विपक्षी दलों के बहिष्कार के आह्वान के बीच इमरान खान ने यह जीत हासिल की। हाल में करीबी मुकाबले वाले सीनेट चुनाव में वित्त मंत्री की हार के बाद उनकी सरकार पर संकट आ गया था।
ऊपरी तौर पर आपको लग सकता है कि इस आंदोलन का क्या हासिल रहा!, क्योंकि मुद्दा तो वहीं अटका है। लेकिन अगर आप गहराई से विश्लेषण करेंगे तो पाएंगे कि यह आंदोलन अपने आप में सफल हो चुका है।
हरियाणा में डबल इंजन की सरकार फिर भी प्राइवेट सेक्टर में नौकरी के लिए हरियाणा के लोगों को 75 फ़ीसदी आरक्षण! क्या ये संवैधानिक है? विश्लेषण कर रहे हैं अजय कुमार।
2016 विधानसभा चुनावों से पहले पिनाराई विजयन ने एक यात्रा का नेतृत्व किया था, जिसे नव केरल नाम दिया गया था। इसने एक ऐसे वक्त में लोगों में उम्मीद व भरोसा जगाया था, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त…