1982 में ‘बाज़ार’ जैसी शानदार क्लासिकल फ़िल्म बनाने वाले सागर सरहदी इस फ़िल्म का दूसरा भाग (Sequel) ‘बाज़ार-2’ भी बनाना चाहते थे। मगर ऐसा हो न सका। वे तो अपने नाटक राजदरबार जिसमें वे किसान की भूमिका…
सागर सरहदी साहब ने ‘बाज़ार’ जैसी क्लासिकल फ़िल्म दी। इसके अलावा उन्होंने नूरी, कभी-कभी, सिलसिला और चांदनी जैसी सुपरहिट फ़िल्में भी दीं। वे हमेशा प्रगतिशील आंदोलन के साथी रहे। उनके निधन से फ़िल्म के…
वाम समर्थकों के ख़िलाफ़ टीएमसी के एक दशक से चल रहे लम्बे हिंसक अभियान ने भाजपा का मुक़ाबला करने में सक्षम इकलौती ताक़त को कमज़ोर कर दिया, लेकिन अब वामपंथी फिर से लड़ाई में उतर गए हैं।