NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
यूपी चुनाव: सपा द्वारा पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का वादा मतदाताओं के बीच में असर कर रहा है
2004 में, केंद्र की भाजपा सरकार ने सुनिश्चित पेंशन स्कीम को बंद कर दिया था और इसकी जगह पर अंशदायी पेंशन प्रणाली को लागू कर दिया था। यूपी ने 2005 में इस नई प्रणाली को अपनाया। इस नई पेंशन स्कीम (एनपीएस) से राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारी असंतुष्ट हैं।
अब्दुल अलीम जाफ़री
02 Mar 2022
up elections

गोरखपुर/लखनऊ: जहाँ एक तरफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को गरीब और हाशिये पर पड़े लोगों को मुफ्त राशन वितरण से चुनावी लाभ पाने की उम्मीद है, वहीँ वृद्धावस्था पेंशन स्कीम की बहाली का वादा समाजवादी पार्टी (सपा) के पक्ष में काम करता दिख रहा है।

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इस मुद्दे पर विभिन्न समुदायों के मतदाताओं का बड़े पैमाने पर अधिकाधिक समर्थन हासिल करने के लिए अपनी पार्टी की ओर से बनाये गये चुनावी घोषणापत्र में किये गए इस वादे के बारे में लगभग सभी जनसभाओं में बात कर रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का फैसला वित्तीय विशेषज्ञों, सरकारी कर्मचारियों की यूनियनों के प्रतिनिधियों और सेवानिवृत्त लोक सेवकों के संघों के साथ विस्तृत बातचीत के बाद लिया गया है। अखिलेश ने कहा, “हमने विस्तार से इस योजना के वित्तीय प्रबंधन पर चर्चा की है और विशेषज्ञों का मत है कि राज्य सरकार इसके लिए एक कोष स्थापित करने में सक्षम है जो आवश्यक धन का ख्याल रखेगी।” उन्होंने आगे कहा, “पेंशन स्कीम की बहाली हमारी पार्टी के घोषणापत्र का एक अन्य महत्वपूर्ण तत्व है।”

​​गोरखपुर के एक जूनियर हाई स्कूल के सहायक अध्यापक, सुग्रीव मिश्रा का इस बारे में कहना है कि कर्मचारियों की ओर से पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली की मांग लंबे अर्से से की जा रही है, लेकिन सभी सरकारों ने उनकी मांग को अनदेखा कर दिया है। न्यूज़क्लिक से अपनी बातचीत में उन्होंने कहा, “सरकार को यह समझना चाहिए कि बुजुर्गों के लिए बुढ़ापे में पेंशन उनका एकमात्र सहारा थी, लेकिन जबसे सरकार ने इसे रोक दिया है, हम अपने बच्चों की दया पर निर्भर हो गए हैं। अब हमें उनसे अपनी चिकत्सकीय सहायता तक के लिए पूछना होगा।” उनका आगे कहना था कि वे सत्तारूढ़ सरकार का कट्टर समर्थक होने के बावजूद इस बार समाजवादी पार्टी को अपना समर्थन देंगे।

कुछ इसी प्रकार की राय देवरिया में एक ग्रामीण बैंक से सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी, सचिन सिंह से भी सुनने को मिली। उन्होंने कहा, “बैंक कर्मचारियों को पूर्व में सरकार की ओर से पेंशन मिलती थी। यह पेंशन अब बंद हो गई है, और ऐसा करके सरकार ने हमें बुढ़ापे में बेसहारा कर दिया है। जब हमें पैसे की सबसे अधिक जरूरत है, तब हमें अपने बच्चों और रिश्तेदारों से इसके लिए मांगने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार को पहले की तरह ही बैंक कर्मचारियों को पेंशन प्रदान करनी चाहिए। सभी बैंक कर्मचारीगण बैंकों के विलय किये जाने का विरोध कर रहे हैं। बैंकों का निजीकरण भी नहीं किया जाना चाहिए।”

वे इतने पर ही नहीं रुके और उन्होंने सवाल किया, “क्या यह सौतेला व्यवहार नहीं है कि यदि कोई कर्मचारी ओपीएस के साथ रिटायर होता है, तो उसे पेंशन के तौर पर प्रति माह तकरीबन 25,000 रूपये से लेकर 45,000 रूपये मिलते हैं, जबकि वहीँ दूसरी तरफ एनपीएस के तहत सेवानिवृत्त होने वाले उसी कर्मचारी को मात्र 1,500 रूपये से लेकर 4,000 रूपये प्रति माह पेंशन मिलेगा?” इसके साथ ही उनका कहना था कि यदि दोनों के लिए काम एक समान है तो फिर पेंशन में यह भेदभाव क्यों है।

2005 से पूर्व की पेंशन स्कीम की बहाली की घोषणा से राज्य के उन 12 लाख अवकाशप्राप्त सरकारी कर्मचारियों के लाभान्वित होने का अनुमान है जो कई वर्षों से इस विषय पर राज्य सरकार के साथ टकराव की स्थिति में बने हुए हैं। इसके अलावा, सपा ने निजी स्कूलों के सेवानिवृत्त अध्यापकों के लिए भी वित्तीय मदद का वादा किया है और तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को उनके गृह जनपद में नियुक्ति किये जाने की अनुमति दी है।

केंद्र की भाजपा सरकार ने 2004 में सुनिश्चित पेंशन योजना को बंद कर दिया था और इसके स्थान पर अंशदायी पेंशन व्यवस्था को चालू किया था। यूपी ने इस व्यवस्था को 2005 में अपना लिया था। राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारी इस नई पेंशन स्कीम (एनपीएस) से संतुष्ट नहीं हैं।

कर्मचारी संघों के छतरी निकाय, यूपी राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष कमलेश मिश्रा का इस बारे में कहना था, “राज्य सरकार के सभी कर्मचारी उन राजनीतिक शक्तियों के पीछे लामबंद होंगे जो ओपीएस की बहाली को लेकर मुखर रहेंगे।” वहीं सत्तारूढ़ योगी आदित्यनाथ सरकार पर आरोप लगाते हुए मिश्रा का कहना था कि यदि नई पेंशन योजना (एनपीएस) पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) से अधिक लाभदायक होती, तो सरकार ने इसे विधायकों और मंत्रियों की पेंशन के लिए क्यों लागू नहीं किया।

यूनियन के द्वारा चलाए जा रहे लंबे आंदोलन को इसका श्रेय देते हुए मिश्रा ने आगे कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले ओपीएस को राजनीतिक चर्चा में लाने के लिए 15 वर्षों से अधिक का समय लग गया।

बिजली विभाग के कर्मचारी भी पूर्व मुख्यमंत्री, अखिलेश यादव एक इस ऐलान से खुश नजर आ रहे हैं कि यदि उनकी सरकार बनती है तो पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल कर दिया जायेगा। आल इंडिया पॉवर इंजिनियर्स फेडरेशन के शैलेन्द्र दूबे के अनुसार यह यूपी सरकार के कर्मचारियों की बहु-प्रतीक्षित मांग थी, जो एनपीएस का लगातार विरोध करते आ रहे हैं, जो कि बाजार के उतार-चढ़ाव के अधीन भी है। दूबे के अनुमान के मुताबिक सेवानिवृत्त कर्मचारीगण भी ओपीएस मुद्दे पर कार्यरत कर्मचारियों के साथ समर्थन में खड़े हैं, जो संभवतः उनके मतदान के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।

कुशीनगर में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सीमा भारती का कहना था कि राज्य कर्मचारियों को सांप्रदायिक आधार पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि उस पार्टी का समर्थन करना चाहिए जो ईमानदारी से उनके लिए सोचती है।

कर्मचारी यूनियनों ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई विरोध प्रदर्शन आयोजित किये हैं और 2005 से पूर्व की पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली की मांग के साथ महीने भर के आंदोलन चलाए हैं, जिसके बारे में उनका कहना है कि बाजार आधारित एनपीएस की तुलना में वे कहीं अधिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि राज्य के पूर्वी क्षेत्र में सभी जातियों के लोगों के विभिन्न समूहों से मिल रही अच्छी-खासी छूट से उस खामोश “अंडरकरंट” का अंदाजा लगाया जा सकता है, जो विपक्षी गठबंधन के खिलाफ जा सकता था, जिसने सत्तारूढ़ भाजपा को कड़ी लड़ाई में घेर रखा है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/UP-elections-SP-promise-reinstating-old-pension-scheme-bearing-fruit-voters

Demand for old pension
UttarPradesh
UP ELections 2022

Related Stories

सियासत: अखिलेश ने क्यों तय किया सांसद की जगह विधायक रहना!

यूपी चुनाव नतीजे: कई सीटों पर 500 वोटों से भी कम रहा जीत-हार का अंतर

यूपी के नए राजनीतिक परिदृश्य में बसपा की बहुजन राजनीति का हाशिये पर चले जाना

यूपी चुनाव: कई दिग्गजों को देखना पड़ा हार का मुंह, डिप्टी सीएम तक नहीं बचा सके अपनी सीट

जनादेश—2022: वोटों में क्यों नहीं ट्रांसलेट हो पाया जनता का गुस्सा

जनादेश-2022: यूपी समेत चार राज्यों में बीजेपी की वापसी और पंजाब में आप की जीत के मायने

यूपी चुनाव: प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की वापसी

यूपी चुनाव: रुझानों में कौन कितना आगे?

यूपी चुनाव: इस बार किसकी सरकार?

यूपी चुनाव: नतीजों के पहले EVM को लेकर बनारस में बवाल, लोगों को 'लोकतंत्र के अपहरण' का डर


बाकी खबरें

  • यमन पर सऊदी अत्याचार के सात साल
    पीपल्स डिस्पैच
    यमन पर सऊदी अत्याचार के सात साल
    30 Mar 2022
    यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाला युद्ध अब आधिकारिक तौर पर आठवें साल में पहुंच चुका है। सऊदी नेतृत्व वाले हमले को विफल करने की प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए हज़ारों यमन लोगों ने 26 मार्
  • imran khan
    भाषा
    पाकिस्तान में संकटग्रस्त प्रधानमंत्री इमरान ने कैबिनेट का विशेष सत्र बुलाया
    30 Mar 2022
    यह सत्र इस तरह की रिपोर्ट मिलने के बीच बुलाया गया कि सत्ताधारी गठबंधन के सदस्य दल एमक्यूएम-पी के दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। 
  • national tribunal
    राज वाल्मीकि
    न्याय के लिए दलित महिलाओं ने खटखटाया राजधानी का दरवाज़ा
    30 Mar 2022
    “नेशनल ट्रिब्यूनल ऑन कास्ट एंड जेंडर बेस्ड वायोंलेंस अगेंस्ट दलित वीमेन एंड माइनर गर्ल्स” जनसुनवाई के दौरान यौन हिंसा व बर्बर हिंसा के शिकार 6 राज्यों के 17 परिवारों ने साझा किया अपना दर्द व संघर्ष।
  • fracked gas
    स्टुअर्ट ब्राउन
    अमेरिकी फ्रैक्ड ‘फ्रीडम गैस’ की वास्तविक लागत
    30 Mar 2022
    यूरोप के अधिकांश हिस्सों में हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग का कार्य प्रतिबंधित है, लेकिन जैसा कि अब यूरोपीय संघ ने वैकल्पिक गैस की आपूर्ति के लिए अमेरिका की ओर रुख कर लिया है, ऐसे में पिछले दरवाजे से कितनी…
  • lakhimpur kheri
    भाषा
    लखीमपुर हिंसा:आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के लिए एसआईटी की रिपोर्ट पर न्यायालय ने उप्र सरकार से मांगा जवाब
    30 Mar 2022
    पीठ ने कहा, ‘‘ एसआईटी ने उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को जांच की निगरानी कर रहे न्यायाधीश के दो पत्र भेजे हैं, जिन्होंने मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के वास्ते राज्य…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License