राजधानी लखनऊ तो पूरी तरह टूट चुकी है, मंज़र इस कदर भयावह हो चला है जिसकी कोई इंतहा नहीं। अस्पतालों से लेकर श्मशानघाटों तक की तस्वीरें सरकार की ‘सफलता’ की कहानी कहने के लिए काफ़ी हैं।
हमारे यहाँ वैक्सीन की एकाधिकार वाली मूल्य नीति लागू हो चुकी है। इस मूल्य नीति से नागरिकों, राज्य और जल्द ही अर्थव्यवस्था की कीमत पर वैक्सीन के निर्माता को मुनाफ़ा हासिल होगा।
वैक्सीन सार्वजनिक वैश्विक संपदा होती है। इस पर दुनिया के हर व्यक्ति का अधिकार बनता है। इसलिए वैक्सीन निर्माण में दुनिया की सरकारों ने भी खूब पैसा लगाया है। संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन जीने…
क्या केंद्र की सत्ता में बैठी भाजपा की सरकार ‘वैक्सीन ब्लैकमेलिंग’ के लिए ज़मीन तैयार कर रही है? या भाजपा शासित राज्यों में अतिरिक्त वैक्सीन की सप्लाई करके डबल इंजन के संघवाद विरोधी अभियान को सफल…