प्रेम सिर्फ संवेदनाओं और भावनाओं का खेल ही नहीं है प्रेम कई तरह के बंधनों को भी तोड़ता है। यह बंधन जाति-धर्म, ऊंच-नीच,काला-गोरा सबको धता बताता है। प्रेम मानव गरिमा की सबसे मुखर अभिव्यक्ति और प्रतिरोध…
“यह एक ऐसी जगह है जिसकी अहमियत मेरे लिए किसी भी दूसरी चीज़ से ज़्यादा है क्योंकि यह वो जगह है जहाँ से हम एक समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष भारत के सपने को जीवित रखते हुए अपने सपनों के भारत के लिए संघर्ष…
अक्सर नारी कलाकार भी पुरूष के सौंदर्यमानक से अभिभूत नजर आती हैं। अखिल भारतीय स्तर पर चुनिंदा महिला कलाकारों ने ही विचार के स्तर पर भी स्वतंत्र स्त्री दृष्टि को अपनी कला अभिव्यक्ति में मुखरित किया है।
क्या निकाह के लिए बालिग़ होना जरूरी नहीं? पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एक हालिया फ़ैसले ने देश में एक बार फिर शरीयत कानून-1937 में बदलाव पर बहस छेड़ दी है।