जैसे ही ये ख़बर फैली कि सांसद गाँव के दौरे पर पहुँचने वाले हैं, किसानों का एक बड़ा समूह जमा हो गया और उसने केन्द्रीय मंत्री बालियान के खिलाफ जमकर नारेबाजी करनी शुरू कर दी।
322 पेज का उपन्यास ‘आई हैव बिकम द टाइड’ कई शताब्दियों की यात्रा करता है। यह उपन्यास दलित ज़िंदगियों व जाति असमानता और जाति उत्पीड़न के बारे में है, जो सदियों से जारी है। क़रीब 900 सालों तक इसकी कथा…
दंगा पीड़ितों के ज़ख़्म आज भी हरे हैं। वे न पुलिस प्रशासन की कार्रवाई से संतुष्ट हैं न दिल्ली सरकार की कार्रवाई से। हर कोई यही कहता है- "हमें बस न्याय मिले और गुनहगारों को सज़ा मिलनी चाहिए।"
‘‘विश्व के केवल 1 प्रतिशत वाहनों के साथ भारत वाहन-टक्कर संबंधी (crash-related) मृत्यु के 11 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। भारत की सड़कों पर वाहन टक्कर प्रति वर्ष 1,50,000 लोगों की जान लेते हैं…