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भारत
राजनीति
“यह एक चौथाई सदी खड़ी है तीन सदियों के मलबे पर...”
कवि वीरेन डंगवाल की याद में दिल्ली में हुए ‘वीरेनियत-3’ कार्यक्रम में कवि असद ज़ैदी।
न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
03 Oct 2018

“ऐसा नहीं है” कविता में असद ज़ैदी कहते हैं कि “हमारे ज़माने में विमर्श है अमर्ष भी ख़ूब है किसी का लेकिन पक्ष पता नहीं चलता…/ हिन्दुस्तान भी बस एक चमत्कार ही है दलालों ने हर चीज़ को खेल में बदल दिया हैं/ वीडियो गेम से उकताते हैं तो मुसलमानों को मारने के लिए निकल पड़ते हैं/और जो रास्ते में आता है कहते हैं हम आपको देख लेंगे नम्बर आपका भी आएगा जी.../ यह एक चौथाई सदी खड़ी है तीन सदियों के मलबे पर...।”

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asad zaidi
esa nahi hai

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