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भारत
राजनीति
यूनियन हॉल में जिन्ना के तस्वीर के कारण एएमयू के छात्र पीटे गये
एएमयू छात्रसंघ के अध्यक्ष ने कहा की एएमयू स्टूडेंट्स यूनियन हॉल में जिन्ना का चित्र एक ऐतिहासिक संरक्षण है और यह वैसे भी रहेगा|
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
04 May 2018
AMU

बुधवार को हिंदू दक्षिणपंथी ताकतों  ने कथित रूप से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) परिसर में प्रतिष्ठित बाब-ए-सैयद प्रवेश द्वार के माध्यम से हथियारों के साथ प्रवेश किया और एएमयू के छात्रों को यूनियन हॉल की दीवारों पर मुहम्मद अली जिन्ना के चित्र को स्थापित करने के लिए छात्रों पर हमला किया।

हिंदू युवा वाहिनी (एचवाईवी) के कार्यकर्ता, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और कुछ अन्य हिंदू संगठनों ने एएमयू छात्रों के साथ झड़प हुई, जिसमें छात्रसंघ अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद सतीश गौतम ने मंगलवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उप-कुलपति तारिक मंसूर को जिन्ना के पोस्टर पर एक पत्र लिखा था, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ | छात्रसंघ कार्यालय में लटका मोहम्मद अली जिन्ना के एक चित्र को लेकर स्पष्टीकरण माँगा था।

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए, एएमयू छात्रसंघ के अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने कहा: "यह सच दिल को तोड़ने वाल है कि अस्सी वर्षों के बाद, सत्तारूढ़ दल के सदस्य और भारतीय मीडिया एक प्रॉक्सी व्याख्या सामने ला रहे हैं जो पूरी तरह से फ़िज़ूल है। जब 1938 में मोहम्मद अली जिन्ना को ऐतिहासिक मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ की आजीवन सदस्यता प्रदान की गई थी। तब से उनका चित्र यूनियन  हॉल की दीवारों पर जवाहरलाल नेहरू, मौलाना आज़ाद, महात्मा गाँधी और कई अन्य के साथ लटक रही है। महात्मा गाँधी छात्र संघ के पहले पूर्ण जीवनकालिक सदस्य थे, जो भारतीय मीडिया और भाजपा के सदस्य कभी देश को नहीं बताएंगे।"

उन्होंने आगे कहा कि मुंबई में जिन्ना हाउस है जो भारत सरकार के अधीन आता है और इसका राजस्व भी भारत सरकार के पास जाता है।

उन्होंने कहा कि, "इस तरह की ग़लत कहानी एक बेहद विरोधाभासी, पाखंडी, और चुनिंदा धारणा को भाजपा के निर्वाचित प्रतिनिधियों की मदद भारतीय मीडिया कर रहा है। इतिहास एक खुला अंतराल है, 'अच्छा' और 'बुरा' संस्करण केवल एक ही व्याख्या है। एएमयू स्टूडेंट्स यूनियन हॉल में जिन्ना का चित्र एक ऐतिहासिक संरक्षण है और यह वैसे भी रहेगा | "

पूर्व एएमयू छात्रसंघ अध्यक्ष फैजुल हसन ने हाल ही में एक टीवी समाचार बहस में कहा कि, एक आरएसएस प्रचारक ने कहा कि 'वीर' सावरकर वह था जिसने जेल से कई बार अंग्रेजों की दया के लिए आग्रह किया था। उसमें जोड़कर, समाचार एंकर ने कहा कि सावरकर आठ बार हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे थे। यह वही हिन्दू महासभा था जिसने 1942 में गांधी जी द्वारा बुलाए गए असहयोग आंदोलन का बहिष्कार किया और देश के दो प्रांतों में श्री जिन्ना के मुस्लिम लीग के साथ सरकार बनाने के लिए चलाया, जिसमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंगाल प्रांत के उप-मुख्यमंत्री बने थें ।

एक छात्र शर्जील उस्मानी ने कहा, "2 मार्च को जो कुछ हुआ था, उसका एएमयू में जिन्ना की तस्वीर से कोई लेना देना नहीं था। दक्षिणपंथी गुंडे पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी पर हमला करने आए थे। वे गेस्ट हाउस के पास पहुँचने जहाँ वह रह रहे थे, एएमयू और मुसलमानों के खिलाफ नारे लगाए और अपने हथियार लहराए, गोलीबारी की । छात्रों ने उनमें से छह गुंडों को पकड़ा और उन्हें पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने बदले में हम पर क्रूर लाठी चार्ज और आँसू-गैस से हमला किया।"

 

रिपोर्टो के अनुसार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र लगतार प्रशासन के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे है और ये आरोप लगा रहे की सरकार के इशारे पर दक्षिणपंथी गुंडों को नही पकड़ा जा रहा है, बल्कि एएमयु के आम छात्रों को परेशान किया जा रहा है और छात्रों पर ही मुकदमे किये जा रहे हैं|

इन सब के कारण छत्रो का भी गुस्सा बढ़ रहा हैं और अब ये एक छात्र आन्दोलन का रूप ले चुका है जिसमें विश्वविध्यालय के हज़ारों छात्र अपनी भागीदारी कर रहे  है| बीती रात लड़कियों के एक छात्रावास में छात्राओं को रोकने का प्रयास किया | छात्रावास के मुख्य द्वार पर तला जड़ दिया गया था,परन्तु इसके बाबजूद छात्राएँ ताला तोड़कर और इस नारे के साथ बहर आई “इन हाथों में केवल चूड़ी नहीं, तलवारें भी खनकती हैं| ”

अभी मिली जानकारी के अनुसार तीव्रता से बढ़ते आन्दोलन को देखते हुए प्रशासन ने आन्दोलन को दबाने के लिए इंटरनेट सेवा पर रोक लगा दी है | परन्तु वहाँ के छात्रों का कहना है कि, “हुकूमत के इन सब दमनों से आन्दोलन रुकने वाला नहीं बल्कि और तेज़ होगा  है | इन सब के करण छात्रो में एकजुटता बढ़ रही है और हम इन से लड़ेंगे भी और जीतेंगे भी |”पत्र

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविध्यालय
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उत्तर प्रदेश
जिन्ना
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छात्र आन्दोलन
AMU
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