NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी; चुनाव 2019: तीसरे चरण में भी गठबंधन की बढ़त
23 अप्रैल को 10 सीटों पर हो रहे मुक़ाबले में सपा-बसपा 8 सीटों पर सत्ताधारी बीजेपी को हरा सकती है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Apr 2019
यूपी; चुनाव 2019: तीसरे चरण में भी गठबंधन की बढ़त
तस्वीर सौजन्य: एनडीटीवी

मंगलवार, 23 अप्रैल को हो रहे लोकसभा चुनाव 2019 के तीसरे चरण में उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर मतदान होगा। इन 10 सीटों पर लोकसभा चुनाव 2014 में और विधानसभा चुनाव 2017 में कमोबेश भारतीय जनता पार्टी का क़ब्ज़ा रहा। लेकिन समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन होने के बाद गणित को देखें, तो इस बार पिछले परिणाम उलट सकते हैं।

न्यूज़क्लिक की डाटा एनालिसिस टीम द्वारा 2017 विधानसभा चुनाव के आधार पर किए गए अनुमानों के हिसाब से सपा और बसपा का गठबंधन इन 10 सीटों में 8 सीटें जीत सकता है जबकि बीजेपी बस 2 सीटों पर वापस आती दिख रही है।

2_34.jpg

ये 10 सीटें हैं: उत्तरी रुहेलखण्ड क्षेत्र की पीलीभीत, बरेली, बदायूँ, मुरादाबाद, आंवला, संभल और रामपुरतथा मध्य दोआब क्षेत्र की फ़िरोज़ाबाद, एटा और मैनपुरी हैं। यहाँ मुस्लिम और दलित आबादी ज़्यादा है,ख़ास तौर से रुहेलखण्ड क्षेत्र में जबकि मध्य दोआब क्षेत्र में अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) की आबादी ज़्यादा है जो कि सपा उदय की वजह से मज़बूत है। समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव इसी क्षेत्र से आते हैं जो 2014 की मोदी लहर के बावजूद अपना क़ब्ज़ा क़ायम रखने में कामयाब रहे थे। गठबंधन के एक और सहयोगी दल- अजित सिंह के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोक दल की इन क्षेत्रों और बाक़ी क्षेत्रों में भी कोई ख़ास उपस्थिति नहीं दिख रही है। 

एक वक़्त पर कट्टर दुश्मन रहे सपा और बसपा के गठबंधन को 19 अप्रैल को मैनपुरी में हुई रैली से बल मिला है। इस रैली में मायावती और मुलायम सिंह यादव (दोनों पूर्व मुख्यमंत्री) 24 साल बाद मंच पर एक साथ नज़र आए। दोनों की एकता ने उनके अपने-अपने सामाजिक आधार तक एक मज़बूत संदेश पहुँचाया है जो कि इस चरण के साथ-साथ आगामी सभी चरणों में महत्वपूर्ण साबित होगा। 

नाराज़गी से बढ़ सकता है मार्जिन 

बड़े पैमाने पर बढ़ रहीं किसानों की मुश्किलें, केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार की हिंसात्मक सांप्रदायिक राजनीति और इस क्षेत्र के छोटे उद्योगों का ख़ात्मा, इस चुनाव में बीजेपी के वोटों में आने वाली भारी गिरावट की बड़ी वजह बन सकता है। हालांकि बीजेपी पीलीभीत और बरेली के सीटों पर वापस आती हुई दिख रही है, लेकिन विधानसभा चुनावों के परिणाम के अनुमान ये दर्शाते हैं कि 2.5 प्रतिशत के वोट स्विंग से पैदा हुआ अंतर बीजेपी की हार को और नाटकीय ढंग से बड़ा बना सकता है।

3_24.jpg

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उन सीटों से लड़ रही है, जिन पर विधानसभा चुनाव में उसने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा था, इसकी वजह से अनिश्चितता पैदा हुई है। दरअसल, जिन 2 सीटों पर बीजेपी जीत रही है, उसका मुख्य कारण ये है कि कांग्रेस की वजह से वो वोट बँट सकते हैं, जो गठबंधन को मिल सकते थे।

अभी तक का अनुमानित हिसाब

न्यूज़क्लिक के डाटा विश्लेषण ने पिछले दो चरणों में भी संभावित विजेताओं का अनुमान लगाया था। उनको तीसरे चरणों के साथ जोड़कर देखें तो ये पता चलता है कि इन तीनों चरणों की 26 सीटों में गठबंधन को 18, जबकि बीजेपी को सिर्फ़ 8 सीटें मिलने वाली हैं।  

4.jpg

2014 के चुनाव में, इन 26 सीटों में बीजेपी ने 23 सीटें जीती थीं जबकि सपा ने तीन सीटें (बदायूँ, मैनपुरी और फ़िरोज़ाबाद) अपने नाम की थीं। इस हिसाब से, इस बार के तीसरे चरण तक बीजेपी पिछली बार जीती सीटों का दो तिहाई हिस्सा हार चुकी है। 

राज्य में कुल 80 सीटें हैं, जिसकी वजह से ये देश का सबसे ज़्यादा सांसद देने वाला राज्य है। 2014 में मोदी के जीतने की बड़ी वजह इस राज्य में दूसरे दलों का हुआ सफ़ाया था, जिसमें बीजेपी को 73 सीटें (जिसमें सहयोगी ‘अपना दल’ की दो सीटें शामिल हैं) मिली थीं जबकि विपक्ष महज़ 7 सीटों पर सिमट कर रह गया था। विधानसभा चुनाव के अनुमानों के आधार पर किया गया ये कुल हिसाब काम करता है, तो इस चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को एक बड़ी और शायद निर्णायक हार का सामना करना पड़ सकता है। 

(डाटा एनालिसिस पीयूष शर्मा और मैप्स ग्लेनिसा परेरा द्वारा)

elections 2019
3rd phase elections
General elections 2019
2019 Lok Sabha Polls
2019 Lok Sabha elections
BSP-SP alliance
BJP
Narendra modi
Yogi Adityanath
MAYAWATI
AKHILESH YADAV

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • Sustainable Development
    सोनिया यादव
    सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत काफी पीछे: रिपोर्ट
    03 Mar 2022
    एनुअल स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट 2022 रिपोर्ट के मुताबिक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत फिलहाल काफी पीछे है। ऐसे कम से कम 17 प्रमुख सरकारी लक्ष्य हैं, जिनकी समय-सीमा 2022 है और धीमी गति…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पूर्वांचल की जंग: 10 जिलों की 57 सीटों पर सामान्य मतदान, योगी के गोरखपुर में भी नहीं दिखा उत्साह
    03 Mar 2022
    इस छठे चरण में शाम पांच बजे तक कुल औसतन 53.31 फ़ीसद मतदान दर्ज किया गया। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है। आज के बाद यूपी का फ़ैसला बस एक क़दम दूर रह गया है। अब सात मार्च को सातवें और आख़िरी चरण के लिए…
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: बस्ती के इस गांव में लोगों ने किया चुनाव का बहिष्कार
    03 Mar 2022
    बस्ती जिले के हर्रैया विधानसभा में आधा दर्ज़न गांव के ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार करने का एलान किया है। ग्रामीणों ने बाकायदा गांव के बाहर इसका बैनर लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी…
  • gehariyaa
    एजाज़ अशरफ़
    गहराइयां में एक किरदार का मुस्लिम नाम क्यों?
    03 Mar 2022
    हो सकता है कि इस फ़िल्म का मुख्य पुरुष किरदार का अरबी नाम नये चलन के हिसाब से दिया गया हो। लेकिन, उस किरदार की नकारात्मक भूमिका इस नाम, नामकरण और अलग नाम की सियासत की याद दिला देती है।
  • Haryana
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हरियाणा: आंगनबाड़ी कर्मियों का विधानसभा मार्च, पुलिस ने किया बलप्रयोग, कई जगह पुलिस और कार्यकर्ता हुए आमने-सामने
    03 Mar 2022
    यूनियन नेताओं ने गुरुवार को कहा पंचकुला-यमुनानगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरवाला टोल प्लाजा पर हड़ताली कार्यकर्ताओं और सहायकों पर  हरियाणा पुलिस ने लाठीचार्ज  किया।  
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License