NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी में मोदी के 'राष्ट्रवाद' के सामने सपा-बसपा का समीकरण फेल हो गया!
उत्तर प्रदेश में बीजेपी 2014 वाली सफलता तो नहीं दोहरा पा रही है लेकिन रुझानों में 60 सीटें जीतती दिखाई दे रही है।
अमित सिंह
23 May 2019
फाइल फोटो
(फोटो साभार: एनडीटीवी)

उत्तर प्रदेश में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति काम कर गई। उन्होंने कहा था कि सपा, बसपा और रालोद के गठबंधन से निपटने के लिए 80 लोकसभा सीटों वाले इस सबसे बड़े राज्य में वह 50 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। अभी तक हुई मतों की गिनती में शाह की रणनीति की सफलता साफ झलक रही है। 

वैसे उत्तर प्रदेश की राजनीति में कैराना और गोरखपुर उपचुनाव ने बड़े बदलाव का बिगुल फूंका था। एक ओर जहां विपक्षी दल सपा, बसपा और रालोद को जीत का फार्मूला मिला था, वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने अपनी रणनीति में बदलाव की घोषणा की थी। बीजेपी को समझ में आ गया कि अगर विरोधी दल एकजुट हो गए तो उसे हार का सामना करना पड़ सकता है। 

हालांकि कांग्रेस को छोड़कर लोकसभा चुनाव 2019 में सभी विपक्षी दल एकजुट हुए लेकिन तब भी बीजेपी ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए चौंकाने वाले नतीजे दिए हैं। 

आपको बता दें कि यूपी की 80 लोकसभा सीटों में बीजेपी 60 सीटों पर जीत हासिल करने की तरफ अग्रसर है। वहीं, बीएसपी को 11 सीट, सपा को 6, कांग्रेस को 1, अपना दल को 1, अपना दल सोनेलाल को 1 सीट पर जीत मिलती दिखाई दे रही है। 

वहीं, अगर हम वोट शेयर की बात करें तो बीजेपी ने शाम छह बजे तक कुल 49.4 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं। जबकि महागठबंधन के दल बसपा को 19.3 प्रतिशत, सपा को 17.9 प्रतिशत और रालोद को 1.17 प्रतिशत मत मिले हैं। अगर हम इनके कुल मत प्रतिशत को जोड़ दे तो भी यह कुल मिलाकर 39 फीसदी के आसपास ठहरता है जो बीजेपी से काफी कम है। इसके अलावा कांग्रेस को सिर्फ 6.3 फीसदी मत मिलता दिखाई पड़ रहा है।

यूपी में विपक्ष के कई दिग्गज भी मुश्किल में फंसे नजर आ रहे हैं। सबसे ज्यादा खराब हालत कांग्रेस के नेताओं की है। रायबरेली से सोनिया गांधी को छोड़कर सभी नेता पीछे चल रहे हैं या हार चुके हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी से पीछे चल रहे हैं तो वहीं राज बब्बर, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, संजय सिंह समेत दूसरे दिग्गज बुरी तरह से हार रहे हैं। 

हालांकि यूपी के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार की हालत भी इस बार ठीक नहीं दिखाई पड़ रही है। अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव को छोड़कर इस परिवार के बाकी सदस्य भी आसानी से जीतते नजर नहीं आ रहे हैं। डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव, तेज प्रताप यादव, अक्षय यादव अपनी सीटों पर बहुत कम मार्जिन से आगे-पीछे चल रहे हैं। 

वहीं बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वीके सिंह, वरुण गांधी, रीता बहुगुणा जोशी समेत ज्यादातर बड़े नेता आसानी से जीत हासिल करते दिख रहे हैं। 

उत्तर प्रदेश में महागठबंधन समेत विपक्ष की करारी हार पर फैजाबाद में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार और जनमोर्चा अखबार के संपादक कृष्ण प्रताप सिंह कहते हैं, 'अगर राजनीति में जैसे भी सम्भव हो सत्ता पर कब्जा करना एक कला है,  तो कहना होगा कि मोदी से इसमें अपनी महारत ओैर इच्छाशक्ति दोनों सिद्ध कर दी है। उन्होंने साम, दाम, दंड और भेद में, जब भी जिसकी और जैसी भी जरूरत समझी, उसे बरता। इसके उलट विपक्ष के अनेक महानुभावों के लिए अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं से पार जाना भी संभव नहीं हुआ। तिस पर वे सब के सब जमीनी हकीकत के ऐसे गलत आंकलन के शिकार रहे कि उत्तर प्रदेश में नतीजे आने के कुछ घंटे पहले तक बसपा सुप्रीमो मायावती प्रधानमंत्री बनने की इच्छा रही थीं। क्या जनता से गहरे कटाव के बगैर ऐसा गलत आकलन संभव है?'

आपको बता दें कि जातिगण समीकरणों के आधार पर राजनीतिक विश्लेषकों ने कयास लगाए कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजय रथ को कहीं रोका जा सकता है तो वो यूपी ही है। महागठबंधन से मिल रही चुनौती को देखते हुए यहां बीजेपी को नुकसान होने के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन नतीजे इसके विपरीत आए हैं। 

जातीय समीकरण के सवाल पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एडजंक्ट और वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार त्रिपाठी कहते हैं,' उत्तर प्रदेश में बीजेपी को उम्मीद के मुताबिक सीटें हासिल हुई हैं। इस चुनाव का सबसे बड़ा संदेश यह है कि जातिगण समीकरणों के आधार पर आप बीजेपी को नहीं रोक सकते हैं। उसने राष्ट्रवाद का जो नैरेटिव डेवलप किया है वह यूपी ही नहीं पूरे देश को अपने आगोश में ले चुका है। ये भी साफ है कि अखिलेश और मायावती गठबंधन को जो गणित था, उसके साथ वो कोई आइडियोलॉजी नहीं दे पाए। ये लोहिया और आंबेडकर का गठजोड़ तो था ही नहीं, ये मुलायम और कांशीराम का भी गठजोड़ नहीं बन पाया। ये बच्चों का एक तरह से गेम प्लान था, दोनों ने बड़प्पन दिखाया लेकिन वैचारिक ताना बाना नदारद रहा।'

वो आगे कहते हैं,'सोशल जस्टिस का सारा एजेंडा बीजेपी आत्मसात कर चुकी है। अगर महागठबंधन के लोग विचारधारा का बड़ा ताना बाना बुनते हैं तभी जीत हासिल कर सकते हैं सिर्फ जातीय समीकरण से यह कतई संभव नहीं है। बीजेपी का चक्रव्यूह बड़ा है। इसको हराने के लिए बड़ी योजना, बड़ी दृष्टि और नैतिक शक्ति की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए महागठबंधन को मंथन की जरूरत है।'

Utter pradesh
loksabha elcetion 2019
loksabha election
BJP
BSP
SP
Congress
Rahul Gandhi
Akhil gogoi
MAYAWATI

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • election
    मुकुल सरल
    जनादेश—2022: वोटों में क्यों नहीं ट्रांसलेट हो पाया जनता का गुस्सा
    11 Mar 2022
    यूपी को लेकर अभी बहुत समीक्षा होगी कि जाट कहां गया, मुसलमान कहां गया, दलित कहां गया। महिलाओं का वोट किसे मिला आदि...आदि। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या ग्राउंड ज़ीरो से आ रहीं रिपोर्ट्स, लोगों की…
  • uttarakhand
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड में भाजपा को पूर्ण बहुमत के बीच कुछ ज़रूरी सवाल
    11 Mar 2022
    "बेरोजगारी यहां बड़ा मुद्दा था। पर्वतीय क्षेत्रों का विकास भी बड़ा मुद्दा था। भू-कानून, पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली बड़ा मुद्दा था। पलायन बड़ा मुद्दा था। लेकिन नतीजे तो यही कहते हैं कि सभी…
  • पटना: विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त सीटों को भरने के लिए 'रोज़गार अधिकार महासम्मेलन'
    जगन्नाथ कुमार यादव
    पटना: विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त सीटों को भरने के लिए 'रोज़गार अधिकार महासम्मेलन'
    11 Mar 2022
    इस महासम्मेलन में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा बिहार तकनीकी सेवा आयोग समेत 20 से ज़्यादा विभाग के अभ्यर्थी शामिल थे।
  • ukraine
    एपी/भाषा
    यूक्रेन-रूस अपडेट: चीन ने की यूक्रेन को मदद की पेशकश, रूस पर प्रतिबंधों को भी बताया गलत
    11 Mar 2022
    चीन के प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अनुकूल सभी प्रयासों का समर्थन करता है और इसमें वह सकारात्मक भूमिका निभाएगा।
  • विजय प्रसाद
    एक महान मार्क्सवादी विचारक का जीवन: एजाज़ अहमद (1941-2022)
    11 Mar 2022
    एजाज़ अहमद (1941-2022) की जब 9 मार्च को मौत हुई तो वे अपनी किताबों, अपने बच्चों और दोस्तों की गर्मजोशी से घिरे हुए थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License