसला करती है, तो यह लोगों की ज़िम्मेदारी है। और एमजीएएचवी, वर्धा के छात्र ठीक यही कर रहे थे। दिल्ली में रविदास मंदिर के विध्वंस के खिलाफ चंद्रशेखर आज़ाद और अन्य दलित प्रदर्शनकारियों को जेल में डाल दिया गया है।

AISA की मांग है कि छह छात्रों के खिलाफ निलंबन पत्र तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। वर्धा प्रशासन द्वारा छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता है। हम सभी से वर्धा विश्वविद्यालय के छात्रों के विरूद्ध कार्रवाई के विरोध में उठने का आह्वान करते हैं।

निष्कासित बहुजन छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय के कुलपति पर दलित विरोधी-मनुवादी व तानाशाह होने का आरोप लगाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में कट्टर जातिवादी-ब्राह्मणवादी व साम्प्रदायिक संगठन आरएसएस को नियमित शाखा लगाने की खुली छूट दे दी गई है किंतु दलित-बहुजन व लोकतंत्र पसंद-न्याय पसंद छात्र-छात्राओं को अपने नायकों तक को श्रद्धांजलि देने पर निलंबित किया जा रहा है। जबकि विश्वविद्यालय में संघ-बीजेपी से जुड़े नेताओं की जयंती व पुण्य तिथि पर कार्यक्रम आयोजित करने की खुली छूट दे रखी है और इन कार्यक्रमों में कुलपति आए दिन स्वयं कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते व मंच शेयर करते नजर आते हैं।

निलंबन सूची में शामिल पूर्ववर्ती छात्र राजेश सारथी ने कहा कि सरकार ने आदिवासी नेता सोनी सोरी, दलित नेता चंद्रशेखर से लेकर दर्जनों मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व लेखकों-बुद्धिजीवियों के खिलाफ खनिज लूट एवं अन्याय-उत्पीड़न के खिलाफ खड़े होने के एवज में लगातार दमन चक्र चला रखा है. लोगों के नागरिक अधिकारों का गला घोंटा जा रहा है. देश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं जबकि सरकार कॉरपोरेट घरानों को लाखों करोड़ रूपये की छूट दे रही है और इस पर सवाल उठाने वालों पर देशद्रोह के मुकदमे लगाकर उनकी आवाज को दबाया जा रहा है।

निलंबित छात्रों ने विश्वविद्यालय द्वारा किए गए इस निलंबन को द्रोणाचार्य द्वारा एकलव्य के अंगूठे काटने के समान बताया है और कहा है कि हम इसके खिलाफ विश्वविद्यालय के अंदर और न्यायालय दोनों मोर्चे पर लड़ेंगे। एक खास विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के संविधान प्रदत्त लोकतांत्रिक अधिकारों के अपहरण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 अपने निलंबन पर छात्रों ने कहा कि इस तरह से सरकार सच छुपा नहीं सकती है। एक की आवाज की बंद करेंगे तो हजार और बोलेंगे।

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