NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
ज़िम्बाब्वेः शिक्षकों ने राष्ट्रपति की धमकी की नज़रअंदाज़ करते हुए तीसरे सप्ताह में विरोध प्रदर्शन जारी रखा
ज़िम्बाब्वे में शिक्षक जो अपने वेतन में कटौती के कारण स्कूल आना जाना भी मुश्किल समझ रहे हैं उन्होंने 28 सितंबर से काम से दूर रहने का फैसला किया।
पीपल्स डिस्पैच
12 Oct 2020
ज़िम्बाब्वे

जिम्बाब्वे के पब्लिक स्कूल के शिक्षकों का हड़ताल सोमवार 12 अक्टूबर को तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया। इस सप्ताह के शुरू में राष्ट्रपति इमर्सन म्नंगाग्वा ने 28 सितंबर को स्कूलों को फिर से खोलने के बाद काम पर लौटने से इनकार करने वाले शिक्षकों को धमकी दी थी। ऐसी ही धमकी शिक्षा मंत्री ने पहले भी दी थी।

राष्ट्रपति म्नंगाग्वा ने बुधवार को कहा, “मैं आप सभी को विश्वास दिलाता हूं कि शिक्षकों द्वारा मांगों के लिए सरकार को कभी मजबूर नहीं किया जाएगा। ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करने में विफल रहने पर उन्हें लगेगा कि वे हमें वह करने के लिए मजबूर करेंगे जो हम चाहते हैं। नहीं, हम इस पर बहुत राज करते हैं।” उन्होंने कहा, “हम नियम लागू करेंगे कि (केवल) काम करने वालों को भुगतान किया जाएगा। जो लोग घर पर हैं उन्हें काम पर नहीं माना जाएगा।”

उन शिक्षकों के लिए, जो अपने काम के लिए आने जाने का ख़र्च भी वहन करने में असमर्थ होने की बात कहते हैं ऐसे में राष्ट्रपति की धमकी कपटपूर्ण है। इन शिक्षकों ने दो वर्षों के अंतराल में अपने वेतन में लगभग 550 यूएस डॉलर से 30-35 डॉलर तक की गिरावट देखी है।

अमलगैमेटेड रुरल टीचर्स यूनियन ऑफ ज़िम्बाब्वे (एआरटीयूजेड) के अध्यक्ष ओबर्ट मसारौरे ने पीपल्स डिस्पैच से कहा, “हड़ताल करने वाले शिक्षकों को पेरोल से हटाने की धमकी असंगत हैं। यह लाश का गला घोंटने की धमकी देने जैसा है।” उन्होंने कहा कि शिक्षकों को पहले ही "2018 से वास्तविक वेतन प्राप्त होना बंद हो गया"।

हड़ताल शुरू होने के एक दिन बाद ही शिक्षा मंत्री केन माथेमा द्वारा इस तरह की धमकी दी गई थी। सरकार द्वारा बाद में पेश की गई 40% वेतन वृद्धि को यूनियनों ने खारिज कर दिया। वे कहते हैं कि यह बढ़ोतरी जो उनके वेतन को 50 डॉलर प्रति माह के बराबर भी नहीं बढ़ाएगी जो पर्याप्त नहीं है।

जिम्बाब्वे में कई क्षेत्रों के कर्मचारियों द्वारा वेतन की इसी तरह की कटौती का सामना करना पड़ा है, जिसमें सरकारी कर्मचारी जैसे डॉक्टर और नर्स शामिल हैं। देश में पिछले दो वर्षों में कर्मचारियों के वेतन में औसतन 85% की गिरावट आई है।

सरकार का कहना है कि उसे जिस वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है, वह इसे उनके उक्त वेतन को बहाल करने की अनुमति नहीं देता है। लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि यह उचित प्राथमिकताओं को स्थापित करने का सवाल है। वे बताते हैं कि इसी सरकार ने अपेक्षाकृत धनी व्हाइट फारमर्स को मुआवजे के रूप में 3.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान करने का फैसला किया, जिनकी भूमि को एक दशक पहले भूमि सुधार के दौरान पुनर्वितरित किया गया था।

zimbabwe
Corona Virus
Lockdown
teachers protest
International news

Related Stories

दिल्ली : पांच महीने से वेतन न मिलने से नाराज़ EDMC के शिक्षकों का प्रदर्शन

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

एमपी : ओबीसी चयनित शिक्षक कोटे के आधार पर नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे

बिहार : शिक्षा मंत्री के कोरे आश्वासनों से उकताए चयनित शिक्षक अभ्यर्थी फिर उतरे राजधानी की सड़कों पर  

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने वाले सैकड़ों शिक्षक सड़क पर प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?

डीयू: एनईपी लागू करने के ख़िलाफ़ शिक्षक, छात्रों का विरोध

"लॉकडाउन जनता से अन्याय और अमानवीय, हम पूरी ताक़त से करेंगे विरोध!" : पंजाब के किसान

असुरक्षा और हिंसा के ख़िलाफ़ हैती के शिक्षक राष्ट्रीय हड़ताल पर

मानेसर: वेतन बढ़ोतरी की मांगों को लेकर हजारों मजदूरों ने काम किया बंद, बैठे हड़ताल पर

मोदी सरकार ने पूरे किए अपने वादे, बेरोज़गारी के आंकड़ों में दिखता विकास!


बाकी खबरें

  • Farm Laws Repealed
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान एकता के आगे झुकी मोदी सरकार
    19 Nov 2021
    पिछले एक साल से चल रहे किसान आंदोलन की आज बड़ी जीत हुई है। मोदी सरकार ने कृषि क़ानून वापस लेने का ऐलान किया है। यह सिर्फ किसानों के लिए नहीं, बल्कि भारत के लोकतंत्र की जीत है।
  • law
    विक्रम हेगडे
    भारतीय अंग्रेज़ी, क़ानूनी अंग्रेज़ी और क़ानूनी भारतीय अंग्रेज़ी
    19 Nov 2021
    न्यायिक फ़ैसलों और दूसरे क़ानूनी दस्तावेज़ों में साहित्यिक श्रेष्ठता का होना ज़रूरी नहीं है।
  • education
    प्रियंका ईश्वरी
    बिहार के बाद बंगाल के स्कूली बच्चों में सबसे ज़्यादा डिजिटल विभाजन : एएसईआर सर्वे
    19 Nov 2021
    एनुअल स्टेटस ऑफ़ एजुकेशन रिपोर्ट 2021 की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, स्कूली बच्चों के घरों में कम से कम एक स्मार्टफ़ोन होने के मामले में केरल(97.5%), हिमाचल प्रदेश(95.6%) और मणिपुर(92.9%) सबसे आगे हैं।
  • sc
    सोनिया यादव
    "पॉक्सो मामले में सबसे ज़रूरी यौन अपराध की मंशा, न कि ‘स्किन टू स्किन’ टच!"
    19 Nov 2021
    शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सेक्शुअल मंशा से छूना भी अपराध है। धारा 7 के तहत टच और फिजिकल कॉन्टैक्ट को “स्किन टू स्किन टच” तक सीमित करना न केवल संकीर्ण होगा, बल्कि प्रावधान की बेतुकी…
  • Farmer wins, hate is defeated
    न्यूज़क्लिक टीम
    जीत गया किसान, नफरत हार गई!
    19 Nov 2021
    पिछले एक साल से जिन 3 कृषि कानूनों को लेकर किसान आंदोलन कर रहा है आज मोदी सरकार ने उसको ख़ारिज करने का फ़ैसला लिया है, लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि जब तक मोदी सरकार…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License