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भारत
राजनीति
यह वक़्त कठिन जरुर है पर स्थाई नहीं, इसका गुज़रना निश्चित है: कुमार प्रशांत
न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
25 Nov 2015

लगातार तर्कशील एवं प्रगतिशील ताकतों पर हो रहे हमलों के विरोध में १ नवम्बर को दिल्ली के मावलंकर सभागार में आयोजित ‘प्रतिरोध’ नामक सभा में कुमार प्रशांत ने अपनी बात रखी। प्रशांत ने आपातकाल के भारत को याद करते हुए मौजूदा समय में व्याप्त असहिष्णुता को एक ऐसा समय बताया जो कठिन तो है पर स्थाई नहीं है। लेखकों और साहित्यकारों के प्रतिरोध को असली हिन्दुस्तान का नेत्रित्व बताते हुए वक्ता ने यह भी कहा कि इस विरोध को मैन्युफैक्चर्ड या गैंग का विरोध कहने वाले खुद एक गैंग का हिस्सा हैं जो एक अलग प्रकार के समाज की रचना करना चाहते हैं। इस असहिष्णुता के दौर में एकबद्ध होकर इसका सामना करने का आह्वाहन करते हुए प्रशांत ने कहा कि दृढ़ता से खड़े होकर अपने विचारों को व्यक्त करने का समय है। उनके शब्दों में, “ हम आवाज़ किसी को सुनाने के लिए नहीं उठा रहे, हम आवाज़ उठा रहे हैं की गूंजे, गूंज होगी तो कहीं तो पहुंचेगी।   

                                                                                                                           

आरएसएस
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CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License