बंगाल ऐसे दौर से गुज़र रहा है जहां हिंसक झड़पों और शुरुआती झगड़ों से पल-पल उसके सामाजिक ताने-बाने को चोट पहुंच रही है, जो वाम मोर्चे के 34 सालों के शासन में कभी देखने को नहीं मिला।
आम लोग भी यह जान चुके हैं कि कोरोना बीमारी तो है, उससे भी कहीं ज्यादा यह राजनीतिक महामारी है। बीमारी से तो कुछ सावधानियां बरत कर बचा जा सकता है, लेकिन राजनीतिक महामारी से बचने की चुनौती आसान नहीं है।
तीन महीने से जारी किसान आंदोलन स्थायित्व ग्रहण कर चुका है, और एक नए चरण में प्रवेश के संक्रमण काल से गुजर रहा है। एक ओर आंदोलन अधिक गहराई और विस्तार में जा रहा है, दूसरी ओर सरकार पूरी तरह…