चमोली हादसे को प्राकृतिक कैसे माना जाए? प्राकृतिक कह देना तो भोलेपन की निशानी है। अगर इसे प्रकृति का कोप भी मानें तो यह तय है कि प्रकृति किसी वजह से कुपित हुई होगी। यह वजह मनुष्य निर्मित ही रही होगी…
पुलिस के जवानों का आज किसानों के प्रति सामान्य रवैया दर्शाता है कि देश की खेती-किसानी को कंपनी राज के हवाले किए जाने के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों से उन्हें भी हमदर्दी है।
अजब दौर है। कोई ख़ुशी से बिक रहा है, किसी को ज़बरन बेचा जा रहा है। यानी आज बिकना सबकी नियति हो गई है। शायद यही पूंजीवाद है। बस ख़्याल ये रहे कि वतन न बिक जाए...