NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी सरकार ने मुख्यमंत्री की छवि चमकाने के लिए ‘रचनात्मक एजेंसियों’ से मंगाया प्रस्ताव
लचर प्रशासन और टकराववादी रवैये से गिरी योगी आदित्यनाथ की छविI
द सिटिज़न ब्यूरो
30 Apr 2018
Yogi Adityanath

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि चमकाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ‘रचनात्मक एजेंसियों’ से आवेदन आमंत्रित कर रही है. लेकिन लचर प्रशासनिक व्यवस्था, समूचे राज्य में फैलती घृणा और विभाजनकारी प्रवृति और दृढ़ता दिखाने के चक्कर में टकराव मोल ले लेने की मुख्यमंत्री की आदत को देखते हुए यह काम बहुत आसान नहीं है. शर्तों के हिसाब से आवेदक को जमानत की राशि के तौर पर 50 लाख रूपए जमा करने होंगे. इससे यह संकेत मिलता है कि यह एक बहुत बड़ा करार होगा जिसके केंद्र में योगी आदित्यनाथ के ‘दृष्टिकोण’ को भारत और विदेशों में मीडिया एवं अन्य अभियानों के माध्यम से पहुंचाने का जिम्मा होगा.

दरअसल, फूलपुर और स्वयं मुख्यमंत्री के गृहक्षेत्र गोरखपुर के लोकसभा उपचुनावों में मिली हार ने खतरे की घंटी बजा दी है. इसके अलावा महिलाओं और दलितों के साथ होने वाले अपराधों, मुसलमानों के उत्पीड़न का विषैला स्वरुप, गोरखपुर के एक अस्पताल में 60 बच्चों की मौत और अब कुशीनगर में स्कूल बस दुर्घटना ने इस सरकार की छवि को बुरी तरह प्रभावित किया है. आदित्यनाथ का टकराववादी व्यक्तित्व इस खाई को पाटने में अक्षम साबित हुआ है. आधिकारिक खामियों की वजह से हुई गोरखपुर अस्पताल त्रासदी के लिए डॉक्टरों को जेल भेजना और अब कुशीनगर में रेल और स्कूल – वैन की टक्कर में 13 बच्चों की मौत से उत्तेजित होकर प्रदर्शन कर रहे लोगों को माइक से धमकाना उनके टकराववादी व्यक्तित्व का स्पष्ट उदहारण है.

कुशीनगर में जब लोगों की एक विशाल भीड़ ने मुख्यमंत्री को दुर्घटनास्थल पर जाने से रोका तो उन्होंने आवेश में आकर कहा, “नौटंकी बंद करो”. आदित्यनाथ घायल बच्चों से मिलने अस्पताल पहुंचे थे. लेकिन इसके बाद भीड़ ने उन्हें उस रेलवे फाटक पर जाने से रोक दिया था जहां यह दर्दनाक दुर्घटना हुई थी. इस हादसे में एक ही परिवार के तीन बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी. जैसाकि एक स्थानीय भाजपा नेता ने बताया, प्रदर्शनकारी शुरू में शांत थे और मुख्यमंत्री से यह अपेक्षा कर रहे थे कि वे निजी रूप से इस मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दें और संवेदना जतायें. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. उल्टा, उनके साथ चल रही पुलिस ने भीड़ के बीच से रास्ता बनाने की कोशिश की. इसके तत्काल बाद भीड़ ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी.

तभी आदित्यनाथ ने माइक संभाल लिया और प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देने के लहजे में कहा कि यह एक दुर्घटना है और आपलोग नौटंकी बंद करें. मुख्यमंत्री की ऐसी प्रतिक्रिया ने उनकी अपनी पार्टी को भौंचक्का कर दिया. और अब इसका एक वीडियो चारों तरफ इस टिप्पणी के साथ फ़ैल गया है कि एक ऐसा मुख्यमंत्री जिसे लोगों की परवाह नहीं है.

इस बीच, मुख्यमंत्री के गिरती छवि को ऊपर उठाने के लिए राज्य सरकार अथक प्रयास कर रही है. उसने रचनात्मक एजेंसियों से “मुख्यमंत्री के दृष्टिकोण के प्रभावी चित्रण” से संबंधित प्रस्ताव पेश करने को कहा है. इकोनोमिक टाइम्स के मुताबिक, राज्य सरकार ने कहा है, “यूपी सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री के दृष्टिकोण के प्रभावी चित्रण के लिए आकर्षक और मौलिक विज्ञापन अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय बाजारों में जारी करना चाहेगा.”

Courtesy: The Citizen,
Original published date:
29 Apr 2018
Yogi Adityanath
Uttar pradesh

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश


बाकी खबरें

  • एसकेएम की केंद्र को चेतावनी : 31 जनवरी तक वादें पूरे नहीं हुए तो 1 फरवरी से ‘मिशन उत्तर प्रदेश’
    मुकुंद झा
    एसकेएम की केंद्र को चेतावनी : 31 जनवरी तक वादें पूरे नहीं हुए तो 1 फरवरी से ‘मिशन उत्तर प्रदेश’
    16 Jan 2022
    संयुक्त किसान मोर्चा के फ़ैसले- 31 जनवरी को देशभर में किसान मनाएंगे "विश्वासघात दिवस"। लखीमपुर खीरी मामले में लगाया जाएगा पक्का मोर्चा। मज़दूर आंदोलन के साथ एकजुटता। 23-24 फरवरी की हड़ताल का समर्थन।
  • cm yogi dalit
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव और दलित: फिर पकाई और खाई जाने लगी सियासी खिचड़ी
    16 Jan 2022
    चुनाव आते ही दलित समुदाय राजनीतिक दलों के लिए अहम हो जाता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। उनके साथ बैठकर खाना खाने की राजनीति भी शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि दलित वोटर अपनी पसंद किसे बनाते हैं…
  • modi
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे : झुकती है सरकार, बस चुनाव आना चाहिए
    16 Jan 2022
    बीते एक-दो सप्ताह में हो सकता है आपसे कुछ ज़रूरी ख़बरें छूट गई हों जो आपको जाननी चाहिए और सिर्फ़ ख़बरें ही नहीं उनका आगा-पीछा भी मतलब ख़बर के भीतर की असल ख़बर। वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन आपको वही बता  …
  • Tribute to Kamal Khan
    असद रिज़वी
    कमाल ख़ान : हमीं सो गए दास्तां कहते कहते
    16 Jan 2022
    पत्रकार कमाल ख़ान का जाना पत्रकारिता के लिए एक बड़ा नुक़सान है। हालांकि वे जाते जाते भी अपनी आंखें दान कर गए हैं, ताकि कोई और उनकी तरह इस दुनिया को देख सके, समझ सके और हो सके तो सलीके से समझा सके।…
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    योगी गोरखपुर में, आजाद-अखिलेश अलगाव और चन्नी-सिद्धू का दुराव
    15 Jan 2022
    मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के अयोध्या से विधानसभा चुनाव लडने की बात पार्टी में पक्की हो गयी थी. लेकिन अब वह गोरखपुर से चुनाव लडेंगे. पार्टी ने राय पलट क्यों दी? दलित नेता चंद्रशेखर आजाद की पार्टी अब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License