क्या अब सिर्फ़ उसी की चलेगी जिसकी आबादी अधिक होगी? और उन लोगों के रास्ते में रोड़ा अटकाया जाएगा, जो बहुसंख्यक के धर्म को नहीं मानते? धर्म का यह उन्मादी रूप समाज को किधर ले जाएगा?
भले ही निर्वतमान बीजेपी सरकार ने चुनावों में जाने से ठीक पहले चाय बागानों के कामगारों के वेतन में बढ़ोतरी की हो, जो वायदे से बहुत कम है, लेकिन कामगारों का दावा है कि अब भी यह बढ़ा हुआ पैसा उनके पास…