संसद का मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ता जा रहा है और सरकार किसी भी सर्वमान्य हल की तरफ़ बढ़ने का संकेत नहीं दे रही है। यह सरकार की ज़िद है और लोकतंत्र-विरोधी काम है।
आखिर हम कैसे फर्क करें कि राज का धंधा इरोटिका से जुड़ा था या पॉर्न उद्योग से? हम कैसे समझें कि वह अपनी टीम के साथ जो कुछ कर रहा था वह समाज के लिए अस्वस्थ है या नहीं और कानूनी रूप से अपराध की श्रेणी…
माइनिंग वर्कर्स फ़ेडरेशन ऑफ़ म्यांमार से जुड़े ये खनिक फ़रवरी में सैन्य तख़्तापलट के बाद से हड़ताल पर हैं। उनकी लंबी हड़ताल ने सैन्य शासन के राजस्व को प्रभावित किया है।
आज के नेता विचारधारा की परवाह नहीं करते हैं और एक पार्टी से दूसरी पार्टी में आते-जाते रहते हैं, और फिर भी वे जनता के हितों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं। आख़िर ऐसा क्यों है?
उत्तराखंड राज्य के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में स्वच्छता और सफ़ाई व्यवस्था में लगे हजारों की तादाद में सफ़ाईकर्मी अपना काम छोड़ कर हड़ताल पर हैं।