ढेर सारी योजनाएं समाज में महिलाओं की यथास्थिति को सुदृढ़ बनाएं रखीं हैं। महिला श्रमशक्ति की भागीदारी की दर में तेज गिरावट ने भी यथास्थिति को मजबूत करने का काम किया है, जिसके चलते ज्यादा से ज्यादा…
...सामाजिक न्याय के विचार को ताक़तवर राजनीतिक सत्ता ने तोड़ मरोड़ दिया है। अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ रहा है और आरक्षण की मांग भी, लेकिन सामाजिक न्याय की परिधि सिमटती जा रही है।
जब ईडी के वकील ने ईडी अधिकारियों के विरूद्ध जबरिया कार्रवाई रोकने के लिए अदालत के दखल का अनुरोध किया तब राज्य ने कहा कि प्राथमिकी के आधार पर जबरिया कार्रवाई की आशंका की कोई जरूरत नहीं है।